India at Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जहां नीरज चोपड़ा, लवलीना बोरगोहेन और मीरा बाई चानू ने मेडल जीतकर अपने परफॉर्मेंस को दोहराने में सफल रहे तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे एथलीट भी रहे जिन्होंने इस इवेंट में मेडल जीतकर अपनी नई पहचान बनाई है. ये एथलीट बिना किसी खास शोर-शराबे के आए थे, लेकिन गेम्स के दौरान चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरे. उन्होंने अपनी पहचान बनाई और ऐसा इतिहास लिखा जिसे पूरी दुनिया याद करेगी. ऐसे में जानते हैं उन 6 एथलीट के बारे में जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 अपने परफॉर्मेंस से स्टार बनकर उभरे.

अस्मिता डे (भारत, जूडो)
भारत की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक जूडोका अस्मिता डे की रही है, जिन्होंने सबको हैरान करते हुए जूडो में भारत के लिए पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल जीताया. त्रिपुरा के एक छोटे से गांव की रहने वाली 23 साल की अस्मिता ने मुश्किल हालात का सामना करते हुए इतिहास रचा और तुरंत ही भारतीय खेल प्रेमियों के बीच मशहूर हो गईं, उनके पिता साइकिल मैकेनिक रहे थे. अपने पिता की साइकिल रिपेयर की दुकान से लेकर ग्लासगो में पोडियम के टॉप तक, अस्मिता डे का सफर तेजी से और उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रेरणादायक रहा है. अभी वह 20 साल की उम्र के शुरुआती दौर में हैं और उनका साफ मकसद ओलंपिक मेडल जीतना है, ऐसा लगता है कि उनका सफर तो बस अभी शुरू ही हुआ है. जिस लड़की ने कभी कॉम्बैट स्पोर्ट्स के बारे में सोचे बिना 800 मीटर की दौड़ लगाई थी, उसी लड़की ने जूडो मैट पर भारतीय खेल इतिहास का एक नया अध्याय लिखा है".

यश वीर सिंह (भारत, जैवलिन थ्रो)
जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा का दबदबा है, इसलिए बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि यश वीर सिंह सुर्खियां बटोरेंगे. लेकिन इस युवा जैवलिन थ्रोअर ने अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए मेडल जीता और इंटरनेशनल मंच पर अपनी पहचान बनाई.ग्लासगो में उनकी शानदार वापसी भारत के लिए सबसे यादगार पलों में से एक बन गई. नीरज चोपड़ा के बाद अब भारत को जैवलिन थ्रो में एक और उम्मीद मिल गई है. एशियाड आने वाला है. वहां पर भी जैवलिन थ्रो में यश वीर सिंह ने उम्मीद जगा दी है.

तेजस्विन शंकर (भारत, डेकाथलॉन)
एथलेटिक्स की दुनिया में पहले से ही सम्मान पाने वाले तेजस्विन शंकर ने भारत के बड़े नामों जैसी स्टार पावर के बिना इन खेलों में हिस्सा लिया. चोट से जूझते हुए उन्होंने डेकाथलॉन में शानदार प्रदर्शन किया और इस इवेंट में भारत के लिए एक खास ब्रांन्ज मेडल जीता. उनकी हिम्मत और अलग-अलग तरह के इवेंट्स में अच्छा करने की काबिलियत की हर तरफ तारीफ हुई. तेजस्विन शंकर ने मेडल जीतकर अपने नाम से फैन्स को परिचित करा दिया है.

झंडू कुमार (भारत, पैरा पावरलिफ्टर , ब्रॉन्ज मेडल)
कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार के 28 वर्षीय पैरा पावरलिफ्टर ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. उन्होंने 181 किग्रा और 190 किग्रा वज़न सफलतापूर्वक उठाकर कुल 130.9 अंक हासिल किए. 'झंडू' नाम उन्हें तब दिया गया था जब उनके माता-पिता ने उनके पोलियो के इलाज में अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर दी थी. अब, इसी नाम ने भारत का मान बढ़ाया है.

प्रीति पवार (बॉक्सिंग, गोल्ड मेडल)
23 साल की प्रीति भारत की पहली महिला एथलीट हैं जिन्हें सीधे भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया गया है. 14 साल की उम्र में उनके चाचा विनोद पवार जो खुद नेशनल लेवल पर मेडल जीतने वाले बॉक्सर थे, उन्होंने प्रीति को बॉक्सिंग से परिचित कराया. वह पहले ही एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं और कुछ समय से शानदार फ़ॉर्म में हैं. उन्होंने 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में गोल्ड मेडल और इस साल की शुरुआत में एशियन एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट हुआंग शियाओ-वेन को हराकर शानदार जीत के साथ CWG में एंट्री की थी, और अब वह गोल्ड मेडलिस्ट बनकर लौटी हैं.

शर्मिला धनकड़ (गोल्ड मेडल)
दहेज का दंश झेलने वाली शर्मिला धनकड़ ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया और इन खेलों में पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत के 20 साल के इंतज़ार को खत्म किया. बेहद गरीब परिवार से आने वाली शर्मिला को कई सालों तक दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था. उन्हें घरेलू हिंसा का भी सामना करना पड़ा. जब वो 26 साल की थी तो उनके पहले पति ने उन्हें घर से निकाल दिया था. उस समय तक उनकी दो बेटिंयां हो चुकी थी. पहले पति से तिरस्कार सहने के बाद शर्मिला अपने दोनों बच्चों को लेकर पिता के घर लौट आईं. अब शर्मिला ने गोल्ड मेडल जीतकर दिखाया है कि जीवन हिम्मत हारने का नाम नहीं है. शर्मिला की कहानी सालों तक लोगों को प्रेरित करते रहेगी.
वैसे, इस कॉमनवेल्थ में भारत को 39 मेडल मिले हैं जिसमें 13 गोल्ड मेडल मिले हैं. सभी एथलीटों ने अपने परफॉर्मेंस से दिल जीता है. इसमें कोई शक नहीं कि भारत का यह अभियान मुक्केबाजों के रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन और एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग, जूडो व पैरा खेलों में खिलाड़ियों के दमदार खेल के दम पर बेहद यादगार रहा है.
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