- राहुल गांधी और विपक्षी सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के लिए निकले थे
- चुनाव आयोग के दफ्तर से 200 मीटर पहले पुलिस ने विपक्षी सांसदों को रोक दिया
- इसके बाद राहुल गांधी दोपहर में आकाशवाणी भवन पहुंचे, थोड़ी देर बाद विपक्षी सांसद भी आ गए
विपक्षी सांसद मंगलवार सुबह करीब 11 बजे संसद भवन परिसर से संसद जोरदार नारेबाजी करते हुए निर्वाचन सदन की ओर निकले. विपक्षी सांसद निर्वाचन सदन पहुंच पाते, उससे 200 मीटर पहले ही उन्हें रोक दिया गया. ज्यादातर सांसदों को बसों में बैठाया जा रहा था. कुछ कांग्रेस नेता जा चुके थे और विपक्षी सांसदों का विरोध मार्च लगभग खत्म हो चुका था. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने प्रदर्शन का पूरा रुख ही बदल दिया.
दोपहर के आसपास, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नीति आयोग के दफ्तर के पास एक बैरिकेड पर चढ़ गए और तिरंगा लहराया. फिर राहुल नीचे उतरे और पुलिस ने उन सांसदों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च रोके जाने के बाद सड़क पर बैठ गए थे.
लेकिन राहुल गांधी के प्लान-बी ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया. राहुल को पुलिस ने अब तक हिरासत में नहीं लिया था और यहीं से पूरा खेल बदल गया.
प्रियंका बस में, राहुल बाहर
सांसदों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया जा रहा था. एक बस में प्रियंका गांधी वाड्रा भी थीं. लेकिन राहुल बाहर थे.
प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और महुआ मोइत्रा, और CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास उन लोगों में शामिल थे जिन्हें बसों में बिठाया गया था.
राहुल ने प्रियंका से बात की. उसके बाद राहुल दोपहर करीब 12:20 बजे आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की ओर तेजी से बढ़े, जिससे कांग्रेस और उनकी पार्टी के कई सांसद हैरान रह गए.
तब तक, सारी हलचल संसद मार्ग पर ही थी. सुरक्षाकर्मियों ने संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर जा रहे मार्च को रोक दिया था.

और फिर राहुल ने दिया 'गच्चा'
कई नेताओं के हिरासत में लिए जाने और दूसरों के चले जाने के कारण, इस बात के बहुत कम संकेत थे कि विरोध प्रदर्शन आकाशवाणी भवन परिसर में जाने वाला है.
आकाशवाणी भवन के गेट नंबर 3 के पास रिसेप्शन गेट पर, कर्मचारियों ने राहुल को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की. इससे हालात तनावपूर्ण हो गए. आखिरकार राहुल अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करते हुए अंदर चले गए.
दोपहर करीब 12:30 बजे, प्रियंका गांधी बस से उतरीं, गेट की ओर गईं और अपने भाई के साथ शामिल हो गईं.
दोनों गेट नंबर 4 के पास एक पेड़ के नीचे बैठ गए, जबकि आकाशवाणी के कर्मचारी बाहर हो रहे इस घटनाक्रम को देखने के लिए बाहर दौड़े.

Photo Credit: PTI
आकाशवाणी ही बन गया प्रदर्शन की जगह
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई सांसदों ने आकाशवाणी को ही प्रदर्शन की जगह बना लिया. बाहर, कांग्रेस नेता रिसेप्शन के गेट पर जमा होने लगे और राहुल गांधी से अंदर मिलने की कोशिश करने लगे.
दोपहर करीब 12:45 बजे, पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेणुगोपाल और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा गेट पर पहुंचे और अंदर जाने की इजाजत मांगी. कांग्रेस सांसद प्रणति शिंदे, दीपेंद्र हुड्डा और चरणजीत सिंह चन्नी, और सेवा दल के प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. भी वहां मौजूद थे. राहुल के स्टाफ सदस्य अलंकार सवाई और श्रीवत्स भी अंदर ही थे.
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे और नेताओं से बातचीत की, जिसके बाद वे परिसर में दाखिल हुए.
Dhappa 🔥 https://t.co/IMP0mIK2NV
— Congress (@INCIndia) October 6, 2026
कई सांसद हिरासत से रिहा होने के बाद विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर लौट आए. जिन नेताओं को बसों में ले जाया गया था, वे भी वापस आ गए क्योंकि दोपहर तक जमावड़ा जारी रहा. अंदर मौजूद लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें आने लगीं.
नीति आयोग के बाहर एक कियोस्क से आलू के चिप्स, भुजिया और चॉकलेट के पैकेट, साथ ही पानी की बोतलें और सॉफ्ट ड्रिंक्स लाए गए. पटेल चौक से डाइट कोक मंगाई गई.
दोपहर करीब 2:30 बजे, जब राहुल परिसर के अंदर से पत्रकारों से बात कर रहे थे, तो उन्होंने अपने माइक ग्रिल के बीच से अंदर किए. उन्होंने कहा, 'मुझे परवाह नहीं कि बीजेपी क्या कहती है. मैं यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा हूं.'
ये वीडियो भी देखें- राहुल गांधी के प्रदर्शन की 10 बड़ी तस्वीरें, दिनभर क्या-क्या हुआ?
आठ घंटे बाद हिरासत, फिर रिहा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग पर अड़कर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत सभी विपक्षी सांसद आकाशवाणी भवन परिसर में ही धरने पर बैठ गए.
पुलिस ने रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी दलों के अन्य नेताओं को बलपूर्वक उठाया, हिरासत में लिया और उन्हें बस में बैठाकर वहां से ले गई. इन्हें जीटीबी नगर इलाके में स्थित किंग्सवे कैम्प ले जाया गया.
दिल्ली पुलिस ने बताया कि राहुल गांधी ने आकाशवाणी परिसर से हटने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग (ECI) से मिलने का समय नहीं दिया जाता, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे.

Photo Credit: PTI
पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को उस जगह से हटाना पड़ा.
लगभग दो घंटे तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने रात 10 बजे के सभी सांसदों को रिहा कर दिया.
NEET के दौरान भी ऐसा ही हुआ था
जुलाई में नीट पेपर लीक और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ.
21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद संसद भवन से निकले. लग रहा था कि सांसद सिर्फ मार्च निकालेंगे. स्थिति नियंत्रण में थी.
लेकिन तभी राहुल गांधी और विपक्षी सांसद अचानक प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं हटे. देखते ही देखते प्रधानमंत्री आवास के बाहर भीड़ जमा हो गई.
कुछ घंटों बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और सभी विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया और प्रधानमंत्री आवास के बाहर चल रहे धरने को खत्म करवाया.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं