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'आपने रेड फोर्ट ब्लास्ट के लिए पैसे दिए हैं', फर्जी NIA अफसरों ने दिल्ली के बुजुर्ग दंपति को 7 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट, 30 लाख ठगे

फोन करने वाले ने खुद को NIA का अधिकारी बताया और कहा कि जांच में पता चला है कि बुजुर्ग ने रेड फोर्ट हमले के लिए पैसे दिए हैं और उनके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल आतंकियों को फंड करने के लिए किया गया है.

नई द‍िल्ली: दिल्ली में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. ठगों ने दिल्ली के द्वारका में रहने वाले 74 साल के रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी को NIA और ATS अधिकारी बनकर करीब 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. ठगों ने बुजुर्ग को डराया कि उनका बैंक अकाउंट रेड फोर्ट ब्लास्ट के आरोपियों को फंडिंग करने में इस्तेमाल हुआ है. इस डर की वजह से दंपति ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी में से 30 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए.

पुलिस के मुताबिक, यह मामला पिछले साल 23 नवंबर का है. बुजुर्ग किसी रिश्तेदार की शादी में जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी शाम करीब 4 बजे उनके पास फोन आया. फोन करने वाले ने खुद को NIA का अधिकारी बताया और कहा कि जांच में पता चला है कि बुजुर्ग ने रेड फोर्ट हमले के लिए पैसे दिए हैं और उनके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल आतंकियों को फंड करने के लिए किया गया है. उस वक्त रेड फोर्ट के पास कार ब्लास्ट की घटना को कुछ ही दिन हुए थे, इसलिए बुजुर्ग और ज्यादा घबरा गए. 

ठगों ने खुद को बताया NIA और ATS का अधि‍कारी

अगले दिन ठगों ने वीडियो कॉल की. एक आरोपी ने खुद को NIA अधिकारी बताया, जबकि दूसरे ने खुद को ATS का अधिकारी बताया. उन्होंने बुजुर्ग से कहा कि उनके खिलाफ जांच चल रही है और उनके बैंक अकाउंट का संबंध उमर नबी और दूसरे आरोपियों से मिला है. आरोपियों ने धमकी दी कि अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

7 द‍िन तक क‍िया ड‍िजि‍टल अरेस्‍ट

इसके बाद शुरू हुआ करीब 7 दिन का डिजिटल अरेस्ट. ठगों ने बुजुर्ग दंपति को लगातार फोन और वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा. उन्हें किसी से बात करने और यहां तक कि अपने बच्चों को भी इस बारे में बताने से मना कर दिया गया. आरोपियों ने WhatsApp पर एक फर्जी ‘Confidentiality Agreement' भी भेजा, जिस पर बुजुर्ग से हस्ताक्षर करवाए गए.

ठगों ने दंपति से उनके बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और दूसरी संपत्तियों की पूरी जानकारी भी हासिल कर ली. इसके बाद उन्होंने कहा कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ उनके पैसे के सोर्स की जांच करनी है. इसके लिए उन्हें RBI से अप्रूव्ड एक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने होंगे और जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी. 

FD तोड़कर 30 लाख रुपये निकाले

3 दिसंबर को बुजुर्ग ने अपनी FD तोड़कर 30 लाख रुपये निकाले. पहले उन्होंने 15 लाख रुपये ठगों के बताए अकाउंट में RTGS के जरिए भेजे. अगले दिन ठगों ने फिर 15 लाख रुपये मांगे और बुजुर्ग ने वह रकम भी ट्रांसफर कर दी. इसके बाद उन्हें RBI के नाम से एक फर्जी 'Verification Letter' भी भेजा गया, जिस पर RBI गवर्नर की मुहर लगी हुई थी. इसके बाद ठगों ने फोन करना बंद कर दिया और बुजुर्ग को समझ आया कि उनके साथ धोखा हो गया है. 

मामले की शिकायत के बाद जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई. पुलिस ने पैसे के ट्रेल की जांच शुरू की. करीब छह महीने बाद मई में पुलिस को एक अहम सुराग मिला. जांच में पता चला कि बुजुर्ग द्वारा भेजी गई रकम में से एक RTGS ट्रांजैक्शन पहले श्री बालाजी ट्रैक्टर नाम की एक कंपनी के बैंक अकाउंट में गया था. यह अकाउंट सुनील सिंगला के नाम पर था. जांच में सामने आया कि सिंगला के अकाउंट का इस्तेमाल पहले भी कई साइबर फ्रॉड में किया जा चुका था. पुलिस के मुताबिक, इस अकाउंट के जरिए छह से ज्यादा साइबर फ्रॉड मामलों में करीब 1 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया था.

पुल‍िस ने स‍ुनील स‍िंगला को क‍िया ग‍िरफ्तार

सिंगला हरियाणा के फतेहाबाद का रहने वाला है और इससे पहले भी एक साइबर फ्रॉड मामले में गिरफ्तार हो चुका था. पुलिस ने 11 मई को सुनील सिंगला को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने बताया कि वह अपना कारोबार बढ़ाने के लिए ऑनलाइन लोन की तलाश कर रहा था. इसी दौरान एक व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और उसके बैंक अकाउंट से बड़े लेन-देन कराने के बदले कमीशन देने का ऑफर दिया. इस मामले में पुलिस को सबसे बड़ी कामयाबी यह मिली कि बुजुर्ग द्वारा भेजे गए 15 लाख रुपये में से सिर्फ 3 लाख रुपये आगे ट्रांसफर हो पाए थे. बाकी 12 लाख रुपये पुलिस ने रिकवर कर लिए, जिसे बाद में पीड़ित को वापस कर दिया गया.

लोगों को डराने के लिए बड़े और चर्चित अपराधों का इस्तेमाल कर रहे साइबर ठग

पुलिस का कहना है कि यह मामला बताता है कि साइबर ठग अब लोगों को डराने के लिए बड़े और चर्चित अपराधों का इस्तेमाल कर रहे हैं. फर्जी पुलिस अधिकारी, फर्जी कोर्ट नोटिस, NIA या ATS का नाम और गिरफ्तारी की धमकी देकर लोगों को इतना डरा दिया जाता है कि वे बिना किसी से सलाह किए अपनी पूरी जमा पूंजी तक ट्रांसफर कर देते हैं. 

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