Nag Panchami: हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. इस साल नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जा रहा है. हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. हालांकि, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में नाग पंचमी से जुड़ी एक अनोखी परंपरा भी है, जिसे गुड़िया पीटना कहा जाता है. कई लोग इसे देखकर हैरान हो जाते हैं कि आखिर इस दिन गुड़िया क्यों पीटी जाती है और इसका नाग देवता से क्या संबंध है.
नाग पंचमी में गुड़िया क्यों पीटी जाती है?
लोक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने की परंपरा भी निभाई जाती है. इस रस्म में गुड़िया को पीटने की परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा के पीछे एक रोचक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि एक बार खेत में काम करते समय एक किसान के हल से अनजाने में एक नागिन के बच्चे मर गए. इससे क्रोधित नागिन ने किसान के परिवार को डस लिया. किसान की बेटी की शादी हो चुकी थी और वह ससुराल में रहती थी. जब नागिन उसे डसने पहुंची, तो उसने श्रद्धा से नाग देवता की पूजा की हुई थी. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नागिन ने उसे क्षमा कर दिया और उसके परिवार को भी जीवनदान दे दिया.
मान्यता है कि इसी घटना की याद में नाग पंचमी पर कुछ क्षेत्रों में बहनें कपड़े की गुड़िया बनाती हैं और भाई उन्हें प्रतीकात्मक रूप से पीटते हैं. यह किसी व्यक्ति या स्त्री का अपमान नहीं, बल्कि एक लोक परंपरा मानी जाती है, जो पुराने समय की कथा और प्रतीकों से जुड़ी हुई है.
पौराणिक लोक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक शिव भक्त लड़का, जो सुबह-शाम शिवजी की पूजा अर्चना में लगा रहता था. वह हर दिन मंदिर जाता, लोगों की मदद करता और अपनी बहन से भी बहुत प्रेम करता था. शिवजी के मंदिर के पास एक सांप रहता था, जो लड़के की भक्ति को देखकर काफी खुश था. वह लड़के की भक्ति की वजह से स्नेह के चलते उसके पास आता और पांव में लिपट जाता था. एक दिन वह अपनी बहन को भी मंदिर लाया और मंदिर से जाते समय सांप फिर से आया और उसके पैर पर लिपट गया. उसने जब भाई के पैर से सांप लिपटा देखा, तो वह डर गई. उसे लगा कि सांप उसके भाई को डंस रहा है.
भाई की जान बचाने के लिए बहन ने पास में रखा डंडा उठाया और सांप को पीट-पीटकर मार डाला. इसके बाद में जब भाई ने बताया कि वह नाग उसे नुकसान नहीं पहुंचा रहा था, बल्कि स्नेहवश आया था, तो बहन को बहुत पछतावा हुआ. जब भाई ने सच्चाई बताई, तो बहन को बहुत पछतावा हुआ. नाग देवता की अनजाने में हुई हत्या के दंड स्वरूप वास्तविक लड़की को सजा न देकर, प्रतीक के रूप में कपड़े की गुड़िया को पीटने की परंपरा शुरू हुई.
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