- ग्रेटर नोएडा के इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में बिल्डर रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत मिल गई है
- सूरजपुर CJM कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए की जमानत राशि पर रिहा किया है
- कोर्ट ने जमानत देते वक्त दोनों को जांच में सहयोग करने और देश नहीं छोड़ने की तीन शर्तें लगाईं हैं
ग्रेटर नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में गिरफ्तार लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी रवि बंसल और सचिन करनवाल को सूरजपुर CJM कोर्ट से जमानत मिल गई है. दोनों ने अदालत से कहा कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है. वहीं कोर्ट ने भी माना कि ये मामला जमानती है, इसलिए जमानत देने का आधार मौजूद है. अदालत ने दोनों अभियुक्तों को 25-25 हजार रुपए की जमानत राशि पर रिहा कर दिया.
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जमानत देते वक्त कोर्ट ने लगाईं शर्तें
रवि बंसल और सचिन करनवाल को जमानत देते समय सूरजपुर CJM कोर्ट ने तीन शर्तें लगाई हैं. अदालत ने कहा है कि दोनों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और बिना अनुमति के वे देश नहीं छोड़ सकेंगे. साथ ही जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ भी नहीं करेंगे.

पानी में कार गिरने से हुई थी युवराज की मौत
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे की वजह से अनियंत्रित होकर मॉल बनाने के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी. हादसे वाली जगह पर कोई अवरोधक भी नहीं था. यह गड्ढा एक मॉल के बेसमेंट के निर्माण के लिए खोदा गया था.
ठंडे पानी और कोहरे का हवाला देकर नहीं किया रेस्क्यू
इस पूरे मामले में नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही देखने को मिली. प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही की वजह से युवराज की जान चली गई. वह करीब 80 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल टॉर्च जलाकर “बचाओ-बचाओ” चिल्लाता रहा. उसने पिता से फोन पर मिन्नतें की- “पापा मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता”. लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ठंडे पानी और कोहरे का हवाला देकर पानी में उतरी ही नहीं. करीब साढ़े चार घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में युवराज का शव मिला था.
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