जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई अब भी मॉनसून का इंतजार कर रही है. आलम यह है कि दिन में तो ठीक रात में भी लोग उमस भरी गर्मी से परेशान नजर आ रहे हैं. मुंबई के कई इलाकों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर बना हुआ है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मुंबई में इस समय महसूस होने वाली गर्मी का कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की धीमी रफ्तार है. क्योंकि मुंबई में पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया है. आमतौर पर 11 जून तक मॉनसून मुंबई पहुंच जाता था. लेकिन लंबे समय बाद ऐसा हुआ है जब मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. जिससे शहर का मौसम उमस और गर्म बना हुआ है.
रात में भी क्यों नहीं मिल रही राहत?
मौसम विभाग के मुताबिक अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण वातावरण में नमी का स्तर काफी बढ़ गया है. वहीं बादलों की मौजूदगी के कारण दिन की गर्मी रात में भी बनी रहती है. इससे तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं हो रही और रातें असामान्य रूप से गर्म महसूस हो रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गर्म रातें हेल्थ के लिए चिंता का विषय हैं. शरीर को रात के समय पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती, जिससे हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है. खास तौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है.
मॉनसून में देरी की क्या वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मॉनसून की प्रगति पश्चिमी विक्षोभों और बड़े पैमाने पर मौसमीय बदलावों के कारण धीमी हुई है. मॉनसून 4 जून को केरल पहुंचा था, जो सामान्य से तीन दिन देरी से था. इसके बाद भी इसकी उत्तर और मध्य भारत की ओर बढ़ने की गति अपेक्षा से कम रही. इसके अलावा, प्रशांत महासागर में एल-नीनो की वापसी और उससे जुड़ी मौसमीय परिस्थितियों का भी प्रभाव देखा जा रहा है, जिसके चलते बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं.
मुंबई में कब बरसेंगे बदरा?
महाराष्ट्र में मॉनसून के 20 जून के आसपास सक्रिय रूप से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. मुंबई और महानगर क्षेत्र में भी इसी अवधि के दौरान मॉनसून के पूरी तरह पहुंचने और व्यापक बारिश शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में छिटपुट बारिश, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, लेकिन व्यापक और लगातार मॉनसूनी बारिश के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है.
किसानों से लेकर आम लोगों तक बढ़ी चिंता
मॉनसून में देरी का असर केवल शहरों की गर्मी तक सीमित नहीं है. महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसान बुवाई की तैयारी कर चुके हैं और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के शुरुआती दिनों की बारिश कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल मुंबईकरों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद मॉनसून ही है. जब तक बारिश की जोरदार शुरुआत नहीं होती, तब तक शहर को गर्मी, उमस और तपती रातों का सामना करना पड़ सकता है.
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