बालोतरा के धोरीमन्ना में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय गोरधनराम विश्नोई की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी भावुक हो गए. गोरधनराम को याद करते-करते हेमाराम चौधरी मंच पर फूट-फूटकर रो पड़े. उन्होंने कहा कि गोरधनराम और 36 कौम का उन पर ऐसा ऋण है, जिसे वे चाहकर भी नहीं चुका पाए.
"चाहकर भी कर्ज नहीं चुका पाया"
धोरीमन्ना के अणदाणियों की ढाणी में आयोजित कार्यक्रम में जब हेमाराम चौधरी ने माइक संभाला तो शुरुआत में उन्होंने कहा कि पूर्व वक्ताओं ने गोरधनराम जी के बारे में बहुत कुछ बता दिया है, लेकिन इसके बाद गोरधनराम के साथ अपने रिश्ते और उनके योगदान को याद करते हुए हेमाराम चौधरी का गला भर्रा गया, और फूट-फूटकर रोने लगे. उन्होंने कहा, "उनका मेरे ऊपर बहुत ऋण है. मैं वो ऋण चुका नहीं पाया. मैं चुकाना चाहता था, लेकिन चाहते हुए भी चुका नहीं पाया. अंत में मूलधन की एक किस्त चुकाई है, बाकी मेरे ऊपर ही है."
"36 कौम का भी बड़ा कर्ज"
हेमाराम चौधरी ने कहा कि गोरधनराम के साथ जुड़े लोगों, विश्नोई समाज और उनके समर्थन में खड़ी रही 36 कौम का भी उनके ऊपर बड़ा ऋण है. उन्होंने कहा कि वे इस ऋण को कभी भूल नहीं सकते और न ही चुका सकते हैं. उन्होंने कहा, "मैं अगर अपनी चमड़ी की जूती भी बना लूं, तो भी गोरधनराम और 36 कौम का ऋण नहीं चुका पाऊंगा." इतना कहते-कहते हेमाराम चौधरी भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े. इसके बाद उन्होंने अपने 45 साल के सार्वजनिक जीवन को लेकर भी आत्ममंथन किया.
गोरधनराम की प्रतिमा का अनावरण
उन्होंने कहा कि उन्हें 45 साल तक सेवा की जिम्मेदारी मिली, लेकिन वे उसे ठीक से नहीं निभा पाए. जनता और समाज की उनसे जितनी अपेक्षाएं थीं, उनके मुताबिक वे बहुत कम कर पाए और इसके लिए उन्होंने क्षमा मांगी. गोरधनराम की प्रतिमा का अनावरण तो हुआ, लेकिन कार्यक्रम में सबसे भावुक तस्वीर हेमाराम चौधरी के छलकते आंसुओं की रही.
मंच पर सामने आई रिश्तों की पूरी कहानी
गोरधनराम विश्नोई की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम मूल रूप से श्रद्धांजलि और सम्मान का आयोजन था, लेकिन हेमाराम चौधरी के भावुक संबोधन ने इसे एक अलग ही भावनात्मक आयाम दे दिया. गोरधनराम के सामाजिक योगदान, 36 कौम में उनकी स्वीकार्यता और उनके साथ जुड़े लोगों के योगदान को याद करते हुए चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन को भी उसी रिश्ते के संदर्भ में देखा.
भाषण में बार-बार शब्द का इस्तेमाल किया
उनके भाषण में बार-बार ‘ऋण' शब्द का इस्तेमाल इस बात को सामने लाता रहा कि उनके लिए गोरधनराम केवल एक राजनीतिक साथी या सामाजिक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनके प्रति वे स्वयं को हमेशा ऋणी मानते रहे. कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि एक वरिष्ठ नेता, जिसने दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई, वह अपने पुराने साथी को याद करते हुए मंच पर खुद को रोक नहीं पाया.
प्रतिमा पत्थर की थी, लेकिन उसके सामने खड़ा व्यक्ति यादों के बोझ से टूट गया. हेमाराम चौधरी के आंसुओं ने गोरधनराम विश्नोई के साथ उनके रिश्ते की गहराई को शब्दों से कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से सामने रख दिया.
(रिपोर्ट- गनपत लाल)
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