- नोएडा के सेक्टर-150 में सड़क किनारे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज की मौत हुई, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठे
- कई इलाकों में अधूरी इमारतें, खुले नाले और बिना बैरिकेड वाले गड्ढे सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं
- नोएडा प्राधिकरण ने शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं दिया, जिससे प्लानिंग और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं
16 जनवरी को नोएडा के सेक्टर-150 में सड़क किनारे गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई. इससे सवाल उठा कि इस शहर में आम शहरी कितना सेफ है? ये जानने के लिए NDTV की टीम नोएडा के कई इलाकों में गई. हमारी टीम को दिखे अंधेरे रास्ते, खुले नाले, बिना बैरिकेड वाले गड्ढे, अधूरी खंडहरनुमा इमारतें और टूटती उम्मीदें. पढ़िए कहानी उस शहर की जहां करोड़ों के भाव छोटे-छोटे फ्लैट मिलते हैं और कौड़ियों के भाव इंसानों के बड़े-बड़े अरमान टूटते हैं.
युवराज एक आम शहरी की तरह घर लौट रहे थे. अंधेरा था, कोहरा था. उनकी कार दीवार तोड़ कर बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में डूब गई. अव्वल तो वहां गड्ढा होना जानलेवा लापरवाही थी. दूसरी बात रेस्क्यू टीम आकर भी उन्हें बचा न पाई. उनकी मौत हो गई. एक परिवार तबाह हो गया. नोएडा में तबाही के ऐसे निशां हर तरफ दिख जाते हैं.

सेक्टर 136 में खुला नाला

पवन चौधरी
पास में ही है सुपरटेक केपटाउन. कभी यहां पार्क और विला बनाने का वादा किया गया था. लेकिन हमें मिला एक वीरान मैदान और खतरनाक गड्ढे. नतीजा ये कि बच्चों को लेकर हमेशा डर बना रहता है.

सेक्टर 136 में खुला नाला
केपटाउन की एक निवासी किस्मत ने एक गड्ढे के पास खड़े होकर कहा, "हम सुरक्षा के लिए सोसाइटी में घर लेते हैं, लेकिन यहां देखिए सुरक्षा का क्या हाल है. जब हमारे बच्चे यहां खेलते हैं तो हम उन्हें एक पल के लिए अपनी आंखों से ओझल नहीं होने दे सकते."

देवेंद्र गौर
NDTV की पड़ताल में क्या मिला?
- शहर में कई खुले नाले और गड्ढे हैं जिनके आसपास कोई बैरिकेड, दीवार या चेतावनी संकेत नहीं है.
- कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं है. इससे रात में हादसों का डर रहता है.
- कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं और उनके गड्ढे बिना सुरक्षा इंतज़ामों के खुले पड़े हैं, जो बड़े जोखिम पैदा करते हैं.
- कई लोगों ने बताया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं मिला.
- कई सोसायटियों के अंदर और बाहर गड्ढे हैं. इनमें बच्चों या वाहन चालकों के गिरने का खतरा बना रहता है.
इन तमाम समस्याओं के बारे में पक्ष लेने के लिए NDTV ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी से भी संपर्क किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
नोएडा में पानी की भी एक बड़ी समस्या है. कई इलाकों में खारा पानी आता है. TDS (टोटल डिजॉल्व सॉलिड्स) इतना ज्यादा है कि बीमारियों का खतरा बना रहता है.
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सेक्टर 150 में वह स्थान जहां युवराज की मौत हुई थी

पुष्कर चंदना
73 वर्षीय चंदना ने हमें खुद पानी की गुणवत्ता माप कर दिखाई. उनका TDS मीटर 1600 पर जाकर रुका. पेयजल में 500 से ज्यादा पार्ट्स प्रति मिलियन हो तो खतरनाक माना जाता है.
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जब NDTV ने नोएडा के जल विभाग के उप महाप्रबंधक अर्पित सिंह से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि दो महीने में नोएडा के सेक्टर 100 स्थित लोटस पनाश तक पाइपलाइन का काम पूरा हो जाएगा और बेहतर पानी मिलेगा. उन्होंने कहा कि चार सेक्टर पहले से ही इस लाइन से पानी ले रहे हैं और आगे के सेक्टरों के लिए भी व्यवस्था की गई है. सिंह ने आगे बताया कि उच्च टीडीएस की शिकायतें मुख्य रूप से लोटस पनाश से संबंधित हैं, जबकि सुपरटेक और अन्य सेक्टरों को 80 प्रतिशत पानी गंगा नदी से मिलता है. सिंह ने यह भी कहा कि उच्च टीडीएस अक्सर आंतरिक कारणों से भी होता है, जैसे कि सोसायटी टैंक का गंदा होना.

सुपरटेक केपटाउन में अधूरी इमारतें, अब केवल अवशेष बचे हैं
नोएडा टाउन प्लानिंग को लेकर खड़े हो रहे बड़े सवाल
कुल मिलाकर नोएडा की जो तस्वीर सामने आई, वह एक जर्जर शहर की भयावह तस्वीर है. टाउन प्लानिंग को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं. जिन्हें कभी सुरक्षित और आरामदेह बताकर बेचा गया था, आज वो सोसाइटियां स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं. लोगों को आश्रय देने के लिए बनाई गईं इमारतें अब भय का कारण बन गई हैं. परिवार शोक में डूबे हैं और इन कंक्रीट के जंगलों में एक सवाल गूंज रहा है: जिम्मेदारी कौन लेगा?
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सेक्टर 136 में टूटी सड़क और खुला नाला
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