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रात 2 बजे बाइक राइड, सुबह 4 बजे पोहा...IIT और IIM में टॉप करने वाले लखनऊ के लड़के का सक्सेस सीक्रेट

IIM-A Gold Medalist Success Story: सिद्धांत अग्रवाल की एजुकेशन जर्नी काफी शानदार रही, उन्होंने आईआईटी से लेकर आईआईएम में पढ़ाई की और फिर विदेश भी गए, हालांकि आखिर में भारत लौटकर काम कर रहे हैं.

रात 2 बजे बाइक राइड, सुबह 4 बजे पोहा...IIT और IIM में टॉप करने वाले लखनऊ के लड़के का सक्सेस सीक्रेट
लखनऊ के रहने वाले IIM गोल्ड मेडलिस्ट सिद्धांत अग्रवाल की कहानी

देश के सबसे प्रतिष्ठित मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में शामिल IIM अहमदाबाद से गोल्ड मेडल हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. लेकिन किसी संस्थान के टॉपर की कहानी सिर्फ उस मेडल तक सीमित नहीं होती. असली सवाल यह है कि कुछ साल बाद वह कहां है, क्या कर रहा है. IIM अहमदाबाद के 2022-24 बैच के इंस्टीट्यूट रैंक 1 गोल्ड मेडलिस्ट सिद्धांत अग्रवाल की कहानी इसी सवाल का जवाब देती है. IIT खड़गपुर से पढ़ाई, अमेरिका की कंपनी कैपिटल वन में काम और फिर IIM अहमदाबाद के बाद भारत में ही वेंचर कैपिटल की दुनिया में करियर, आज सिद्धांत एलिवेशन कैपिटल में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट हैं और भारत में रहकर स्टार्टअप कंपनियों में निवेश कर रहे हैं.

लखनऊ के मिडिल क्लास परिवार से IIT और IIM तक

सिद्धांत अग्रवाल लखनऊ के एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. उनके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ शिक्षक भी हैं. पढ़ाई में मजबूत रहे सिद्धांत ने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल और फाइनेंशियल इंजीनियरिंग में इंटीग्रेटेड ड्यूल डिग्री की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका के सार्वजनिक रूप से कैपिटल वन में रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम किया. कुछ समय नौकरी करने के बाद उन्हें लगा कि वह ऐसे काम की ओर बढ़ना चाहते हैं, जिसमें कारोबार से सीधा जुड़ाव हो, फैसलों में ज्यादा जिम्मेदारी हो और उनके काम का असर भी दिखाई दे. इसी सोच के साथ उन्होंने MBA करने का फैसला लिया.

NDTV से बातचीत में सिद्धांत ने बताया कि उस समय यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि MBA के बाद वह क्या करेंगे, लेकिन उन्हें लगा कि यह उनके करियर के लिए सही कदम है. IIM अहमदाबाद, IIM बेंगलुरु और IIM कलकत्ता, तीनों संस्थानों से प्रस्ताव मिलने के बावजूद उन्होंने अहमदाबाद को चुना. उनके लिए IIM अहमदाबाद देश का सबसे बेहतरीन MBA संस्थान था.

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CAT में 99.97 पर्सेंटाइल, पहली कोशिश में मिली सफलता

IIM अहमदाबाद तक पहुंचने के लिए सिद्धांत ने CAT की तैयारी अपने ग्रेजुएशन के अंतिम साल में शुरू की. उन्होंने पहली ही कोशिश में 99.97 पर्सेंटाइल हासिल किया. सिद्धांत ने मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी की. इसके साथ उन्होंने मॉक टेस्ट सीरीज की मदद ली, जिससे परीक्षा के पैटर्न और सही रणनीति को समझने में मदद मिली. सिद्धांत बताते है कि CAT की तैयारी कर रहे छात्रों को पहले अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए और उसके आधार पर प्लान बनाना चाहिए. 

अनुशासन ने दिलाया गोल्ड मेडल

IIM अहमदाबाद में सिद्धांत को केस स्टडी आधारित पढ़ाई काफी पसंद आई. पढ़ाई के साथ प्रतियोगिताओं, कैंपस की दोस्ती और विदेशी एक्सचेंज प्रोग्राम ने उनको और निखारा. लेकिन इतने कॉम्पिटेटिव माहौल में पूरे बैच में पहला स्थान हासिल करने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अनुशासन और प्राथमिकता तय करने की रही.

MBA के दौरान छात्रों के सामने सामाजिक जीवन, करियर और पढ़ाई, तीनों को साथ लेकर चलने की चुनौती होती है. सिद्धांत ने शुरुआत में ही तय कर लिया था कि उनकी प्राथमिकता पढ़ाई रहेगी. इसी स्पष्टता ने उन्हें अपने समय और ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद की और आखिरकार वह इंस्टीट्यूट रैंक 1 के साथ गोल्ड मेडल तक पहुंचे.

रात में साबरमती, सुबह चार बजे पोहा और फिर नौ बजे क्लास

IIM अहमदाबाद की उनकी यादें सिर्फ पढ़ाई और गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं हैं. कैंपस की सबसे यादगार स्मृतियों में वह देर रात की बाइक राइड को याद करते हैं. हमसे बातचीत में उन्होंने बताया कि व्यस्त दिन के बाद वह दोस्तों के साथ रात में बाइक से साबरमती रिवरफ्रंट तक जाते थे. कई बार रात दो बजे के बाद आइसक्रीम खाने निकल जाते और फिर सुबह चार बजे पोहा खाते. इसके बावजूद सुबह नौ बजे की क्लास में पहुंचना होता था.

