नरेश मीणा की हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत सोमवार को रद्द हो गई है. हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को देवली उनियारा में उपचुनाव के दौरान एसडीएम के साथ थप्पड़कांड के बाद आगजनी और हिंसा से जुड़े मामले में जमानत दिया था. अब टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने इस आधार पर नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी कि जिन शर्तों पर उन्हें को जमानत मिली थी, उन शर्तों का पालन नहीं किया. जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मैं न्यायालय के फैसले का सम्मान करता हूं, फैसले की कॉपी आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
बीजेपी पर नरेश मीणा का हमला
हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने कहा कि यह तो सच है कि उन नेताओं की तरह बड़े-बड़े गुनाह करके बीजेपी में जाते ही पाक साफ हो जाते, लेकिन मैं जनता के हकों के लिए कानून के दायरे संघर्ष कर रहा हूं. यह बीजेपी को सहन नहीं हो रहा है. पुलिस ने मेरी हाईकोर्ट से मिली जमानत को खारिज करने के लिए झालावाड़ स्कूल हादसे में मरे सात बच्चों के परिजनों से मिलने जाने के दौरान हुई मेरी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट की जमानत का उल्लंघन मानकर टोंक SC-ST कोर्ट प्रार्थना पत्र पेश किया.
नरेश मीणा ने आगे कहा कि अगर इस लोकतंत्र में पीड़ित परिवार से मिलने जाना जमानत का उल्लंघन मानकर पुलिस कोर्ट को गुमराह करेंगे तो फिर संविधान की परिभाषा ही बदल जाएगी, लेकिन मुझे लगता है कि सिस्टम पर सत्ता का दबाव था. मेरी गरीब, किसान, मजदूर और असहाय के लिए आवाज उठाना अहंकारी बीजेपी के असली चेहरा सामने आ गया. बीजेपी अहंकारी, गरीब, असहाय, मजदूर, किसान, युवा वर्ग में खिलाफ है.
सरकारी वकील ने क्या कहा?
वहीं, सरकारी वकील ने बताया कि कोर्ट ने उनके इस आवेदन को मानते हुए जमानत खारिज कर दी है कि नरेश मीणा को जिन शर्तो पर हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, उन शर्तो की पालना नरेश मीणा ने जमानत के बाद नहीं की है. टोंक की एससी-एसटी कोर्ट ने हाईकोर्ट से मिली जमानत की शर्तों के उल्लंघन को आधार मानते हुए यह आदेश दिया. मामला नगरफोर्ट थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 166/2024 से जुड़ा है. नगरफोर्ट थाना पुलिस ने एससी-एसटी कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) के माध्यम से नरेश मीना की जमानत निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया था.
कोर्ट ने नरेश मीना को गिरफ्तार कर पेश करने के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है. बता दें कि समरावता मामले में नरेश मीना को 11 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली थी और 14 जुलाई 2025 को वह टोंक जेल से रिहा हुए थे. अब जमानत निरस्त होने के बाद उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी.
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