जयपुर से गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल की सदस्य बबीता धाकड़ की 7 दिन की रिमांड पूरी हो चुकी है, जिसके बाद उसे शनिवार को विशेष कोर्ट में पेश किया गया। रिमांड के दौरान एटीएस ने उससे पूछताछ की. कोर्ट ने सुनवाई के बाद बबीता को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए. अब बबीता को 29 जून को पेश किया जाएगा. कोर्ट में पेशी के दौरान बबीता अपना चेहरा छिपाते और मीडिया के सवालों से बचते नजर आई.
जानकारी के मुताबिक, बबीता लगातार सोशल मीडिया के जरिए जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी संगठनों से संपर्क में थी। इस दौरान वह उनसे उर्दू में भी बात किया करती थी. बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को एटीएस ने जयपुर के वाटिका क्षेत्र से गिरफ्तार किया था. बबीता पिछले करीब दो साल से आतंकी संगठन के संपर्क में थी. वहीं, उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जाने की आशंका भी है. पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर्स उसे ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहे थे.
यूएपीए एक्ट 38,39 के तहत मुकदमा
एडवोकेट भगवान सहाय ने बताया कि बबीता के खिलाफ यूएपीए एक्ट 38,39 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 29 जून को उसे दोबारा पेश किया जाएगा. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के चलते जांच को गोपनीय रख आगे बढ़ाया जा रहा है. बबीता के सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स और कॉल डिटेल्स की जांच की गई है.
ऑनलाइन कलमा पढ़ाकर बबीता को बनाया मुस्लिम
पूछताछ के दौरान बबीता ने बताया कि शुरू में तो उसने सोशल मीडिया पर संपर्क किया था. बाद में उनमें से कुछ उसके अच्छे दोस्त बन गए. उसने बताया कि इनमें से अबू-उबैदाह से उसके भावनात्मक संबंध बन गए. बबीता के मुताबिक, अबू-उबैदाह उससे शादी करना चाहता था. जिसके लिए उसने और पाकिस्तान के एक मुफ्ती ने हिंदू धर्म से मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए कहा. जिसके लिए मुफ्ती ने नमाज, सना व कुरान पढ़ने व अमल करने के लिए कहा था. बबीता ने बताया कि उसे ऑनलाइन कलमा पढ़ाकर मुस्लिम बना दिया था.
यूएई के रास्ते पाकिस्तान जाने का प्लान
इसके बाद बबीता ने अपना नाम खदीजा रख लिया. जैश-ए-मोहम्मद में काम करने के लिए बबीता को पाकिस्तान बुलाना चाह रहे थे. जिस पासपोर्ट और वीजा बनवाने के लिए बबीता ने ऑनलाइन सर्च किया था. उसकी पाकिस्तान जाने के लिए अबू-उबैदाह व मुफ्ती साहब से खर्चे के बारे में बात हुई थी. जिसमें उन्होंने नेपाल, सऊदी अरब या यूएई के रास्ते से होकर पाकिस्तान बुलाने व खर्चा क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से देने के लिए कहा था.
तीन सिम कार्ड चलाती थी बबीता
जानकारी के अनुसार, बबीता ने अपने नाम से 3 मोबाइल नंबर ले रखे थे. तीनों नवंबर को वह चलाती थी. जब सुरक्षा एजेंसियों ने बबीता के मोबाइल की जांच की तो उसमें वाट्सएप और फेसबुक पर जैश-ए-मोहम्मद समेत अन्य आतंकवादी संगठन जुड़े होने की बात सामने आई. उसके वाट्सएप पर कई ऐसे नंबर से कॉल या मैसेज मिले जो पाकिस्तानी थे. बबीता के मोबाइल में मौजूद नंबर के आधार पर पता चला कि उसका संपर्क जैश कमांडर कारी जरार से था.
कारी जरार नवंबर 2016 में जम्मू में बलिनी विज के पास भारतीय सेना के कैंप पर हमले में शामिल था. उस समय हमले में सेना के 6 जवान शहीद हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, बबीता के यूसुफ अज़हर से जुड़े होने के भी बात पता चली है. यूसुफ अज़हर को गोरी' के नाम से भी जाना जाता है और वह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संस्थापक मसूद अज़हर का साला है.
वहीं, ATS एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि महिला से पूछताछ की जा रही है. अभी जांच शुरुआती दौरे में है. जितने भी डिजिटल साक्ष्य मिले हैं. उनकी पुष्टि होनी बाकी है. एटीएस के अनुसार, लेकिन प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि पिछले छह-सात महीनों से वे इसका धर्म परिवर्तन करवाना चाहते थे और उसकी मदद से भारत में घटनाएं करवाना चाहते थे.
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