- अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में बिल्लियों ने एक गैंगस्टर की जान बचाई
- जेल परिसर में लगभग बारह बिल्लियां हैं जो जेलकर्मियों और बंदियों के साथ घुल-मिल गई हैं
- बिल्लियां जेल में चूहों की संख्या कम करने के लिए लाई गई थीं और अब उनका संख्या करीब बारह हो गई है
राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल से बिल्लियों की ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. जेल प्रशासन के मुताबिक, यहां रहने वाली बिल्लियों ने सितंबर में लॉरेंस गैंग से जुड़े एक गैंगस्टर की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई. रात के समय एक कैदी अपनी सेल में सो रहा था. इसी दौरान नाली के रास्ते एक कोबरा सांप सेल के अंदर पहुंच गया. सो रहे कैदी को इसकी भनक तक नहीं लगी. तभी वहां मौजूद बिल्लियों की नजर सांप पर पड़ गई.
बिल्लियां सेल के अंदर पहुंचीं और कोबरा को घेरकर शोर मचाने लगीं. आवाज सुनकर गैंगस्टर की नींद खुली तो उसने सांप को देखा और तत्काल ड्यूटी पर तैनात संतरी को आवाज लगाई. जेलकर्मियों ने समय रहते सांप का रेस्क्यू कर लिया और बड़ा हादसा टल गया. इस घटना के बाद जेल में इन बिल्लियों को लेकर चर्चा और बढ़ गई है.
अफसरों के साथ गश्त, कैदियों से दोस्ती... जेल की गलियों में बेखौफ घूमती हैं 10-12 बिल्लियां
अजमेर हाई-सिक्योरिटी जेल में करीब 10 से 12 बिल्लियां अब जेल की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं. कोई भूरी है तो कोई काली और जेलकर्मी भी कई बार इनके रंग के हिसाब से इन्हें पुकारते हैं.
खास बात यह है कि ये बिल्लियां जेल परिसर में बेखौफ घूमती हैं. जेल अधिकारी और प्रहरी जब अलग-अलग हिस्सों में निगरानी के लिए गश्त करते हैं तो कई बार बिल्लियां भी उनके साथ कदमताल करती नजर आती हैं.
अधिकारी किसी सेल के पास रुकते हैं तो ये भी वहीं ठहर जाती हैं और गश्ती दल के आगे बढ़ने पर इनके कदम भी आगे बढ़ जाते हैं.
बंदियों के साथ भी इनका खास लगाव हो गया है. कई बंदी इन्हें रोटी चूरकर खिलाते हैं और दूध पिलाते हैं. कई बार ये कोठरियों के आसपास बैठी नजर आती हैं. लंबे समय तक जेल में रहने वाले बंदियों के लिए इनका साथ कुछ देर के लिए तन्हाई कम करने वाला अहसास भी देता है.
चूहे भगाने लाई गई थीं, अब जेल की 'फैमिली' बनीं; सुरक्षा के बीच बिल्लियों पर भी नजर
जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ के अनुसार, जेल परिसर में चूहों की संख्या बढ़ने के बाद साल 2022 में बिल्लियों का एक जोड़ा लाया गया था. धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़कर करीब 10-12 हो गई और इनके आने के बाद जेल परिसर में चूहे अब न के बराबर रह गए हैं.
बिल्लियां भले ही जेलकर्मियों और बंदियों के बीच घुल-मिल गई हों, लेकिन हाई-सिक्योरिटी जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता.
प्रशासन इनकी आवाजाही पर भी नजर रखता है, ताकि इनके जरिए कोई प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने की कोशिश न कर सके.
वर्तमान में जेल में करीब 90 हार्डकोर अपराधी और गैंगस्टर बंद हैं. इनमें लॉरेंस गैंग और रोहित गोदारा का भी नाम है. ऐसे माहौल में इन बिल्लियों का जेल परिसर में बेखौफ घूमना अपने आप में अनोखी तस्वीर पेश करता है. एक तरफ कड़ी सुरक्षा और दूसरी तरफ इंसानों के बीच घुली-मिली ये बिल्लियां, जो कभी चूहे पकड़ती हैं तो कभी गश्ती दल के साथ चलती हैं और एक घटना में तो कथित तौर पर एक गैंगस्टर की जान बचाने का कारण भी बनीं.
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