- पंजाब पुलिस ने अमृतसर में हुए हमले में शामिल पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर काम करने वाले गैंग का खुलासा किया
- गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल में बंद कैदी ने मोबाइल से पाकिस्तानी ISI से संपर्क कर हमला करने के लिए टीम बनाई थी
- गिरफ्तार आरोपियों में सिमरजीत सिंह और साहिब सिंह शामिल हैं, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है
पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था और अमृतसर में पुलिसकर्मी पर हुए हमले में शामिल था. सोमवार को पुलिस के साथ हाथापाई के दौरान एक आरोपी गोली लगने से घायल हो गया. उसने भागने और एक पुलिस अधिकारी की सर्विस रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की थी.
अमृतसर रूरल पुलिस के मुताबिक, इस गैंग को गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल में बंद एक व्यक्ति ने बनाया था, जिसने मोबाइल फ़ोन के ज़रिए पाकिस्तानी ISI हैंडलर्स से दोबारा संपर्क किया था. हैंडलर्स ने पुलिसकर्मी पर हमला करने और पंजाब में दहशत फैलाने के लिए 10 लाख रुपये देने का लालच दिया था.
ये मामला 4 अक्टूबर को हुई गोलीबारी की घटना से जुड़ा है, जिसमें अमृतसर के सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) स्टेशन में तैनात ASI सुखचैन सिंह को मोटरसाइकिल से घर लौटने के दौरान गोली मार दी गई थी.
पुलिस ने बताया कि शाम करीब 7:15 बजे, जब ASI जगदेव खुर्द गांव में अपने घर से लगभग 200 मीटर दूर थे, तो मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक उनके पास आए. उनमें से एक ने उन पर गोली चलाई. गोली ASI के बाएं हाथ में लगी, जिसके बाद उन्हें अजनाला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. 5 अक्टूबर को अजनाला पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 109, 61(2) और 3(5) और आर्म्स एक्ट की धा12:04 13-10-2026रा 25 के तहत FIR दर्ज की गई.
पुलिस ने बताया कि बाद में सोशल मीडिया पर 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली. जेल में बंद कैदी ने पाकिस्तानी हैंडलर्स से फिर से संपर्क किया.
पुलिस की जांच के अनुसार, चक डोगरा गांव के रहने वाले बलजीत सिंह (पिता मेवा सिंह) को पहले मार्च 2026 में भिंडी सैदान पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और वह गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल में बंद था.

पुलिस का आरोप है कि जेल में रहते हुए उसने मोबाइल फोन के ज़रिए पाकिस्तानी ISI हैंडलर्स से फिर से संपर्क किया और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने के लिए तीन साथियों की एक टीम बनाई. आरोपियों को कथित तौर पर हमला करने के लिए ₹10 लाख देने का लालच दिया गया था.
पुलिस ने आरोपियों की पहचान सिमरजीत सिंह उर्फ सिमर, साहिब सिंह उर्फ गोरी, बलजीत सिंह (पिता मेवा सिंह) और एक अन्य बलजीत सिंह (पिता बबन सिंह) के तौर पर की है. सिमरजीत सिंह और साहिब सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बलजीत सिंह (पिता मेवा सिंह) को गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल से लाया गया और इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया. चौथे आरोपी, बलजीत सिंह (पिता बबन सिंह) को अभी गिरफ्तार किया जाना बाकी है.
पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान सिमरजीत सिंह मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि दूसरा बलजीत सिंह बीच में बैठा था और साहिब सिंह पीछे बैठा था. साहिब सिंह ने कथित तौर पर ASI सुखचैन सिंह पर गोली चलाई.
गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल में तलाशी के दौरान वह मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसका इस्तेमाल जेल में बंद कैदी पाकिस्तानी हैंडलर्स से बातचीत करने के लिए करता था. पुलिस ने बताया कि जेल अधिकारियों ने इस बरामदगी के सिलसिले में अलग से आपराधिक कार्रवाई शुरू की है.
भागने की कोशिश में आरोपी घायल
सोमवार को एक और घटनाक्रम में, पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर क्राइम सीन की जांच के लिए अजनाला स्टेशन हाउस ऑफिसर की अगुवाई में पुलिस टीम साहिब सिंह को ले जा रही थी. पुलिस का आरोप है कि साहिब सिंह ने भागने की कोशिश में टीम के साथ हाथापाई की और सब-इंस्पेक्टर मनदीप सिंह की सर्विस रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की. इस दौरान, एक गोली पुलिस गाड़ी की छत पर लगी, जबकि दूसरी गोली साहिब सिंह के पैर में लगी. इसके बाद उसे इलाज के लिए अजनाला के सिविल अस्पताल ले जाया गया.
अमृतसर ग्रामीण के SSP कंवलप्रीत सिंह चहल ने हमले में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए जांच विंग, अजनाला पुलिस स्टेशन और CIA यूनिट के अधिकारियों को मिलाकर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीमें बनाई थीं. जांच चल रही है और पुलिस ने अभी तक चौथे आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है.
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