पंजाब यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर सोमवार को चंडीगढ़ में एक अहम बैठक होनी है. बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी के भविष्य और स्वरूप को लेकर फैसला लिया जा सकता है. इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शामिल होंगे. यह बैठक सुबह 10 चंडीगढ़ यूटी सचिवालय में होगी.
दरअसल, पंजाब का पड़ोसी राज्य हरियाणा अपने राज्य के कॉलेजों के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता देने की मांग कर रहा है. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसमें हरियाणा के कॉलेजों को भी मान्यता मिलनी चाहिए, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब किसी तरह की भागीदारी के पक्ष में नहीं है. पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है और हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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एक जून को चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित की अध्यक्षता में पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर बैठक कर चुके हैं. इसके बाद आज सभी पक्षकारों के साथ इस मुद्दे पर बैठक होनी है.
1882 में लाहौर में हुई थी स्थापना
दरअसल, पंजाब यूनिवर्सिटी देश की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में से एक है, जिसकी स्थापना सन 1882 में लाहौर में की गई थी. हालांकि 1947 में देश के बंटवारे के बाद ये भारत के पंजाब में आई और 1966 में पंजाब,हरियाणा और चंडीगढ़ के अलग होने के बाद अब यह यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में है.
1976 में हरियाणा ने बंद की थी ग्रांट
पहले इस यूनिवर्सिटी को केंद्र, पंजाब और हरियाणा की सरकारें ग्रांट दिया करती थी, लेकिन 1976 के बाद हरियाणा ने ग्रांट देना बंद कर दिया और फिर केंद्र और पंजाब सरकार ही इस यूनिवर्सिटी को ग्रांट देकर चला रहे हैं.
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं
इस समय इस यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के मुताबिक पे रिवीजन के बाद यूनिवर्सिटी के पास 118 करोड रुपए का गैप है. हरियाणा सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी को ग्रांट देना फिर शुरू कर सकती है, लेकिन बदले में उसको हरियाणा के कॉलेजों के लिए इस यूनिवर्सिटी से संबद्धता चाहिए.
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