आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियां भी कोटा के सागर रैगर के हौंसलों को कमजोर नहीं कर पाई. सागर ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल कर मिसाल कायम की. कोटा के कैथून में गोदल्याहेड़ी गांव के रहने वाले छात्र ने 564 अंक और 98.6296 पर्सेंटाइल हासिल किए. इसी के साथ उसकी ऑल इंडिया रैंक 27 हजार 157 और एससी कैटेगरी में AIR-684 रैंक रही. छात्र के पिता मुरली रैगर घर-घर से कबाड़ एकत्रित कर घर का गुजारा करते हैं. इन्हीं परिस्थितियों में उसने कैथून के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और 12वीं बोर्ड में भी 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. फिर डॉक्टर बनने का सपना देखा और उसे अपनी मेहनत के दम पर पूरा भी किया.
मजबूत इरादों से सपने को हकीकत में बदला
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण डॉक्टर बनने का सपना देख पाना आसान नहीं था. लेकिन सागर की कहानी ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादे, परिवार का साथ और सही समय पर मिला सहयोग किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है. यह सफलता न केवल एक छात्र की, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है. उसे निजी कोचिंग संस्थान के 'शिक्षा संबल कार्यक्रम' से भी सहायता मिली.

सागर के पिता मुरली रेगर घर-घर से कबाड़ जुटाते हैं.
बहन को कैंसर हुआ तो डॉक्टर बनने की ठानी
सागर बताते हैं कि गुटखे की लत के कारण उसकी बुआ की बेटी को कैंसर हो गया था. इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया. तभी डॉक्टर बनकर समाज में नशामुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए काम करने का संकल्प लिया. उसने बताया कि शिक्षा संबल योजना का सहयोग नहीं मिलता तो उन्हें बीएससी में प्रवेश लेना पड़ता.
शिक्षा संबल कार्यक्रम में हर साल 126 विद्यार्थियों का चयन
नवीन माहेश्वरी ने बताया कि 'एल.एन. माहेश्वरी परमार्थ न्यास' द्वारा कार्यक्रम संचालित किया जाता है. शिक्षा संबल कार्यक्रम के तहत, हर साल चयन परीक्षा के जरिए 126 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन किया जाता है. इन विद्यार्थियों को नीट की निशुल्क कोचिंग, रहने और खाने की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.
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