राजस्थान के विश्वप्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में देश और दुनिया भर से श्रद्धालु आया करते हैं. बाबा श्याम के भक्त यहां सड़क और रेलमार्ग से आया करते हैं. ट्रेन से आनेवाले श्याम भक्त फिलहाल रींगस स्टेशन से आवागमन करते हैं. लेकिन बहुत जल्दी भक्तों की सुविधा के लिए एक और रेलवे स्टेशन खुलने जा रहा है. इसके निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है. इस संबंध में खाटूश्याम जी मंदिर ट्रस्ट के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ चर्चा की है. बैठक में शहरी विकास और आवास विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा भी शामिल थे. रेल मंत्री के साथ बैठक के दौरान मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल ने खाटूश्यामजी मंदिर में बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों के लिए रेल संपर्क और यात्री सुविधाओं को और मज़बूत करने के उपायों पर चर्चा की. इस अवसर पर, रेल मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को खाटूश्यामजी के लिए नए स्टेशन के निर्माण के संबंध में प्रगति की जानकारी दी.
कहां बनेगा स्टेशन?
रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि परियोजना से जुड़े तकनीकी कार्य पहले किए जाएंगे. इसमें रेलवे लाइनों के माध्यम से मौजूदा से संबंधित सभी इंजीनियरिंग और सिग्नलिंग कार्य, नई रेलवे लाइन का निर्माण और मौजूदा नेटवर्क के साथ इसका एकीकरण शामिल होगा. इसके बाद स्टेशन भवन का निर्माण शुरू होगा.
नया स्टेशन खाटूश्याम जी मंदिर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा. स्टेशन का नाम खाटूश्यामजी सुंदरपुरा होगा. यह स्टेशन सीकर, बीकानेर, गंगानगर, चूरू, झुंझुनू, दिल्ली और हरियाणा में हिसार समेत कई रेलवे स्टेशनों से जुड़ेगा. नए स्टेशन को पलसाना और बावड़ी ठीकरिया स्टेशनों के बीच सीकर-रींगस रेल खंड पर विकसित किया जाएगा. यह परियोजना रींगस जंक्शन से आने वाले 17 किलोमीटर लंबे नए रेल लिंक का हिस्सा है, जिस पर ₹254 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है.

सांस्कृतिक विरासत की दिखेगी झलक
रेल मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित स्टेशन भवन को राजस्थान की समृद्ध वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप बनाया जाएगा. इसमें एक आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए एक आधुनिक बुकिंग कार्यालय, विशाल प्रतीक्षा कक्ष, स्वच्छ शौचालय, यात्री-अनुकूल सुविधाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी.
खाटूश्यामजी में हर साल तीन करोड़ से ज्यादा श्याम भक्त आते हैं. नए स्टेशन के विकास से हर साल खाटूश्याम जी आने वाले भक्तों के लिए रेल पहुंच में काफी सुधार होने की उम्मीद है. यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के अलावा, यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को भी मज़बूत करेगी, पर्यटन को बढ़ावा देगी, स्थानीय आर्थिक गतिविधि को प्रोत्साहित करेगी और क्षेत्र में रेलवे बुनियादी ढांचे को और बढ़ाएगी.
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