Mary Kom on retirement: छह बार की विश्व चैंपियन और 2012 ओलंपिक पदक विजेता मैंगटे चुंगनेइजैंग मैरी कॉम ने एनडीटीवी से बातचीत में साफ किया है कि वो संन्यास की कगार पर हैं. हालांकि, उन्होंने अभी तक संन्यास का ऐलान नहीं किया है. इससे पहले न्यूज एजेंसी एएनआई ने जानकारी दी थी कि मैरी कॉम ने बुधवार को मुक्केबाजी से संन्यास की घोषणा की. एएनआई के अनुसार, एक कार्यक्रम के दौरान मैरी कॉम ने अपने संन्यास का ऐलान किया. मैरी कॉम ने इस दौरान साफ कहा कि उन्हें अभी भी कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने की भूख है, लेकिन उम्र संबंधी नियमों के कारण उन्हें संन्यास लेना पड़ रहा है. बता दें, अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आईबीए) के नियम के अनुसार, पुरुष और महिला मुक्केबाजों को केवल 40 वर्ष की आयु तक विशिष्ट स्तर की प्रतियोगिता में लड़ने की अनुमति होती हैं.
हालांकि, एनडीटीवी से बात करते हुए मेरीकॉम ने इस इवेंट में दिए गए बयान पर मैरीकॉम सफ़ाई देते हुए कहा"मुझे मिसकोट किया गया है. मैं रिटायर होने की कगार पर हूं. रिटायर नहीं हुई हूं."
वहीं लंदन ओलंपिक 2012 की कांस्य पदक विजेता मेरीकोम ने इस मामले पर अपना एक बयान जारी किया है और कहा,"मीडिया के मेरे दोस्तों, मैने अभी तक संन्यास की घोषणा नहीं की है और मेरे बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया. जब भी मुझे संन्यास का ऐलान करना होगा तो मैं खुद सभी को बताऊंगी." पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा,"मैने कुछ मीडिया रिपोर्ट देखी हैं जिनमें कहा गया कि मैने खेल को अलविदा कह दिया जो सही नहीं है."
उन्होंने कहा,"मैं 24 जनवरी को डिब्रूगढ में एक स्कूल के कार्यक्रम में भाग ले रही थी जहां मैं बच्चों की हौसलाअफजाई कर रही थी. मैने कहा था कि मेरे भीतर अभी भी खेलों में नयी ऊंचाइयां छूने की भूख है लेकिन ओलंपिक में उम्र की सीमा होने से मैं भाग नहीं ले सकती. मैं हालांकि अपना खेल जारी रख सकती हूं और मेरा फोकस फिटनेस पर है." 41 वर्ष की मेरीकोम ने आगे लिखा,"मैं जब भी संन्यास का फैसला लूंगी, सभी को बताऊंगी. कृपया अपनी खबर दुरूस्त कर लें."
एएनआई के अनुसार, मैरी कॉम ने इवेंट के दौरान कहा था,"मुझमें अभी भी भूख है लेकिन दुर्भाग्य से उम्र सीमा खत्म हो जाने के कारण मैं किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकती. मैं और खेलना चाहता हूं लेकिन मुझे (उम्र सीमा के कारण) छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है. मुझे संन्यास लेना होगा."
मैरी कॉम मुक्केबाजी इतिहास में छह विश्व खिताब पर कब्जा करने वाली पहली महिला मुक्केबाज हैं. पांच बार की एशियाई चैंपियन 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज थीं. अनुभवी मुक्केबाज ने लंदन 2012 ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था, जिसके बाद उनसे कोई खिताब अछूता नहीं रह गया था.
उन्होंने 18 साल की उम्र में स्क्रैंटन, पेनसिल्वेनिया में विश्व मीट में खुद को दुनिया के सामने पेश करते हुए अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेल था. इस मैच में मैरी कॉम ने अपनी क्लियर बॉक्सिंग टेक्नीक से सभी को प्रभावित किया और 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बनाई. फाइनल में वह पिछड़ गईं लेकिन सफलता की छाप छोड़ गईं जो उन्हें भविष्य में मिलने वाली थीं.
मैरी कॉम एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं. उन्होंने 2005, 2006, 2008 और 2010 संस्करणों में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता. 2008 का खिताब जीतने के बाद, मैरी अपने जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद ब्रेक पर चली गईं.
2012 ओलंपिक पदक जीतने के बाद मैरी अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने के बाद एक बार फिर ब्रेक पर चली गईं. उन्होंने अपनी वापसी की लेकिन दिल्ली में आयोजित 2018 विश्व चैंपियनशिप में शिखर पर अपनी जगह पक्की कर ली. उन्होंने अपने छठे विश्व खिताब के लिए यूक्रेन की हन्ना ओखोटा पर 5-0 से जीत दर्ज की. एक साल बाद, उसने अपना आठवां विश्व पदक जीता, जो किसी भी पुरुष या महिला मुक्केबाज द्वारा सबसे अधिक था.
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