- BMC देश का सबसे अमीर निकाय है, जिसकी वित्तीय ताकत कई देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा है.
- वित्तीय वर्ष 2016 से 2025 के बीच BMC ने करीब 3.49 लाख करोड़ रुपये की आय अर्जित की है.
- BMC का बजट वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिल्ली और बेंगलुरु नगर निगमों के संयुक्त बजट से दोगुना था.
बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव किसी साधारण निकाय का नहीं बल्कि देश के सबसे अमीर निकाय का चुनाव है, जिसकी वित्तीय ताकत कई देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा है और देश के कई छोटे राज्यों से इसका बजट अधिक है. यही कारण है कि राजनीतिक दलों ने बीएमसी चुनावों के लिए कमर कस ली है और हर पार्टी इसे बेहद गंभीरता से ले रही है. बीएमसी का वार्षिक बजट हजारों करोड़ का होता है. साथ ही यह देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास परियोजनाओं पर बड़ा असर डालने की क्षमता रखता है. आइए जानते हैं कि बीएमसी की आय का स्रोत क्या है और इस राशि को कहां पर खर्च किया जाता है.
बीएमसी की मजबूत वित्तीय स्थिति को इस बात से समझा जा सकता है कि वित्त वर्ष 2016 से 2025 के दौरान उसने 3.49 लाख करोड़ रुपये की आय अर्जित की है. वहीं इस अवधि के दौरान 2.99 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि बीएमसी के पास आय और खर्च के कई बड़े स्रोत हैं. हालांकि इस दौरान 50,800 करोड़ रुपये की राशि को खर्च ही नहीं किया जा सका.

दिल्ली-बेंगलुरु को काफी पीछे छोड़ा
बीएमसी को आर्थिक रूप से देश के सबसे संसाधन संपन्न नगर निगम के रूप में जाना जाता है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसका अनुमानित बजट दिल्ली और बेंगलुरु जैसे दो अन्य महानगरों के संयुक्त बजट से करीब दोगुना था. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीएमसी ने 59,954.7 करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जबकि दिल्ली नगर निगम और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका का बजट क्रमश: 16,683 करोड़ रुपये और 12,369 करोड़ रुपये था. कोलकाता नगर निगम का इस वित्तीय वर्ष का बजट मात्र 5,166.5 करोड़ रुपये था.
पिछले 10 सालों में बीएमसी का बजट करीब दोगुना होकर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 51 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और खर्च वित्तीय वर्ष 2015-16 में 20,500 करोड़ रुपये से बढ़कर इस वर्ष 44,500 करोड़ रुपये हो गया है.

बीएमसी को कहां से होती है आय?
बीएमसी को 2016 से 2025 के बीच फीस और यूजर चार्जेज से 94,600 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिसमें पंजीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, विलंबित सेवा लाइसेंस नवीकरण शुल्क, स्विमिंग पूल आरक्षण शुल्क, विध्वंस शुल्क, विज्ञापन शुल्क, जल कनेक्शन आदि आते हैं.
इसे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए प्राप्त राजस्व अनुदान और सब्सिडी के साथ ही अन्य सरकारी एजेंसियों की ओर से प्रदान सेवाओं से 86,700 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. उदाहरण के लिए बीएमसी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में बांद्रा-कुर्ला सड़कों की सफाई के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण से 61.7 करोड़ रुपये का शुल्क लिया.
साथ ही वित्तीय वर्ष 2016 से 2025 के बीच रोड टैक्स, स्ट्रीट टैक्स, थिएटर टैक्स, बिजली टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स सहित अन्य करों से 75,800 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.

बीएमसी कहां, कितना खर्च करती है?
सड़कें, पुल, सीवेज लाइनें, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन, शिक्षा, सुरक्षा, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन जैसे बुनियादी ढांचे के विकास पर बीएमसी के व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा खर्च होता है. पिछले 10 सालों में शहर के रखरखाव और उसे बेहतर बनाने पर 1,11,600 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
इस अवधि के दौरान अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों को अनुदान और कई तरह के फंड और योजनाओं के लिए10,700 करोड़ रुपये का योगदान दिया गया. इसी तरह से बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव पर 36,300 करोड़ रुपये खर्च हुए.
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, बीमा, कानूनी खर्च, विज्ञापन, जनसंपर्क, ईंधन, यात्रा, माल ढुलाई और वाहनों आदि जैसे प्रशासनिक कार्यों पर 8,600 करोड़ रुपये खर्च किए.
बीएमसी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों पर काफी राशि खर्च करता है. वित्तीय वर्ष 2025 में इसने वेक्टर जनित रोगों और कीटनाशकों के नियंत्रण पर 99.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
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