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प‍िता अब्दुल करीम सुनते रहे ताने, बेटी मेविश टाक बनीं IPS, अब सोनभद्र ASP बनकर रचा इत‍िहास

IPS मेविश टाक की सक्‍सेस स्‍टोरी प्रेरणादायक है. यूपीएससी में तीसरे प्रयास में 386वीं रैंक हास‍िल कर उत्‍तर प्रदेश कैडर में आईपीएस बनीं. वर्तमान में सोनभद्र जिले की पहली महिला एएसपी पद पर सेवाएं दे रही हैं. राजस्‍थान के पाली से यूपी के सोनभद्र तक की पूरी कहानी जानिए. 

प‍िता अब्दुल करीम सुनते रहे ताने, बेटी मेविश टाक बनीं IPS, अब सोनभद्र ASP बनकर रचा इत‍िहास
आईपीएस मेव‍िश टाक एएसपी सोनभद्र उत्‍तर प्रदेश
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  • राजस्थान के पाली जिले की मेविस टाक ने बिना कोचिंग के यूपीएससी परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की.
  • मेविस टाक उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की पहली महिला एएसपी बनी हैं.
  • पिता अब्दुल करीम टाक ने सामाजिक तानों को झेलते हुए बेटियों को खूब पढ़ाया.

IPS Mavis Tak Success Story: देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को पास करना आसान नहीं होता है. लेकिन जब हौसले बुलंद हों और परिवार का पूरा साथ मिले, तो बड़ी से बड़ी रुकावटें भी दूर हो जाती हैं. राजस्थान के छोटे से गांव की बेटी मेविश टाक ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. मेविश टाक की सफलता की पूरी कहानी में प‍िता सबसे बड़ी ताकत रहे. प‍िता ने राजस्‍थान के तमाम सामाजिक बंधनों और लोगों के तानों का सामना करते हुए बेटी को पढ़ने-ल‍िखने को भरपूर मौका दिया.

नतीजा यह रहा क‍ि बेटी मेविश टाक ने न केवल यूपीएससी परीक्षा क्रैक की, बल्कि उन्‍हें उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की पहली महिला एएसपी बनने का भी गौरव हास‍िल हुआ. सोनभद्र पुल‍िस में एएसपी पद के इत‍िहास में अब तक पुरुष अफसर तैनात रहे हैं. पहली बार क‍िसी मह‍िला आईपीएस की तैनाती हुई है. 

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UPSC Success Story: बिना कोचिंग 386वीं रैंक, पिता झेलते रहे ताने; ऐसे IPS अधिकारी बनीं मेविश टाक 

आईपीएस मेविश टाक राजस्‍थान के पाली की बेटी 

मेविश टाक मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले की रहने वाली हैं. हालांकि उनका पूरा परिवार मुंबई में रहता है. उनके पिता अब्दुल करीम टाक बॉम्बे हाईकोर्ट में अनुवादक यानी ट्रांसलेटर के रूप में कार्यरत हैं और उनकी मां एक घरेलू महिला हैं. मेव‍िस का परिवार तीन बहनों और माता-पिता के साथ मुंबई में ही बसा हुआ है. खास बात यह है क‍ि मेविश टाक ऐसे पर‍िवार से हैं, ज‍िसमें कभी किसी ने सरकारी नौकरी नहीं की थी, लेकिन उनकी मेहनत ने आज उनके पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.

पिता को क्यों सुनने पड़े ताने?

एनडीटीवी से खास बातचीत में मेविश टाक ने बताया क‍ि राजस्‍थान में उनके पिता अब्दुल करीम टाक के लिए अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाना आसान नहीं था. समाज और रिश्तेदारों की तरफ से उन्हें बेटियों को ज्यादा पढ़ाने के लिए लगातार तरह-तरह के ताने सुनने को मिलते थे. लोग कहते थे क‍ि इनको इतना पढ़ा रहे हो कौनसा कलक्‍टर-एसपी बना दोगे, लेकिन अब्दुल करीम ने समाज के तानों की परवाह न करते हुए बेटियों के स्‍कूल-कॉलेज की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके. उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. पिता के इसी भरोसे का नतीजा है कि आज उनकी बेटी मेविश टाक भारतीय पुल‍िस सेवा की अध‍िकारी हैं. 

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मेव‍िश टाक की शिक्षा  

मेविश टाक की शुरुआती पढ़ाई मुंबई में ही हुई है. उन्होंने मुंबई के न्यू कैंब्रिज स्कूल से अपनी 10वीं की परीक्षा पास की थी. इसके बाद उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी की रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की. स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से ही राजनीति शास्त्र यानी पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने इंडियन फेडरेशन और लैंग्वेज पॉलिटिक्स विषय में अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की.

यूपीएससी में दो बार असफल 

यूपी कैडर में साल 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी मेविश टाक को यह सफलता तीसरे प्रयास में हासिल हुई थी. उनके शुरुआती दो प्रयासों में वे प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं. लेकिन लगातार दो असफलताओं के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी पुरानी कमजोरियों को पहचाना और उन पर कड़ी मेहनत की. उनकी सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए किसी भी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली. खुद की कड़ी मेहनत और स्व-अध्ययन यानी सेल्फ स्टडी के बल पर उन्होंने तीसरे प्रयास में 386वीं रैंक हासिल करके आईपीएस का पद पाया. 

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आईपीएस मेविश टाक की सफलता की कहानी पाली राजस्थान से एएसपी सोनभद्र

बर्थडे को सोनभद्र एएसपी पद पर ज्‍वाइन‍िंग

मेविश टाक का जन्म 24 सितंबर 1996 को हुआ था. उनके जीवन में एक बहुत ही खूबसूरत संयोग तब आया जब उन्होंने 24 सितंबर को अपने जन्मदिन के दिन ही सोनभद्र जिले की पहली महिला आईपीएस अधिकारी के रूप में अपर पुलिस अधीक्षक यानी एएसपी का पदभार ग्रहण किया. सोनभद्र एक संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिला माना जाता है. ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पहली महिला एएसपी बनना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों के लिए एक बहुत बड़ा गौरवशाली पल है.

बांदा में कैसा रहा था कार्यकाल?

बीते द‍िनों यूपी में कई आईपीएस तबादले हुए थे. उनमें आईपीएस मेविश टाक का नाम भी शाम‍िल था. सोनभद्र में तबादले से पहले मेविश टाक बांदा जिले में अपनी सेवाएं दे रही थीं. वहां वे सीओ यानी क्षेत्राधिकारी नगर, साइबर और क्राइम का पदभार संभाल रही थीं. बांदा में उनके काम करने के तरीके, ईमानदारी और कार्यकुशलता की खूब चर्चा हुई थी. जब उनका तबादला बांदा से सोनभद्र हुआ, तो वहां के तमाम समाजसेवियों और राजनीति से जुड़े लोगों ने उनकी विदाई पर उन्हें सम्मानित किया था. उनकी कार्यशैली से लोग काफी प्रभावित थे.

आईपीएस मेव‍िश टाक का Gen Z का संदेश

आज के युवाओं यानी जेन जी को सफलता के टिप्स देते हुए मेविश टाक कहती हैं कि मेहनत का कोई भी विकल्प नहीं होता है. उनके अनुसार शॉर्टकट के जरिए कभी भी जीवन में स्थाई सफलता हासिल नहीं की जा सकती है. उत्तर प्रदेश की मौजूदा पुलिस व्यवस्था को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं साफ की हैं. उनका कहना है कि वे अपनी कार्यशैली के जरिए कानून का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 

-सोनभद्र से अश्विनी स‍िंह की र‍िपोर्ट 
 

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