क्यूआर कोड स्कैन किया, UPI से पे किया और बस डन... कोई फीस नहीं... कोई चार्ज नहीं... लेकिन कब तक? अभी तो UPI से पेमेंट करना फ्री है. लेकिन हो सकता है कि आने वाले समय में इस पर कोई चार्ज लगने लगे. इसलिए क्योंकि वित्त मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है. अगर ये कानून बनता है तो भविष्य में सरकार को UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट दोबारा लागू करने का अधिकार मिल जाएगा.
UPI पेमेंट पर MDR पर चर्चा के बीच रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा का भी एक बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि MDR लागू करने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है लेकिन डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत किसी को तो उठानी पड़ेगी.
ये MDR है क्या चीज?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट. 2020 में सरकार ने इसे खत्म कर दिया था, ताकि UPI और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिल सके. MDR वह फीस या कमीशन होता है जो कोई दुकानदार अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट के बदले बैंक, UPI ऐप या NPCI (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) को देता है. अभी UPI पर MDR नहीं लगता है. हालांकि, क्रेडिट कार्ड पर लगभग 1.5% और डेबिट कार्ड पर 0.9% तक MDR लगता है.
तो अब क्या किया है सरकार ने?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026' है. इसके जरिए कई सारे कानूनों को भी संशोधित किया जा रहा है. इसके जरिए ही 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007' की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है.

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इससे होगा क्या?
इससे सरकार यह तय कर पाएगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर चार्ज नहीं लगेगा और किन पर MDR लग सकता है. असल में अब तक MDR को लेकर कोई भी फैसला कानून से होता था लेकिन अब सरकार नोटिफिकेशन जारी कर फैसला ले सकती है.
लेकिन इसकी जरूरत क्यों?
UPI अभी पूरी तरह से फ्री है. इसके लिए सरकार अब तक कंपनियों और पेमेंट कंपनियों को 2,000 करोड़ रुपये का इंसेंटिव देती है, ताकि कोई चार्ज न लगे. इस इंसेंटिव स्कीम को 2021-22 में शुरू किया गया था.
वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कहा था कि 2026-27 के लिए इंसेंटिव स्कीम के तहत जो 2 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे, वह इंडस्ट्री की अनुमानित लागत का एक छोटा सा हिस्सा ही कवर करती है.
समिति ने कहा था कि UPI का सिस्टम 'जीरो-MDR' पर लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत नहीं चल सकता. नए इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और सर्वर क्षमता बढ़ाने के लिए कमाई का जरिया चाहिए.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी बुधवार को कहा कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और विकसित करने की लागत किसी न किसी को उठानी होगी, लेकिन जरूरी नहीं कि इसका बोझ आम लोगों पर डाला जाए.
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तो क्या MDR लागू हो जाएगा?
नहीं. अभी सरकार ने सिर्फ संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है. अगर संसद से ये पास हो जाता है, तब भी जरूरी नहीं कि MDR तत्काल ही लागू हो. इस संशोधन से सरकार जब चाहिए, तब नोटिफिकेशन जारी करके यह तय कर सकेगी कि किन पेमेंट मोड पर MDR लगेगा? किन ट्रांजैक्शन पर लगेगा? और कितना लगेगा?
किसको और कितनी पेमेंट पर देना होगा MDR?
- कौन देगा: MDR दुकानदार या व्यापारियों से लिया जाता है. इसका आम लोगों से कोई लेना-देना नहीं है.
- सब दुकानदारों पर लगेगा: रॉयटर्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि MDR उन पर लग सकता है जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है.
- कितने पर लगेगा: माना जा रहा है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लग सकता है.
- कितना लगेगा: चर्चा है कि 2,000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट पर 0.3% से 0.5% का MDR लग सकता है.
अगर लागू हुआ तो इसका असर क्या होगा?
केंद्र सरकार के मुताबिक, अभी UPI के जरिए मर्चेंट को जितना ट्रांजैक्शन होता है, उसमें से सिर्फ 4% ही 2,000 रुपये से ज्यादा का होता है. 86% पेमेंट 500 रुपये, जबकि 10% पेमेंट 2,000 रुपये के अंदर ही होती है. इसका मतलब यही हुआ कि बड़े पेमेंट UPI से नहीं होते हैं.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दूध, सब्जी, किराना और बाकी रोजमर्रा की खरीदारी से जुड़े 90% से ज्यादा ट्रांजैक्शन किसी भी संभावित MDR के दायरे में नहीं आएंगे. यानी आम लोगों की डेली पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज लगने की संभावना बहुत कम है.
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तो मतलब आम लोगों पर असर नहीं पड़ेगा?
ऐसा पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता. 2,000 रुपये तक की पेमेंट पर तो कोई MDR नहीं लगेगा. लेकिन इससे ज्यादा की पेमेंट पर 0.3% से 0.5% तक का MDR लग सकता है. ऐसे में कुछ दुकानदार या व्यापारी इससे ज्यादा की UPI पेमेंट लेने से मना कर सकते हैं.
हालांकि, माना जा रहा है कि MDR भी सिर्फ बड़े व्यापारियों पर ही लगेगा. छोटे दुकानदारों पर इसे लागू नहीं किया जाएगा.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि UPI पेमेंट पर MDR से दुकानदारों के लिए ये एक्स्ट्रा खर्च बन जाएगा, जिससे मार्जिन कम हो सकता है और ग्राहकों को मिलने वाला डिस्काउंट कम हो सकता है. हालांकि, शुरुआत में बड़े दुकानदार या व्यापारी इसका खर्च उठा सकते हैं, लेकिन लागू होने के बाद प्रमोशनल ऑफर कम हो सकते हैं या फिर कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं.
MDR से सरकार को क्या मिलेगा?
सरकार और कंपनियों को इससे रेवेन्यू मिलेगा. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का अनुमान है कि अगर 0.15% से 0.30% के बीच का MDR भी लगाया जाता है तो इससे 2027-28 में 5 से 10 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिल सकता है.
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