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ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की जान बचाई जा सकती थी, तीन तस्वीरों से समझिए

पेशे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत कई सवाल खड़े करती है. कैसे नाकाम सिस्टम की वजह से एक पिता ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया. अगर थोड़ी सी हिम्मत की जाती तो युवराज को बचाया जा सकता था.

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की जान बचाई जा सकती थी, तीन तस्वीरों से समझिए
  • नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज कोहरे में कार दुर्घटना के कारण निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में फंस गए थे
  • युवराज की कार बेसमेंट में पानी में डूब गई थी और रेस्क्यू टीम की सुस्ती के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी
  • पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम रेस्क्यू के लिए मौजूद थी, लेकिन टीम में तैराक न होने से युवराज बच न सके
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जब शहर हमारा सोता है... तो मालूम तुमको क्या क्या होता है... फिल्म 'गुलाल' का ये गाना तो याद होगा न... 16 जनवरी की सर्द रात, कोहरे का कहर, जब नोएडा कंबल और रजाई में दुबक कर सो रहा था. उस वक्त उन्हीं के शहर का बाशिंदा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था. वो मिन्नतें कर रहा था. वो जीना चाहता था. पहले पापा से, फिर इस सिस्टम से उसने लगातार गुहार लगाई. लेकिन नाउम्मीदी हासिल हुई. सुस्त और अनमने ढंग से किए गए रेस्क्यू की भेंट नोएडा का इंजीनियर युवराज मेहता चढ़ गया.

पेशे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज गुरुग्राम से अपने घर सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के लिए जा रहे थे. कोहरा घना था. विजिबिलिटी कम थी. लिहाजा एक ब्लाइंड स्पॉट पर युवराज को दिखाई नहीं दिया कि उसे सीधा जाना है या मुड़ना है. युवराज की कार सड़क के साथ न मुड़कर सीधा दीवार को तोड़कर एक मॉल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा घुसी, बेसमेंट में पानी भरा हुआ था, इसलिए कार डूब गई.  

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अब यहां से कहानी जितनी जटिल दिखती है उसे इतना ही आसान बनाया जा सकता था और शख्स की जान बचाई जा सकती थी. जब युवराज ने हर तरह के प्रयास करने के बाद 12 बजे पिता से जान बचाने की गुहार लगाई तो वह भी भागे-भागे हादसे वाली जगह पहुंच गए.

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बकौल युवराज के पिता, 112 पर कॉल किया तो पुलिस 20 मिनट में पहुंच गई. इसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम आई. रेस्क्यू के नाम पर उन्होंने अधूरी कोशिश की. हाइड्रोलिक मशीन का इस्तेमाल किया, लेकिन वह मेरे बेटे तक रस्सी नहीं पहुंचा पाए. हैरानी की बात ये थी कि पानी और डूबने की खबर थी लेकिन रेस्क्यू टीम के पास कोई भी तैराक नहीं था, जो कूदकर युवराज को बचा सकता था.

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मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे

हादसे के वक्त वहां डिलिवरी बॉय मोहिंदर भी मौजूद था. उसने भी युवराज बचाने के लिए नाले में छलांग दी थी, लेकिन वह खाली हाथ लौटा. मोहिंदर का साफ कहना है कि लड़के की मौत के जिम्मेदार सरकार तंत्र है. "वह बोलता रहा मुझे बचा लो, किसी भी तरह से. मुझे बचा लो. मौके पर पुलिस भी थी. एसडीआरएफ भी थी और फायर ब्रिगेड वाले भी थे. किसी ने उसकी मदद नहीं की. वे बोल रहे थे. ठंडा पानी है, हम अंदर नहीं जाएंगे. अंदर सरिया है, हम नहीं जाएंगे. सिस्टम निकम्मा था, कितनी हैरानी की बात है कि रेस्क्यू ऑपरेशन करने वाले ठंडे पानी और सरिये की चिंता कर रहे थे. ये उस रात की कहानी नहीं है, उस हर उस रात की कहानी होगी, जहां सब एक-दूसरे की तरफ देख रहे होंगे और पूछ रहे होंगे.. वो पूछे हैं हैरान होकर, ऐसा सब कुछ होता है कब... वो बतालाओ उनको ऐसा तब तब तब तब होता है...जब शहर हमारा सोता है

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