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दिल्‍ली-NCR ही नहीं, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी तक... बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से कहां-कहां उभरेंगे निवेश के अवसर?

दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से उत्तर प्रदेश के कई शहरों में निवेश और रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. बेहतर कनेक्टिविटी से आवास, कारोबार और पर्यटन को भी बड़ा फायदा हो सकता है.

दिल्‍ली-NCR ही नहीं, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी तक... बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से कहां-कहां उभरेंगे निवेश के अवसर?
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी में निवेश, रियल एस्टेट और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

केंद्र सरकार ने हाल ही नई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का ऐलान किया है. करीब 865 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से दिल्ली, जेवर एयरपोर्ट, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी आपस में जुड़ने जा रहे हैं. इस हाई-स्पीड नेटवर्क के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे और वाराणसी 4 घंटे की दूरी पर सिमट जाएगा, जबकि प्रयागराज से लखनऊ सिर्फ 55 मिनट और वाराणसी 30 मिनट में पहुंचा जा सकेगा. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और यूपी के टियर-2 शहरों के बीच आर्थिक विकास और प्रॉपर्टी मार्केट का नया गलियारा बनेगी.

विशेष रूप से प्रयागराज में स्टेशन के लिए शांतिपुरम, नीबी खुर्द और परेड ग्राउंड जैसे संभावित स्थानों पर मंथन चल रहा है, जिन्हें मेट्रो और प्रमुख सड़कों से जोड़ा जाएगा. जहां भी ये नए स्टेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होंगे, वहां आधुनिक टाउनशिप, होटल इंडस्ट्री और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश के अभूतपूर्व अवसर उभरेंगे, जिससे जमीन की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है.

रियल एस्टेट के नजरिए से देखें तो असली बदलाव केवल यात्रा का समय कम होने में नहीं, बल्कि एक ऐसे ग्रोथ कॉरिडोर के निर्माण में है जहां आवासीय मांग, व्यावसायिक विस्तार और शहरी विकास एक साथ आगे बढ़ें. आने वाले दशक में ऐसे गलियारे उत्तर भारत के रहने, काम करने और निवेश करने के तरीके को नई दिशा दे सकते हैं.

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से बनेंगे विकास के नए गलियारे 

रियल एस्टेट सेक्‍टर के जानकारों का कहना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट किसी भी क्षेत्र के विकास की दिशा तय करते हैं. यही वजह है कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास के नए इंजन के रूप में देखा जा रहा है.

प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ बुलेट ट्रेन परियोजना एक बड़े बदलाव का संकेत देती है. यह सिर्फ दो शहरों को जोड़ने की योजना नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के टियर-2 शहरों के बीच एक नए विकास गलियारे के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. 

भारत की कुल आवासीय मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों से आता है और दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे सक्रिय और गतिशील रियल एस्टेट क्षेत्रों में से एक बना हुआ है. प्रतीक ग्रुप के एमडी प्रतीक तिवारी ने कहा आज किसी भी शहर की विकास क्षमता उसकी कनेक्टिविटी से तय होती है.

बुलेट ट्रेन परियोजना उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को एक नए आर्थिक गलियारे में बदल सकती है. इससे लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और संगठित आवासीय परियोजनाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है. यह परियोजना आने वाले समय में शहरी विकास की दिशा को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है.

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प्रयागराज में इन जगहों पर बढ़ सकती है रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍ट्स की मांग 

हाल ही में प्रयागराज में हुई समीक्षा बैठक में स्टेशन के संभावित स्थानों, वहां तक पहुंचने के मार्ग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा की गई. अधिकारियों के अनुसार स्टेशन को मेट्रो, प्रमुख सड़कों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को सहज यात्रा अनुभव मिल सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है. इससे नए आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है.

प्रयागराज में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए नीबी खुर्द, शांतिपुरम, प्रयाग स्टेशन क्षेत्र और परेड ग्राउंड या एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों पर विचार किया जा रहा है. अधिकारियों का फोकस ऐसी जगह चुनने पर है जहां से यात्रियों को शहर और आसपास के क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच मिल सके.

महाकुंभ, माघ मेला और काशी जैसे धार्मिक आयोजनों और स्थलों तक आसान पहुंच भी इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी से धार्मिक पर्यटन और उससे जुड़े कारोबार को भी लाभ मिलने की उम्मीद है.

मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की मौजूदा रफ्तार अभूतपूर्व है. एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल जैसे प्रोजेक्ट मिलकर विकास का ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहे हैं, जिसका सीधा लाभ रियल एस्टेट, उद्योग और सेवा क्षेत्र को मिलेगा. आने वाले वर्षों में इन शहरों के आसपास नए विकास केंद्र उभरने की पूरी संभावना है.

एक शहर में रहते हुउ दूसरे शहरों में काम कर सकेंगे लोग 

बुलेट ट्रेन परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब उत्तर प्रदेश में जेवर एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेसवे और कई अन्य इंफ्रा परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है. जानकारों का मानना है कि इन परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव प्रदेश को देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में बदल सकता है.

अग्रशील इंफ्राटेक की सीईओ प्रेक्षा सिंह का कहना है कि देश में जहां भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित हुए हैं, वहां आर्थिक गतिविधियों और रियल एस्टेट विकास को नई गति मिली है. दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी उत्तर प्रदेश के कई शहरों के लिए ऐसा ही अवसर लेकर आएगा. इससे लोग एक शहर में रहकर दूसरे शहर में काम करने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे नए आवासीय क्षेत्रों और आधुनिक टाउनशिप की मांग बढ़ सकती है.

कुल मिलाकर, दिल्ली-लखनऊ बुलेट ट्रेन को केवल एक परिवहन परियोजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. ये नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, आरआरटीएस नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क का हिस्सा है, जो उत्तर भारत के विकास की नई कहानी लिख रहा है. इसके चलते एनसीआर और टियर-2 शहरों के बीच की दूरी केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी कम होती जाएगी.

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