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राजस्‍थान में REET-2021 पेपर लीक का मुद्दा गरमाया, क‍िरोड़ी लाल मीणा ने अम‍ित शाह को भेजा 11 पन्‍नों का लेटर 

REET-2021 पेपर लीक मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष गोव‍िंद स‍िंह डोटासरा, सुभाष गर्ग, पूर्व CMO अधिकारियों और RGSC पदाधिकारियों से पूछताछ की मांग की है. 

राजस्‍थान में REET-2021 पेपर लीक का मुद्दा गरमाया, क‍िरोड़ी लाल मीणा ने अम‍ित शाह को भेजा 11 पन्‍नों का लेटर 
किरोड़ी लाल मीणा ने गृह मंत्री को लेटर लिखा.
फाइल फोटो

राजस्थान के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने रीट-2021 पेपर लीक मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 25 जुलाई 2026 को 11 पन्‍नों का लेटर भेजा है. मामले की व्यापक और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. पत्र में डॉ. मीणा ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस बहुचर्चित पेपर लीक प्रकरण में कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं, तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों, राजीव गांधी स्टडी सर्किल (RGSC) के पदाधिकारियों तथा अन्य लोगों की भूमिका की अब तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई है. उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग, कुछ विधायकों, तत्कालीन सीएमओ अधिकारियों, गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड गवर्नेंस (GISSG) और RGSC से जुड़े पदाधिकारियों से पूछताछ कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. 

17 परीक्षाओं में पेपर लीक का आरोप 

लेटर में डॉ. क‍िरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में 18 प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हुईं, जिनमें से 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए.  उन्होंने दावा किया कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए लगातार इन मामलों को उठाया, प्रधानमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचाया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी शिकायतें भेजीं.  उनके अनुसार ED में भी प्रकरण दर्ज हुआ, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. 

प्रिंटिंंग प्रेस पर खड़ा किया सवाल  

डॉ. मीणा ने पत्र में आरोप लगाया कि रीट-2021 परीक्षा का प्रश्नपत्र छापने का कार्य नियमों के विपरीत कोलकाता स्थित सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया. उनका दावा है कि तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग तथा तत्कालीन CMO के दबाव में इस प्रेस को ठेका दिया. उन्होंने लिखा कि बोर्ड ने लगातार दूसरी बार इसी प्रेस का चयन किया, जबकि यह नियमों के विरुद्ध था. 

तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष के बयान का जिक्र 

पत्र में डॉ. मीणा ने तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली के कथित बयान का भी उल्लेख किया है. उनके अनुसार, जारोली ने पद से हटाए जाने के बाद कहा था कि राजनीतिक संरक्षण में रीट का पेपर लीक हुआ. पत्र में दावा किया गया कि 4 फरवरी 2022 को सुबह 9:33 बजे जारोली ने राजस्थान विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के व्हाट्सएप समूह में संदेश भेजकर कहा था कि उन्हें 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है, और कुछ बड़े नेताओं तथा नौकरशाहों के दबाव में उन्होंने सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को काम दिया था. 

डॉ. मीणा ने आरोप लगाया कि जारोली को निलंबित कर पूरे मामले की जिम्मेदारी उन पर डाल दी गई, लेकिन आज तक SOG ने उनसे व्यापक पूछताछ नहीं की. उन्होंने कहा कि यदि जारोली से निष्पक्ष पूछताछ होती तो कई प्रभावशाली राजनीतिक नाम सामने आ सकते थे. 

डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाया 

पत्र में दावा किया गया कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र प्राप्त कर उसे लगभग 20 परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करवाई. इनमें सीकर का प्रिंस कॉलेज, कलाम कोचिंग इंस्टीट्यूट, भरतपुर का मदर टेरेसा संस्थान सहित अन्य केंद्रों का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि 24 और 25 सितंबर 2021 के दौरान अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र हल करवाए गए. 

डॉ. मीणा ने लिखा कि पूरे राज्य के 33 जिलों में रीट परीक्षा के लिए जिला समन्वयक ADM स्तर के अधिकारी बनाए गए थे, लेकिन केवल जयपुर जिले में नियमों के विपरीत निजी व्यक्ति डॉ. प्रदीप पाराशर को जिला समन्वयक बनाया गया, जो RGSC से जुड़े बताए गए हैं. उन्होंने कहा कि डॉ. पाराशर सरकारी अधिकारी नहीं थे, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई. 

