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आज आएगा BMC का बजट, इस महानगरपालिका के आगे कई राज्यों के बजट भी छोटे... जानें- कहां से होगी कमाई और कहां खर्च

BMC का 2025-26 बजट 80,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है, जो देश की किसी भी नगर निगम और कई राज्यों से बड़ा है. बीएमसी की आय मुख्यतः शुल्क, टैक्स और जीएसटी क्षतिपूर्ति से आती है तथा खर्च सड़क, कोस्टल रोड, सीवरेज और सार्वजनिक सेवाओं पर होता है.

आज आएगा BMC का बजट,  इस महानगरपालिका के आगे कई राज्यों के बजट भी छोटे... जानें- कहां से होगी कमाई और कहां खर्च
मुंबई:

मुंबई महानगरपालिका (BMC) का वर्ष 2026-27 के लिए बजट 25 फरवरी को पेश किया जाएगा. देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका होने के नाते बीएमसी के इस बजट पर सबकी नजरें टिकी हैं. इस साल का बजट 80,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक होने की संभावना है. बीएमसी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 74,427 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट था और पिछले वर्ष के अनुमान से लगभग 14% अधिक था. यह देश की किसी भी महानगरपालिका द्वारा पेश किया गया सर्वाधिक बजट है. बीएमसी का यह बजट भारत की टॉप 10 सबसे अमीर नगरपालिकाओं में शामिल अन्य पांच स्थानीय निकायों के कुल वार्षिक बजट से भी ज्यादा है.

5 राज्यों के बजट से भी अमीर महानगरपालिका!

मुंबई महानगरपालिका का यह बजट कितना विशाल है, यह राज्यों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है. 2025-26 में गोवा राज्य का बजट 28,162 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश का 39,842 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश का 58,514 करोड़ रुपये, सिक्किम का 16,196 करोड़ रुपये और त्रिपुरा का बजट 31,412 करोड़ रुपये है. इसका अर्थ यह है कि अकेले मुंबई महानगरपालिका इन पांचों राज्यों के सम्मिलित खर्च से भी अधिक खर्च करने वाली है.

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बीएमसी से कम बजट वाले राज्यों में गोवा, त्रिपुरा, सिक्किम, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं. पिछले साल जहां बीएमसी का बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक था, वहीं मिजोरम का बजट मात्र 15,043 करोड़ रुपये था. इसके अलावा सिक्किम का बजट 16,196 करोड़ रुपये, नगालैंड का 24,699 करोड़ रुपये, मणिपुर का 29,988 करोड़ रुपये, मेघालय का 30,003 करोड़ रुपये, त्रिपुरा का 32,423 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश का 39,842 करोड़ रुपये, गोवा का 28,162 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश का बजट 58,514 करोड़ रुपये था. स्पष्ट है कि नौ राज्यों का बजट बीएमसी की तुलना में न केवल कम है, बल्कि लगभग आधा है. मिजोरम का बजट तो बीएमसी के एक-तिहाई हिस्से के बराबर भी नहीं है.

दिल्ली-बेंगलुरु से कहीं ज्यादा बजट

दिल्ली (16,500 करोड़ रुपये) और बेंगलुरु (19,900 करोड़ रुपये) जैसे बड़े शहरों की तुलना में मुंबई की आर्थिक शक्ति कई गुना अधिक है. जिस दिल्ली नगर निगम की इतनी चर्चा होती है, उसका बजट महज 16,500 करोड़ रुपये है, जबकि मुंबई का बजट उससे साढ़े चार गुना ज्यादा है। गोवा से लेकर हिमाचल तक पांच राज्यों को मिला दिया जाए, तब भी मुंबई का आंकड़ा भारी पड़ता है.

कहां से कमाती है BMC?

भारत की सबसे संसाधन संपन्न महानगरपालिका मानी जाने वाली बीएमसी अनगिनत स्रोतों से राजस्व प्राप्त करती है. इसके आय के प्रमुख स्रोतों में शुल्क, टैक्स, विकास शुल्क और निवेश से होने वाली आय शामिल है. 2025 में बीएमसी की आय 81,774 करोड़ रुपये होने का अनुमान था. विभिन्न सेवाओं, लाइसेंस और शुल्क से होने वाली कमाई आय का सबसे बड़ा जरिया है. 2016 से 2025 के बीच बीएमसी को 'शुल्क और उपयोगकर्ता शुल्क' से 94,600 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिसमें पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, विलंब सेवा लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क, स्विमिंग पूल आरक्षण शुल्क, डिमोलिशन शुल्क, विज्ञापन शुल्क और जल कनेक्शन शुल्क जैसे मद शामिल हैं.

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जकात (Octroi) बंद होने के बाद अब बीएमसी का मुख्य आधार जीएसटी के बदले मिलने वाली सरकारी क्षतिपूर्ति है, जिसके इस साल 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है. संपत्ति कर (Property Tax) से 5,200 करोड़ रुपये, जबकि विकास शुल्क और प्रीमियम से 6,000 करोड़ रुपये की आय अपेक्षित है. हालांकि, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर बढ़ते खर्च के कारण पालिका की सावधि जमा (FD) राशि में कमी आने की बात भी सामने आई है.

बीएमसी कैसे करती है खर्च?

बीएमसी अपने बजट का अधिकांश हिस्सा सड़कों, पुलों, सीवरेज पाइपलाइनों, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन, शिक्षा, सुरक्षा, और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करती है.

कहां कितना होगा खर्च? (Major Allocations):

  • सीवरेज प्रबंधन (MSDP): 5,545 करोड़ रुपये
  • वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड (चरण 2): 4,000 करोड़ रुपये 
  • सड़कों का कंक्रीटीकरण: 3,111 करोड़ रुपये 
  • गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड: 1,958 करोड़ रुपये
  • दक्षिण मुंबई कोस्टल रोड (रखरखाव): 1,516 करोड़ रुपये
  • बेस्ट (BEST) उपक्रम: 1,000 करोड़ रुपये (2012 से अब तक पालिका ने बेस्ट को 11,000 करोड़ रुपये की सहायता दी है.) 

(रिपोर्ट- श्रीरंग खरे)

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