पटना हाईकोर्ट की तरफ से शिक्षकों के सरप्लस ट्रांसफर को लेकर एक बड़ा फैसला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि इस मामले में अब यथास्थिति (Status Quo) बनी रहेगी, यानी जो जहां हैं वहीं रहेंगे. यानी जिन भी शिक्षकों का ट्रांसफर होना था या फिर इसे लेकर आदेश जारी हुआ था, उसे अब रद्द कर दिया जाएगा, टीचर जहां ड्यूटी पर तैनात हैं, वो फिलहाल अगले आदेश तक वहीं रहेंगे. जस्टिस अजीत कुमार की सिंगल बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया है.
ट्रांसफर प्रोसेस में गड़बड़ियों की बात
कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर और अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने मजबूती से रखा. वकीलों ने तर्क दिया कि सरप्लस के नाम पर किए जा रहे ट्रांसफर की प्रक्रिया में कई तरह की गड़बड़ियां हैं, जिससे शिक्षकों को काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाने के बराबर 'स्टेटस को' का निर्देश जारी किया.
हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्यभर के उन हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जो सरप्लस लिस्ट और संभावित तबादलों को लेकर अनिश्चितता के साए में थे. कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब शिक्षा विभाग को अपनी अगली रणनीति और जवाब दाखिल करने तक ट्रांसफर प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को ज्यों का त्यों बनाए रखना होगा.
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