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'मुर्गा बना दो, पर ना वोट देंगे, ना लड़ेंगे', सचिन पायलट के गढ़ में निकाय चुनाव का बहिष्कार

कांग्रेस महासचिव और टोंक सीट से विधायक सचिन पायलट के क्षेत्र में एक गांव के लोगों ने नाराज होकर निकाय चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. रवीश टेलर की रिपोर्ट.

'मुर्गा बना दो, पर ना वोट देंगे, ना लड़ेंगे', सचिन पायलट के गढ़ में निकाय चुनाव का बहिष्कार
डारडाहिन्द गांव के लोगों ने प्रशासन के समझाने पर भी फैसला नहीं बदला
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राजस्थान में नगर निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच सचिन पायलट के गढ़ टोंक में एक गांव के लोगों ने चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी है.  डारडाहिन्द गांव के लोगों ने परिसीमन से नाराज होकर यह फैसला किया है. परिसीमन में उनके गांव को पंचायत से हटाकर नगर परिषद क्षेत्र में शामिल कर दिया गया था. इसके बाद गांव की जनता ने निर्णय लिया कि वह नगर परिषद चुनाव का बहिष्कार करेंगे और गांव से ना ही कोई चुनाव लड़ेगा ओर न ही गांव में वोट डाले जाएंगे. ग्रामीणों की मांग है कि गांव को पुनः ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाए. 

एसडीएम की समझाने की कोशिश नाकाम

ग्रामीणों को समझाने के लिए SDM सीमा खेतान और तहसीलदार अजित पाल सिंह यादव गांव पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर चुनाव में मतदान करने की अपील की. लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और प्रशासन की समझाइश को मानने से इनकार कर दिया. ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती वे निकाय चुनाव में एक भी वोट नहीं डालेंगे और गांव से कोई भी प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ेगा.

ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले करीब 18 महीनों से गांव में विकास कार्य ठप पड़े हैं. उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर गांव की समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई. ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव को नगर निकाय में शामिल किया गया तो हर चीज के दाम बढ़ेंगे और इसके बावजूद गांव का विकास नहीं होगा. ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा प्रशासन कहेगा तो हम मुर्गा बन जाएंगे लेकिन एक भी मत नहीं डालेंगे.

गांव के गेट पर लगेगा ताला

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि चुनाव के दिन गांव के गेट पर ताला लगाया जाएगा और किसी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग को लेकर प्रशासन की ओर से SDM और तहसीलदार गांव पहुंचे लेकिन उनकी मांग के बावजूद कोई भी नेता उनसे मिलने नहीं आया. ग्रामीणों ने SDM सीमा खेतान का आभार जताते हुए कहा कम से कम आपने हमारी सुध तो ली वो भी 18 महीने बाद. 

ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि न तो वे मतदान करेंगे और न ही किसी राजनीतिक दल से कोई प्रत्याशी गांव से उम्मीदवारी जताएगा.ग्रामीणों का कहना है कि जब तक डारदाहिन्द को पुनः ग्राम पंचायत नहीं बनाया जाता, उनका आंदोलन और चुनाव बहिष्कार जारी रहेगा.

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