बीते दिनों राजस्थान के पिलानी में स्थित BITS की महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर करीब 8 करोड़ की ठगी के मामले में CBI को बड़ी कामयाबी मिली है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने सिंडिकेट के 5 और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर महिला प्रोफेसर को डराया और फोन में APK फाइल इंस्टॉल कर बैंक SMS अलर्ट इंटरसेप्ट किए. महिला प्रोफेसर के साथ ठगी से जुड़े मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. CBI की टीम मनी ट्रेल के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है.
पुलिस अफसर बन किया डिजिटल अरेस्ट
CBI के अनुसार, पिलानी बिट्स (BITS Pilani, Rajasthan) की महिला प्रोफेसर श्रीजाता डे को साइबर ठगों ने करीब 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा. आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर प्रोफेसर को जांच और कार्रवाई का भय दिखाया. इस दौरान उनसे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई.
पहले 3 और अब 5 लोग गिरफ्तार
जांच के दौरान CBI ने आकाश, राजा करमाकर और ज्योति रानी को पहले गिरफ्तार किया था. अब संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े, इटारसी, आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि को गिरफ्तार किया गया है. CBI के मुताबिक, संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े पर धोखाधड़ी की रकम हासिल करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और रकम को आगे ट्रांसफर कर उसकी पहचान छिपाने में भूमिका निभाने का आरोप है.
पूरे नेटवर्क को खंगाल रही CBI की टीम
वहीं आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि पर ऐसे बैंक खातों की व्यवस्था करने और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग करने में शामिल होने का आरोप है. जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने बैंक खाताधारकों के मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल कर बैंक के SMS अलर्ट को इंटरसेप्ट किया और कथित तौर पर खातों को दूर से संचालित किया.
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिलानी के प्रोफेसर से ठगी गई 7.67 करोड़ रुपये की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट के इस संगठित नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश कर रही है.
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