प्रतीकात्मक तस्वीर
मुंबई:
मुंबई स्थित भायखला जेल में बंद महिला कैदी मंजुला शेट्टे की मौत के बाद गरमाए हालात में एक अन्य सज़ायाफ्ता महिला कैदी ने आपबीती बताई है. महिला अधिकार मामलों की प्रसिद्ध कार्यकर्ता और शिवसेना विधायक डॉ. नीलम गो-हे को ख़त लिखकर यह बयान दिया गया है. इस ख़त की जानकारी खुद गो-हे ने प्रेस नोट के जरिए सार्वजनिक की है. मंजुला शेट्टे की हत्या के बाद श्रीमती नीलम गो-हे ने जेल में कैदियों से होनेवाले अमानवीय व्यवहार के खिलाफ़ आवाज़ उठाई थी जिसका संदर्भ पकड़ कर लिखे ख़त में महिला कैदी ने मुंबई स्थित नागपाड़ा और भायखला के महिला जेल में चल रहे कई अनियमितताओं को उजागर किया है.
कैदी लिखती है, 'नागपाड़ा महिला जेल में यूं तो दो रूम हैं लेकिन, इन में से एक भंगार से भरा है. जबकि दूसरे में कैदियों को फटी हुई दरी पर सुलाया जाता है. गंदगी स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनी है. भायखला महिला जेल में भी गंदगी एक चिंता का विषय है. साथ में जेल में बरकरार अनियमितताओं का जिक्र किया गया है. प्लास्टिक की थैली या बोतल के जेल में लाने पर पाबंदी होने के बावजूद महिला कैदियों के पास सामान रखने के लिए यही सहारा बना हुआ है. नहाने और पीने के पानी की राशानिंग चलती है और जेल के अंदर पानी पर पहला अधिकार पुलिस का बताया जाता है. जेल में नशे के लिए इस्तेमाल होते साधन उपलब्ध हैं और युवा महिला कैदियों को इसकी लत आसानी से अपनी गिरफ्त में लेती है. गंभीर मामलों की सज़ा भुगतने वाली महिलाओं के साथ साधारण मामलों की महिलाओं को रखा जाता है. इससे महिला कैदियों में गुनाह की मानसिकता प्रबल बनती जा रही है.
NDTV इंडिया से बातचीत में विधायक नीलम गो-हे ने बताया कि उन्होंने इस ख़त को महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित को सौंप दिया है. दीक्षित जेल व्यवस्था की जांच के लिए बनी SIT के सदस्य हैं. सुरक्षा के लिहाज से कैदी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. लेकिन, जरूरत पड़ने पर उसे जांच अधिकारियों के सामने रखने की बात गो-हे ने कही है. वे मानती हैं कि जेल कैदियों को सज़ा देने के लिए ही बने हैं. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि वहां रखे गए कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव का समर्थन किया जाए.
कैदी लिखती है, 'नागपाड़ा महिला जेल में यूं तो दो रूम हैं लेकिन, इन में से एक भंगार से भरा है. जबकि दूसरे में कैदियों को फटी हुई दरी पर सुलाया जाता है. गंदगी स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनी है. भायखला महिला जेल में भी गंदगी एक चिंता का विषय है. साथ में जेल में बरकरार अनियमितताओं का जिक्र किया गया है. प्लास्टिक की थैली या बोतल के जेल में लाने पर पाबंदी होने के बावजूद महिला कैदियों के पास सामान रखने के लिए यही सहारा बना हुआ है. नहाने और पीने के पानी की राशानिंग चलती है और जेल के अंदर पानी पर पहला अधिकार पुलिस का बताया जाता है. जेल में नशे के लिए इस्तेमाल होते साधन उपलब्ध हैं और युवा महिला कैदियों को इसकी लत आसानी से अपनी गिरफ्त में लेती है. गंभीर मामलों की सज़ा भुगतने वाली महिलाओं के साथ साधारण मामलों की महिलाओं को रखा जाता है. इससे महिला कैदियों में गुनाह की मानसिकता प्रबल बनती जा रही है.
NDTV इंडिया से बातचीत में विधायक नीलम गो-हे ने बताया कि उन्होंने इस ख़त को महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित को सौंप दिया है. दीक्षित जेल व्यवस्था की जांच के लिए बनी SIT के सदस्य हैं. सुरक्षा के लिहाज से कैदी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. लेकिन, जरूरत पड़ने पर उसे जांच अधिकारियों के सामने रखने की बात गो-हे ने कही है. वे मानती हैं कि जेल कैदियों को सज़ा देने के लिए ही बने हैं. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि वहां रखे गए कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव का समर्थन किया जाए.
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