RGSC की भूमिका पर भी गंभीर आरोप

पत्र में RGSC की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं, इसमें कहा गया है कि सोनिया गांधी की प्रेरणा से गठित इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रहे, जबकि पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग राष्ट्रीय समन्वयक और डॉ. बने सिंह प्रदेश समन्वयक थे. पत्र में आरोप लगाया गया कि रीट परीक्षा के दौरान राज्यभर में सेंटर और जिला समन्वयकों की नियुक्ति RGSC से जुड़े लोगों के माध्यम से की गई. करीब 40 परीक्षा केंद्रों पर RGSC से जुड़े समन्वयकों की नियुक्ति का भी दावा किया गया है. डॉ. मीणा ने आरोप लगाया कि प्रत्येक केंद्र पर करोड़ों रुपये के लेन-देन हुए और इस धन का एक हिस्सा कांग्रेस संगठन तक पहुंचाया गया. 

पैसे के लेनदेन का लगाया आरोप 

पत्र में यह भी दावा किया गया है कि रीट परीक्षा में लगभग 1 लाख 23 हजार अभ्यर्थियों के 140 से अधिक अंक आए, जिसे डॉ. मीणा ने बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन का संकेत बताया है. उन्होंने इस पूरे मामले में बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और वित्तीय लेन-देन की जांच कराने की मांग की है. 

सुभाष गर्ग का नाम हटाने का आरोप 

डॉ. मीणा ने सुभाष गर्ग के पुराने कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए लिखा कि वर्ष 2011 और 2013 में परीक्षा आवेदन पत्र और OMR शीट तैयार करने का काम नियमों के विपरीत अजमेर की एक स्थानीय फर्म को दिया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में भी उसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई. साथ ही दावा किया कि 2011 और 2013 के रीट घोटाले में ACB ने मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में सुभाष गर्ग का नाम आरोपपत्र से हट गया. 

पत्र में ACB और ED के समक्ष दिए गए एक वित्तीय सलाहकार के कथित बयान का भी हवाला दिया गया है. इसमें दावा किया गया कि बोर्ड में हुए वित्तीय लेन-देन सुभाष गर्ग के निर्देश पर किए गए और उन्होंने बड़ी मात्रा में धन अर्जित किया. डॉ. मीणा ने इस आधार पर ACB से दोबारा जांच कराने की मांग की है. 

डॉ. मीणा ने यह भी आरोप लगाया कि ACB और ED में प्रकरण दर्ज होने के बाद सुभाष गर्ग ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली, जबकि उनके कार्यकाल के छह महीने शेष थे. उन्होंने इसे जांच से बचने की कोशिश बताया. 

SOG की जांच पर उठाए सवाल 

पत्र में SOG की जांच पर भी सवाल उठाए गए हैं. डॉ. मीणा ने कहा कि कलाम कोचिंग इंस्टीट्यूट द्वारा जारी प्रश्न पुस्तिका को जब्त करने और उसकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की गई थी, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जयपुर स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और वहां न तो पर्याप्त पुलिस बल था और न ही CCTV व्यवस्था. 

सड़क हादसे को बताया संदिग्ध 

पत्र में करौली के बालाघाट थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 298/2021 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के बयान के बावजूद धनशोधन (PMLA) के पहलुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई.  साथ ही 22 सितंबर 2021 को रायसर (जमवारामगढ़) के पास रीट प्रश्नपत्र लेकर जा रहे कंटेनर से जुड़े सड़क हादसे का भी जिक्र करते हुए इसे संदिग्ध बताया गया है.  डॉ. मीणा ने पत्र में कहा कि मृतक के परिजनों ने इसे सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताया था और इस पहलू की भी दोबारा जांच होनी चाहिए. 

केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग 

पत्र में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि रीट-2021 पेपर लीक मामले की सभी कड़ियों की केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए.  उन्होंने विशेष रूप से गोविंद सिंह डोटासरा, सुभाष गर्ग, तत्कालीन CMO अधिकारियों, RGSC के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों, गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड गवर्नेंस से जुड़े लोगों तथा अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. 

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