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प्रतियोगिता कड़ी, लेकिन हर छात्र किताबी नहीं

IIM अहमदाबाद को लेकर आम धारणा है कि वहां पढ़ने वाला हर छात्र बेहद किताबी और सिर्फ अकादमिक उपलब्धियों पर ध्यान देने वाला होता है. सिद्धांत इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते. उनके मुताबिक प्रतियोगिता निश्चित तौर पर बहुत कड़ी है और ग्रेजुएशन की पढ़ाई की तुलना में MBA में दांव भी बड़ा होता है. लेकिन कैंपस में उन्हें अलग-अलग क्षमताओं, रुचियों और व्यक्तित्व वाले लोग मिले. यही विविधता IIM अहमदाबाद के अनुभव को खास बनाती है.

कैपिटल वन से एलिवेशन कैपिटल तक का सफर

IIM अहमदाबाद में प्रवेश से पहले सिद्धांत कैपिटल वन में रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर चुके थे. वहां उनका शुरुआती पैकेज 20 लाख रुपये से कम थी. MBA के दूसरे साल से पहले उन्होंने अर्ली-स्टेज फंड वेंचर हाईवे में इंटर्नशिप की. साल 2024 में नौकरी का बाजार आसान नहीं था और कंसल्टिंग क्षेत्र की नौकरियों के लिए प्रतियोगिता भी अधिक थी. इसी दौरान एलिवेशन कैपिटल IIM अहमदाबाद के कैंपस प्लेसमेंट में पहुंची और सिद्धांत को अपनी पसंद के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला. आज वह एलिवेशन कैपिटल में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट हैं और फिनटेक स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं. विदेश में काम करने का अनुभव होने के बावजूद उन्होंने भारत को ही अपना कार्यक्षेत्र चुना है.

IIM का नेटवर्क आज भी आ रहा काम

दो साल बाद पीछे मुड़कर देखने पर सिद्धांत मानते हैं कि IIM अहमदाबाद का नेटवर्क उनके करियर में महत्वपूर्ण रहा है. देश और दुनिया में फैला पूर्व छात्रों का नेटवर्क नए अवसरों और लोगों तक पहुंच बनाने में मदद करता है. संस्थान का नाम शुरुआती करियर में विश्वसनीयता भी देता है. लेकिन आज सिद्धांत खुद उस नेटवर्क का इस्तेमाल सिर्फ अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि भारत के अगले दौर के कारोबारियों और स्टार्टअप संस्थापकों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं.

AI, फिनटेक और डीप टेक में भारत के लिए बड़े अवसर

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सिद्धांत काफी आशावादी हैं. उनका मानना है कि देश मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था से उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. आने वाले सालों में AI इस बदलाव को और तेज कर सकती है.

हमसे बातचीत में उन्होंने कहा कि फिनटेक और कंज्यूमर टेक में AI ग्राहक अनुभव और सेवाओं को बड़े स्तर पर बदल सकती है. इसके अलावा डीप टेक में बढ़ता निवेश भी उन्हें भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिखाई देता है. इस क्षेत्र में नतीजे आने में समय लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आर्थिक विकास का बड़ा आधार बन सकता है.

‘आज युवा के लिए स्टार्टअप शुरू करना पहले से आसान'

सिद्धांत के मुताबिक भारत में आज युवा उद्यमियों के लिए माहौल पहले की तुलना में काफी बेहतर है. पूंजी, मार्गदर्शन और प्रतिभा तक पहुंच बढ़ी है. AI ने भी कम संसाधनों में ज्यादा काम करने की क्षमता पैदा कर दी है. उनके मुताबिक अब सबसे बड़ी जरूरत पूंजी से ज्यादा विश्वास और जोखिम लेने की क्षमता की है. फिलहाल वह खुद कारोबार शुरू करने के बजाय दूसरी तरफ बैठकर संस्थापकों को सहयोग देने पर ध्यान दे रहे हैं और भारत के स्टार्टअप क्षेत्र को लेकर काफी उत्साहित हैं.

दुनिया में भारतीय प्रतिभा की पहचान मजबूत हुई

विदेशों में काम कर रहे भारतीय मूल के संस्थापकों ने वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिभा की पहचान मजबूत की है. खासकर अमेरिका में भारतीय मूल के कई संस्थापकों ने बड़ी कंपनियां खड़ी की हैं. सिद्धांत मानते हैं कि भारतीय प्रतिभा को आज दुनिया भर में गंभीरता से देखा जाता है. उनका संदेश भी इसी विश्वास से जुड़ा है, आज संभावनाओं का दायरा पहले की तुलना में बहुत बड़ा है और वे सीमाएं, जिन्हें युवा कभी खुद के लिए तय कर लेते थे, अब काफी हद तक टूट चुकी हैं.

IIT और IIM जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से निकलने के बाद भी सिद्धांत ने भारत में ही रहकर काम करने को चुना. उनका मानना है कि आने वाले सालों में भारत विश्व मानचित्र पर अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत लकीर खींचेगा.

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