- राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी ने अधिक वार्ड जीते लेकिन कांग्रेस के वोट प्रतिशत में केवल मामूली अंतर रहा है
- कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा ने बताया कि बीजेपी का वोट प्रतिशत लोकसभा से नगर निकाय चुनाव तक लगातार घट रहा है
- आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने दलित पुरुषों और महिलाओं के मुकाबले बीजेपी से अधिक सीटें हासिल की हैं
राजस्थान के नगर निगम निकायों के लिए हुए चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. राजस्थान में 309 नगर निकायों के लिए दो चरणों में ईवीएम के जरिए वोटिंग हुई. अब जो नतीजे आए हैं, उससे कांग्रेस काफी खुश है. अब सवाल यह है कि कांग्रेस के लिए इस चुनाव नतीजे में क्या संकेत छिपे हैं?
राजस्थान में नगर निकाय के जो नतीजे आए हैं, उनमें बीजेपी ने 4178, कांग्रेस ने 3612 और निर्दलीयों ने 2273 वार्ड जीते हैं. जबकि 77 पार्षद निर्विरोध चुने गए. मगर इसी को यदि आप वोटों में परिवर्तित करें तो 309 निकायों में बीजेपी को 35.18 फीसदी और कांग्रेस को 34.24 फीसदी वोट मिले हैं. दोनों पार्टियों के बीच 0.94 फीसदी और 99,615 वोटों का अंतर है.
बड़े शहरों में बीजेपी, कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस
जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा और उदयपुर में बीजेपी जीती है, तो बीकानेर और झालावाड़ में कांग्रेस जीती है. जबकि जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली में मुकाबला कांटे का रहा और इन जगहों पर निर्दलीय जिसका साथ देंगे, वहां उसका मेयर बनेगा. वैसे अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है. झालावाड़, जो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का गढ़ रहा है, वहां बीजेपी बुरी तरह हारी है. झालावाड़ के 45 वार्डों में कांग्रेस को 29 और बीजेपी को 13 वार्डों में जीत मिली है.
डोटासरा ने बताया कांग्रेस के लिए क्यों खास हैं ये नतीजे
नगर निकाय के इन नतीजों के बाद राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा है कि, “स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर वही जीतता है जिसकी सरकार होती है. जब वसुंधरा जी मुख्यमंत्री थीं, तब बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 8.82 फीसदी था.
मगर इस बार यह अंतर 1 फीसदी रह गया है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 50.14 फीसदी वोट मिले थे, जो विधानसभा में घटकर 41.69 फीसदी हुआ और अब नगर निगम चुनाव में 35.18 फीसदी रह गया है. यानी बीजेपी का वोट प्रतिशत लगातार गिर रहा है.
आरक्षित वार्डों के आंकड़ों का भी दिया हवाला
डोटासरा आगे कहते हैं कि दलित पुरुषों के लिए आरक्षित वार्डों में 542 कांग्रेस जीती है, तो बीजेपी 350 पर रही. यानी 192 वार्डों का अंतर है. वहीं दलित महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 261 सीटें जीतीं, तो बीजेपी 186 पर रही. यहां 75 वार्डों का अंतर है. वहीं अनुसूचित जनजाति वार्डों में कांग्रेस ने 53 और बीजेपी ने 39 सीटें जीतीं. इसके बाद जब एनडीटीवी ने डोटासरा से पूछा कि फिर कांग्रेस कैसे हार गई?
परिसीमन और एसआईआर को बताया हार की वजह
डोटासरा का जवाब है कि सरकार ने जो परिसीमन किया, फिर एसआईआर हुआ, जिसमें काफी वोट काटे गए. कहीं एक वार्ड में 40,000 वोट हैं, तो दूसरे में केवल 4,000 वोट हैं. वार्डों का परिसीमन बीजेपी ने अपने फायदे के लिए किया, तब जाकर वह जीते हैं. डोटासरा का कहना है कि नगर निकाय चुनाव के नतीजे बीजेपी सरकार के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह हैं और यह सरकार अलोकप्रिय हो रही है. डोटासरा ने एनडीटीवी को बताया कि कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में युवाओं को तरजीह दी. 40 साल से कम उम्र के 49 फीसदी उम्मीदवार उतारे गए और यदि 50 साल से कम उम्र की बात करें तो उम्मीदवारों की संख्या 76 फीसदी रही.
CM ने कहा- सरकार ने 78 % संकल्प पूरे किए
साथ ही सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी निकायों तक विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है. सरकार की नीति के अनुरूप 'ग्राम विकास और शहर विकास' के कार्यों को धरातल तक पहुंचाने का काम किया गया है. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने भी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुनने और उनके सुख-दुख में सहभागी बनने का कार्य किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ढाई वर्ष पहले जो संकल्प लिए थे, उनमें से 78 प्रतिशत संकल्प पूरे किए जा चुके हैं. नगरीय विकास के लिए दिए गए संकल्प पत्र में जनता के हित, विकास, गरीब कल्याण, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों और आमजन से जुड़े जो वादे किए गए हैं, उन्हें भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई राजनीतिक दल जनता से जुड़कर उनके कार्यों और संवेदनाओं को समझते हुए उनके हर सुख-दुख में सहभागी बन सकता है, तो वह 'भारतीय जनता पार्टी' है. भाजपा का जनसंपर्क मॉडल, आमजन की बात सुनने और उनकी शिकायतों का समाधान करने की कार्यप्रणाली जनता ने स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि सरकार के जनसुनवाई और समस्या समाधान के प्रयासों की 84 प्रतिशत सफलता दर भी जनता के विश्वास को मजबूत करती है.
कांग्रेस के लिए आगे क्या संकेत?
राजस्थान की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि कांग्रेस को इसी तरह मेहनत करने की जरूरत है और पार्टी को परिसीमन और एसआईआर का पुरजोर मुकाबला करना पड़ेगा. मगर जहां तक राजस्थान की बात है, यदि कांग्रेस में गुटबाजी नहीं हुई तो आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए फिर से सत्ता में आने का एक मौका बन सकता है. राजस्थान की कमान किसे दी जाएगी, इस पर कांग्रेस आलाकमान का फैसला भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसी से राजस्थान में कांग्रेस का भविष्य तय होगा.
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