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5वीं बार चुनावी मैदान में बीजेपी के जय-वीरू की जोड़ी, दोनों के नाम दर्ज है खास रिकॉर्ड

नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने अपने दो पुराने अनुभवी चेहरे को मैदान में उतारा है. 'जय-वीरू' की यह जोड़ी अब तक 5 बार से अजेय रही है.

5वीं बार चुनावी मैदान में बीजेपी के जय-वीरू की जोड़ी, दोनों के नाम दर्ज है खास रिकॉर्ड
5वीं बार चुनावी मैदान में बीजेपी के जय-वीरू की जोड़ी
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कोटा नगर निगम चुनाव में बीजेपी की एक ऐसी जोड़ी फिर मैदान में है, जिसकी चर्चा पार्टी के साथ-साथ उनके समर्थकों के बीच भी खूब होती है. जोड़ी है पूर्व नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी और वरिष्ठ पार्षद गोपाल राम मंडा की. दोनों पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं. खास बात ये है कि इस बार दोनों के वार्ड बदल गए हैं, लेकिन बीजेपी ने दोनों के अनुभव और पुराने प्रदर्शन पर भरोसा जताया है. समर्थक इन्हें 'जय-वीरू' की जोड़ी कहते हैं. अब देखना होगा कि नए वार्ड में ये जोड़ी कितना असर छोड़ पाती है.

दोनों का पांचवा नगर निगम चुनाव

बीजेपी ने कोटा नगर निगम चुनाव में अपने दो अनुभवी चेहरों पर फिर दांव लगाया है. विवेक राजवंशी वार्ड नंबर 54 से तो गोपाल राम मंडा वार्ड नंबर 91 से चुनाव मैदान में हैं. दोनों के लिए ये पांचवां नगर निगम चुनाव है और खास बात ये कि वार्ड बदलते रहे, लेकिन दोनों ने अब तक कोई चुनाव नहीं हारा. दोनों पार्षदों की पहचान सिर्फ चुनावी जीत तक सीमित नहीं रही.

जिन वार्डों का उन्होंने प्रतिनिधित्व किया, वहां सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज और सफाई जैसे बुनियादी कामों पर फोकस रहा. पार्कों में सीसीटीवी कैमरे, महिला सुरक्षा से जुड़े प्रयास और कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए हेल्पलाइन जैसी पहल भी उनके कामकाज का हिस्सा रही.

समर्थक कहते जय-वीरू की जोड़ी

कई कामों में जनसहयोग को जोड़ा गया और इसी वजह से दोनों की अपने-अपने क्षेत्रों में अलग पहचान बनी. दोनों के वार्ड आसपास रहे तो तालमेल भी खूब दिखा. एक-दूसरे के साथ मिलकर इलाके की समस्याओं को उठाना और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना. इस जोड़ी की कार्यशैली का हिस्सा रहा. यही वजह है कि समर्थक इन्हें मजाकिया अंदाज में बीजेपी की 'जय-वीरू' की जोड़ी कहते हैं.

मुश्किल वक्त में लोगों के बीच पहुंचना, जरूरतमंदों की मदद करना और जनसेवा के कामों में जुटे रहना दोनों की राजनीतिक यात्रा का अहम हिस्सा रहा. कोरोना काल हो या फिर कोई आपदा लोगो की मदद ,जनसेवा में खड़े नजर आए. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है. वार्ड बदल गए हैं, मतदाता बदल गए हैं और चुनावी समीकरण भी नए हैं. दोनों नेता अब नए वार्डों में जनसंपर्क कर रहे हैं. समर्थकों का दावा है कि उन्हें लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. 

5 चुनाव में हर बार मिली जीत

पांच चुनाव, पांचवीं बार मैदान और हर बार जीत. विवेक राजवंशी और गोपाल राम मंडा के लिए ये रिकॉर्ड निश्चित तौर पर बड़ी ताकत है, लेकिन इस बार चुनौती इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि दोनों अपने पुराने वार्ड नहीं, बल्कि नए वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में जनता का नया भरोसा हासिल करना ही इनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी लेकिन गोपाल राम मण्डा यहां भी आश्वस्त नजर आ रहे हैं. 

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