राजस्थान में बीते कुछ दिनों से सरकारी स्कूलों को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. इस बीच सीकर के एक स्कूल ने सीमित संसाधनों और जर्जर भवन से निकलकर आधुनिक मॉडल स्कूल की पहचान बनाई है. ग्रामीणों, शिक्षकों और भामाशाहों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की भागीदारी से स्कूल में करीब एक करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए. पढ़ाई में भी लगातार सुधार हुआ है और 2022 से अब तक 21 से अधिक विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए हैं. इस वर्ष कक्षा 12 के एक विद्यार्थी ने 96 प्रतिशत और इतिहास में 100 में से 100 अंक हासिल किए, जबकि कक्षा 10 के विद्यार्थी ने संस्कृत में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए.
2021 में प्रिंसिपल बने थे राजेंद्र कुमार
दरअसल, सीकर के दादिया का सरकारी स्कूल में अक्टूबर 2021 में राजेंद्र कुमार ने प्रिंसिपल का कार्यभार संभाला था. उस समय स्कूल गांव के बीच स्थित पुराने बिल्डिंग चल रहा था. बच्चों की संख्या और सुविधाओं को देखते हुए प्रिंसिपल ने स्टाफ के साथ स्कूल को नए परिसर में शिफ्ट करने की योजना बनाई. 26 जनवरी 2022 को ग्रामीणों के साथ बैठक हुई और सर्वसम्मति से बंद पड़े पुराने भवन को विकसित कर स्कूल को वहां शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया.
विधायक कोटे से 2 कमरों का निर्माण
MJSY योजना से चार कमरों का निर्माण हुआ. इसके अलावा चारदीवारी की मरम्मत, रंगरोगन, परिसर का सौंदर्यीकरण, मंच, टिन शेड, मां सरस्वती मंदिर, रसोईघर, भोजनशाला, मुख्य द्वार और शौचालय सहित कई कार्य करवाए गए. सांसद कोटे से बास्केटबॉल ग्राउंड और विधायक कोटे से दो कमरों का निर्माण भी कराया गया. वर्ष 2022 के बाद बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में लगातार सुधार हुआ है. इस वर्ष कक्षा 12 के एक विद्यार्थी ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए, वहीं इतिहास विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए.

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कक्षा 10 के विद्यार्थी ने संस्कृत विषय में शत-प्रतिशत अंक हासिल किए. वर्ष 2022 से अब तक 21 से अधिक विद्यार्थी 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त कर चुके हैं. विद्यालय के 12 विद्यार्थियों का NMMS परीक्षा में चयन हो चुका है. चयनित विद्यार्थियों को 48-48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है. वहीं STSC परीक्षा में विद्यालय की एक छात्रा का चयन हुआ है, जिसे डेढ़ लाख रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी. अभी स्कूल में 200 से अधिक बच्चे हैं. स्कूल में दो IFPD पैनल और ICT लैब है. पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है.
स्कूल के बच्चे राज्य स्तर तक खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. अर्धवार्षिक परीक्षा के बाद प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित कर विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाता है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने लगातार ग्रामीणों से संवाद कर स्कूल के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की. ग्रामीण लक्की, बृजसुंदर आर्य और आनंदलाल ने बताया कि विद्यालय के विकास में पूरे गांव और भामाशाहों का योगदान रहा है. हालांकि कुछ अच्छे शिक्षकों के ट्रांसफर के बाद उनकी कमी महसूस हुई, लेकिन नए शिक्षकों के साथ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं.
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