विज्ञापन

Explainer: जाट आरक्षण का मुद्दा फिर गरमाया, राजस्थान के इन 3 जिलों में क्यों नहीं मिला रिजर्वेशन?

राजस्थान के 3 जिले भरतपुर, धौलपुर और डीग जिले में जाट आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. जाट समाज को केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर आज भरतपुर में लोग हुटे हैं. 

Explainer: जाट आरक्षण का मुद्दा फिर गरमाया, राजस्थान के इन 3 जिलों में क्यों नहीं मिला रिजर्वेशन?
भरतपुर में आरक्षण को लेकर जाटों ने भरी हुंकार. (Photo- NDTV)

राजस्थान में आरक्षण को जाट समाज आंदोलन की राह पर है, और भरतपुर में प्रदर्शन कर जाटों ने अपनी ताकत दिखाई है. सवाल यह है कि आखिर पूरे राजस्थान में सिर्फ भरतपुर, धौलपुर और डीग जिले के जाट ही इस मुद्दे को लेकर बार-बार आंदोलन क्यों करते हैं? मामला आखिर कहां अटका हुआ है. विस्तार से पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

1999 आरक्षण की शुरुआत और विवाद

इस विवाद को समझने के लिए करीब 27 साल पीछे जाना होगा. एक लंबे आंदोलन के बाद  27 अक्टूबर 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने राजस्थान के जाट समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का फैसला किया. हालांकि, इसमें भरतपुर और धौलपुर के जाटों को बाहर रखा गया. इसके पीछे तर्क यह दिया गया कि इन दोनों रियासतों में लंबे समय तक जाट राजाओं का शासन रहा था.  

राज्य OBC सूची में शामिल 

उस समय नीति निर्धारण में यह माना गया कि इस क्षेत्र के जाट सामाजिक रूप से अपेक्षाकृत पिछड़े वर्ग की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल नहीं किया गया. कुछ ही दिनों बाद 3 नवंबर 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य स्तर पर जाट समुदाय को ओबीसी में शामिल कर दिया, लेकिन भरतपुर और धौलपुर के जाट यहां भी बाहर रह गए. इसके बाद जनवरी 2000 में राज्य सरकार ने अलग अधिसूचना जारी कर भरतपुर और धौलपुर के जाटों को भी राज्य OBC सूची में शामिल कर लिया. 

2014 यूपीए सरकार का बड़ा फैसला

4 मार्च 2014 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए 9 राज्यों के जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मंजूरी दी. इसमें राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर के जाट भी शामिल थे, लेकिन यह फैसला स्थायी नहीं रह सका. मार्च 2015 में  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया.

हाईकोर्ट ने 2000 की अधिसूचना को रद्द किया

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी समुदाय को पिछड़ा घोषित करने के लिए केवल ऐतिहासिक या राजनीतिक आधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए समकालीन सामाजिक और शैक्षणिक डेटा जरूरी है. इसी दौरान राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी. अगस्त 2015 में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी 2000 की अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसके तहत भरतपुर और धौलपुर के जाटों को राज्य ओबीसी सूची में शामिल किया गया था. 

2016–2017 नया सर्वे और राज्य OBC में वापसी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2016 में राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने फिर से प्रक्रिया शुरू की. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भरतपुर और धौलपुर के जाट समुदाय का सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराया. रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि इन दोनों जिलों के जाट सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, और उन्हें ओबीसी आरक्षण दिया जाना चाहिए.  इसी आधार पर 23 अगस्त 2017 को वसुंधरा राजे सरकार ने भरतपुर और धौलपुर के जाटों को राज्य ओबीसी सूची में शामिल कर दिया. बाद में डीग क्षेत्र, जो पहले भरतपुर का हिस्सा था, वो भी इसी व्यवस्था में आ गया.  इसका मतलब यह है कि आज इन तीनों जिलों के जाटों को राजस्थान सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल रहा है. 

भरतपुर में जाटों ने भरी हुंकार. (Photo- NDTV)

भरतपुर में जाटों ने भरी हुंकार. (Photo- NDTV)

2020 में केंद्र को फिर भेजी गई सिफारिश

दिसंबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को पत्र लिखकर भरतपुर, धौलपुर और डीग के जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की सिफारिश की. राज्य सरकार ने तर्क दिया कि राजस्थान में सभी जिलों के जाट ओबीसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए केवल तीन जिलों को केंद्र स्तर पर बाहर रखना भौगोलिक असमानता पैदा करता है. 

केंद्रीय ओबीसी सूची से बाहर हो गए

यही वजह है कि वर्तमान विवाद राज्य सरकार के आरक्षण को लेकर नहीं बल्कि केंद्रीय ओबीसी सूची को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट के 2015 के फैसले के बाद भरतपुर और धौलपुर के जाट केंद्रीय ओबीसी सूची से बाहर हो गए. बाद में डीग जिला बनने के बाद वहां के जाट भी उसी स्थिति में आ गए. इसका मतलब यह है कि इन तीन जिलों के जाटों को आज भी केंद्रीय सरकार की नौकरियों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य केंद्रीय संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि राजस्थान के बाकी जिलों के जाटों को यह सुविधा उपलब्ध है. 

मामला इसलिए अटका हुआ है क्योंकि किसी भी समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा से पूरी नहीं होती. इसके लिए सबसे पहले सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के नए आंकड़े जुटाने होते हैं. इसके बाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश आवश्यक होती है.

आयोग की अनुशंसा के आधार पर केंद्र सरकार फैसला लेती है, यदि मामला अदालत में चुनौती पाता है तो सरकार को यह साबित करना होता है कि संबंधित समुदाय वास्तव में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा है. यही कानूनी प्रक्रिया इस विवाद को लगातार जटिल बनाती रही है. 

जाट राजस्थान की राजनीति में प्रभावशाली  

जाट समुदाय राजस्थान की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है. खासकर भरतपुर, धौलपुर और डीग क्षेत्र में यह मुद्दा लंबे समय से चुनावी राजनीति का हिस्सा रहा है. लगभग हर चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दल इस मांग के समर्थन की बात करते हैं, लेकिन केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हो सकी है. इसी वजह से समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं और यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ जाता है.  

केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग 

वर्तमान स्थिति यह है कि भरतपुर, धौलपुर और डीग जिले के जाटों को राजस्थान सरकार की ओबीसी सूची का लाभ मिलता है, लेकिन केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल नहीं होने के कारण उन्हें केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है. यही वजह है कि जाट समाज की मौजूदा मांग केंद्र सरकार से इन तीन जिलों के जाटों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की है. जब तक इस संबंध में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक यह विवाद और आंदोलन जारी रहने की संभावना बनी रहेगी. 

यह भी पढ़ें: इन 3 जिलों में जाट आरक्षण के लिए हुंकार, भरतपुर में हरियाणा-दिल्ली से जुटेंगे लोग, हनुमान बेनीवाल लेंगे हिस्सा

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rajasthan News, Jaat Reservation, Bharatpur, Jaat Reservations, Deeg News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com