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जालोर का ऐतिहासिक तालाब जिसमें बारिश के बाद मर जाती हैं मछलियां, सिर्फ एक बच जाती है

जालोर के ऐतिहासिक सुंदेलाव तालाब में दो साल पहले जब मछलियों की मौत हुई थी तब मत्स्य विभाग ने पानी की जांच करवाई थी.

जालोर का ऐतिहासिक तालाब जिसमें बारिश के बाद मर जाती हैं मछलियां, सिर्फ एक बच जाती है
तालाब के किनारे मरी हुई मछलियां जमा हो गई हैं
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  • जालोर का ऐतिहासिक सुंदेलाव तालाब 1300 साल पहले बनाया गया था
  • तालाब में रोहू, सिल्वर कार्प और गोल्ड फिश मछलियां मर गई हैं
  • मत्स्य विभाग पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होने को इसकी वजह बताता है

राजस्थान के जालोर शहर का ऐतिहासिक सुंदेलाव तालाब फिर चर्चा में है. लगभग 1300 साल पहले 7वीं शताब्दी में इस तालाब को प्रतिहार राजा नागभट्ट ने अपनी माता सुंदरादेवी की याद में बनवाया था. इस तालाब में पिछले कुछ सालों से बारिश के बाद मछलियां मर जाती हैं. इस बार फिर वही हुआ है. सोमवार को जालोर में अच्छी बारिश हुई थी. इसके बाद मंगलवार की सुबह सुंदेलाव तालाब में बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां मिलीं. मृत मछलियां पानी की सतह पर तैरती और किनारों पर पहुंचती नजर आईं. अनुमान है कि तालाब में करीब तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली भर मृत मछलियां हो सकती हैं. लगातार पानी में पड़ी मरी मछलियों के सड़ने से बदबू फैलने लगी है, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नगर परिषद की ओर से अब तक मृत मछलियों को हटाने की कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है. एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि तालाब में रोहू, सिल्वर कार्प और गोल्ड फिश प्रजाति की मछलियां तो मर गईं. लेकिन मांगुर मछलियों को कोई नुकसान नहीं हुआ.

मछलियों की मौत क्यों?

मत्स्य विभाग के सिरोही के अधिकारी डॉ. शुभम के अनुसार बारिश से पहले लगातार बादल छाए रहने के कारण तालाब को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. इससे पानी में घुले ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और संवेदनशील प्रजाति की मछलियां मरने लगती हैं. वहीं स्थानीय लोग लंबे समय से तालाब में सीवर का गंदा पानी मिलने को भी बड़ी वजह बता रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब में सीवर का गंदा पानी मिलने से ऑक्सीजन स्तर घट गया है

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब में सीवर का गंदा पानी मिलने से ऑक्सीजन स्तर घट गया है
Photo Credit: NDTV

2024 में भी हुई थी मछलियों की मौत

गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में भी सुंदेलाव तालाब में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई थी. तब मत्स्य विभाग ने पानी की जांच कर नगर परिषद को कृषि चूना डालने की सलाह दी थी, जिसके बाद पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ और मछलियों की मौत का सिलसिला थम गया था.

इस बार भी स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मृत मछलियों को तुरंत हटाने, पानी की जांच कराने और तालाब में सीवर के गंदे पानी की निकासी रोकने की मांग की है, ताकि इस ऐतिहासिक जलाशय को प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान से बचाया जा सके.

क्या है मांगुर मछलियों के बचने की वजह?

मृत मछलियों में रोहू, सिल्वर कार्प और गोल्ड फिश शामिल हैं, जबकि मांगुर मछलियां सुरक्षित दिखाई दे रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मांगुर ऐसी प्रजाति है जो पानी में ऑक्सीजन की कमी होने पर सतह पर आकर हवा से भी ऑक्सीजन ले सकती है, जबकि अन्य मछलियां ऐसा नहीं कर पातीं. इस वजह से मांगुर मछलियां तो बच जाती हैं, लेकिन अन्य मछलियों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो जाती है.

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