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राजस्थान के टोंक में कहां से पहुंचा विस्फोटक का जखीरा? सुरक्षा एजेंसी खंगाल रही पाकिस्तानी कनेक्शन

टोंक में डीएसटी की ताजा कार्रवाई के बाद आतंकी कनेक्शन की आशंका भी गहरा गई है. राजस्थान के कई जिलों में पहले भी ऐसी कार्रवाई हो चुकी है. अमोनियम नाइट्रेट समेत अन्य विस्फोटक की लगातार बरामदगी के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इसके पीछे कोई नेटवर्क सक्रिय है? जानिए इस पूरे मामले के बारे में.

राजस्थान के टोंक में कहां से पहुंचा विस्फोटक का जखीरा? सुरक्षा एजेंसी खंगाल रही पाकिस्तानी कनेक्शन
टोंक में डीएसटी टीम का बड़ा एक्शन, अमोनियम नाइट्रेट की खेप पकड़ी.

राजस्थान टोंक में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के बाद आतंकी कनेक्शन की जांच शुरू हो गई है. डीएसटी टीम की छापेमारी में एक हिस्ट्रीशीटर के घर से 30 किलो अमोनियम नाइट्रेट की खेप पकड़ी जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. कार्रवाई में 184 जिलेटिन छड़ें और सैकड़ों मीटर फ्यूज वायर की बरामदगी भी हुई. आरोपी मौके से फरार है और पुलिस नेटवर्क की कुंडली खंगाल रही है. विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद किसी नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका भी जाहिर की जा रही है. चिंता इसलिए भी है क्योंकि पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी जैसे हैंडलर्स राजस्थान में स्लीपर सेल मॉड्यूल बनाने में जुटे हैं. 

सालभर में 5 जिलों से पकड़ी विस्फोटकों की खेप 

पिछले एक साल के दौरान नागौर, टोंक, जोधपुर, राजसमंद और जयपुर ग्रामीण सहित कई जिलों में विस्फोटक की खेप पकड़ी जा चुकी है. नागौर में गणतंत्र दिवस से पहले 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया गया था. हालांकि इन मामलों में अब तक किसी आतंकी संगठन या पाकिस्तान आधारित नेटवर्क से सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. 

टोंक में छापेमारी के दौरान अमोनियम नाइट्रेट और जिलेटिन छड़ें बरामद.

टोंक में छापेमारी के दौरान अमोनियम नाइट्रेट और जिलेटिन छड़ें बरामद.

नए साल से ठीक पहले 31 दिसंबर 2025 को भी टोंक पुलिस ने जयपुर-कोटा हाईवे पर एक कार से 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था. विस्फोटक सामग्री यूरिया की बोरियों में छिपाकर ले जाई जा रही थी. कार से 200 कारतूस और करीब 1100 मीटर फ्यूज वायर भी मिले थे. इससे जुड़े 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. 

हर बार एक जैसा पैटर्न, सप्लाई नेटवर्क के भी इनपुट 

जोधपुर जिले के ओसियां क्षेत्र का मामला हो या राजसमंद पुलिस का एक्शन, हर बार एक जैसा पैटर्न नजर आया. अधिकांश मामलों का संबंध खनन क्षेत्रों, क्रशर बेल्ट या ऐसे मार्गों से जुड़ा मिला, जहां विस्फोटकों का उपयोग खनन गतिविधियों में किया जाता है. जांच एजेंसियों को कई मामलों में बिना लाइसेंस भंडारण, अवैध खनन और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई नेटवर्क भी मिले हैं. हालांकि, मामले में पूरी तरह से जानकारी सामने नहीं है. 

पुलिस के साथ केंद्रीय एजेंसी की पड़ताल जारी

फिलहाल जांच अवैध सप्लाई नेटवर्क, लाइसेंस डायवर्जन और खनन नेटवर्क पर ही केंद्रित है. फिर भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात यह है कि अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर और जिलेटिन जैसी सामग्री का उपयोग खनन के साथ-साथ गंभीर आपराधिक और आतंकी गतिविधियों में भी किया जा सकता है. यही वजह है कि हर मामले में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो जाती हैं.

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सुशांत पारीक
Input Editor, NDTV Rajasthan
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