चूरू में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने एक बड़ी कार्रवाई की है. अधिकारियों ने सड़क पर तीन ऐसी बसों को पकड़ा है जिनके नंबर एक ही हैं. तीनों बसों को सीज कर लिया गया है. ये तीनों बसें पिछले कई सालों से धड़ल्ले से संचालित हो रही थीं और यात्रियों की जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रही थीं. तीनों बसों को जब्त कर लिया गया है और अब उनके संचालकों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने तथा अन्य कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है.
मुखबिर ने दी थी खबर
एक ही नंबर की तीन बसों के बारे में एक मुखबिर ने पुलिस को सूचना दी थी. इसके बाद परिवहन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और विभाग के अधिकारी भी बस संचालक के फर्जीवाड़े क़ो देख दंग रह गए. आरटीओ इंस्पेक्टर रोबिन सिंह ने बताया चूरू जिले में लंबे समय से टैक्स बचाने के उद्देश्य से कुछ बस ऑपरेटर यहां यात्रियों की जान जोखिम मे डाल चोरी और वगैर फिटनेस की बसों से यात्रियों क़ो इन बसों से यात्रा करवा रहे थे.
इंस्पेक्टर रॉबिन सिंह के अनुसार, तीनों बसें पिछले तीन से चार वर्षों से कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित हो रही थीं. आशंका है कि आरसी को सरेंडर या सस्पेंड करवाने के बाद इन बसों का संचालन किया जा रहा थ.

तीनों बसों को सीज कर लिया गया है
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असल नंबर वाली बस की तलाश
मुखबिर की सूचना पर टीम मौके पर पहुंची और बस के चेचिस नंबर चैक किए तो चेचिस नंबर ही गायब मिले. आरोपियों ने चेचीस से नंबर को शातिराना तरीके से काट रखा था. जांच के दौरान तीनों बसों के चेसिस नंबर की प्लेट (चेसिस की टुकड़ी) भी गायब मिली, जिससे इनके फर्जी होने की आशंका और गहरा गई है.
जांच के दौरान जब बसों के चेसिस की पड़ताल की गई तो तीनों बसों से चेसिस नंबर की पहचान वाली प्लेट ही गायब मिली. प्रारंभिक जांच के आधार पर परिवहन विभाग का कहना है कि ये तीनों बसें मूल (ओरिजिनल) वाहन नहीं हैं, बल्कि फर्जी तरीके से तैयार कर संचालित की जा रही थीं. संबंधित पंजीकरण नंबर वाली असली बस अभी भी सड़क पर चलने की संभावना है, जिसकी तलाश की जा रही है.

बस संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है
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अलग रूटों पर हो रहा था संचालन
हैरानी की बात तों यह की ये तीनों बसें अवैध रूप से अलग-अलग रूटों पर संचालित की जा रही थीं. इनमें एक बस चूरू-झुंझुनूं मार्ग पर, दूसरी अडसीसर–झुंझुनूं रूट पर चल रही थी, जबकि तीसरी बस एक स्कूल परिसर में खड़ी मिली. तीनों पर एक ही पंजीकरण नंबर अंकित था.
बसों की वास्तविक स्थिति और पूरा मामला बस मालिक तथा चालकों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. यह भी जांच की जाएगी कि बसों को कबाड़ से तैयार किया गया या फिर चोरी के वाहनों का इस्तेमाल किया गया. विभाग बस मालिकों के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) सहित अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. अधिकारियों के अनुसार, बस मालिकों पर करीब 15 से 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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