भोपाल की गैस पीड़ित बूढ़ी विधवाओं की पेंशन बंद, सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिए

दिसंबर 2019 से बंद है पेंशन, वृद्ध महिलाओं ने हर स्तर पर आवेदन दिया, विरोध दर्ज कराया, लेकिन पेंशन नहीं मिली

भोपाल की गैस पीड़ित बूढ़ी विधवाओं की पेंशन बंद, सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिए

सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करती हुईं गैस पीड़ित महिलाएं.

भोपाल:

भोपाल गैस त्रासदी  (Bhopal Gas tragedy) ने सालों पहले कई लोगों के अपने छीन लिए, सालों बाद सरकार ने गैस त्रासदी में जो महिलाएं विधवा हुईं उनसे उनकी पेंशन छीन ली. भूख मिटाने के लिए कई बूढ़ी विधवाओं को खाना मांगना पड़ रहा है. सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, पूरा नहीं किया. दिसंबर 2019 से पेंशन बंद है. इस बीच कांग्रेस (Congress) की सरकार के मुख्यमंत्री चले गए, कमल की सरकार के शिवराज मुख्यमंत्री बन गए इन महिलाओं ने हर स्तर पर आवेदन दिया, विरोध दर्ज कराया लेकिन पेंशन नहीं मिली.

आठ अगस्त, 25 नवंबर ऐसी कई तारीखों पर हमने इस बारे में सरकार से जवाब मांगा. विश्वास सारंग जो भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास के कैबिनेट मंत्री हैं उन्होंने उस वक्त कहा था "गैस पीड़ित महिलाओं को बीजेपी के वक्त पेंशन मिलती थी, कमलनाथ ने रोक दिया, हम दिखवा रहे हैं, कोशिश करेंगे जल्द शुरू हो. कांग्रेस ने सिर्फ अमीरों का साथ दिया, बहुत असंवेदनशील काम किया पूरा निर्णय कांग्रेस का था."
      
तारीखें बीत गईं लेकिन साफिया, शकीला बी, सावित्री बाई, मुन्नी, केसरबाई ऐसे नामों की फेहरिस्त लंबी है, इनके साथ किए गए वादे, बस इंसाफ नहीं मिला.
     
इस बार हम फिर रईसा बी से मिले, जेपी नगर में रहती हैं. बुढ़ापे में छोटी सी दुकान चला रही हैं. अपनी खनकदार आवाज़ में कहती हैं "सरकारी दफ्तर के चक्कर काटना उनके बस में नहीं लोग कहते थे एडीएम दफ्तर जाओ, हम एडीएम दफ्तर नहीं गए भैय्या झूठ क्यों बोलें ... इत्ता बड़ा दफ्तर है ढूंढ कर थक जाएंगे." जब हमने पूछा बगैर पेंशन क्या परेशानी होती है तो उन्होंने कहा  "अरे भैय्या सब परेशानी है ... गोली बिस्किट रख लिया है ये डम डम गोली बिस्किट इसी को बेचते हैं."

शकीला बी पूछती हैं, "अब हम क्या खाएं, कैसे जिएं सरकारी अस्पताल में कोरोना बता देते हैं. मंत्री कहते हैं सहायता कर तो रहे हैं. एक टाइम पर खाना है. कैसे जी रहे हैं हम गरीब आदमी, किसी को क्या मतलब."


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भोपाल गैस त्रासदी में 5000 से अधिक महिलाएं विधवा हुईं, ऐसा सरकार का मानना है. अब कई पीड़ित 75-80 साल की हो चुकी हैं. 350 विधवा महिलाओं की मौत हो चुकी है. 1000 रुपये हर महीने इन्हें पेंशन मिलती थी, 2011 से इन्हें ये पेंशन दी जा रही थी.
      
एक बार फिर गैस राहत मंत्री विश्वास सारंग दिल्ली तक दौड़ लगाकर आए हैं, कह रहे हैं कि पेंशन शुरू हो जाएगी और ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं कि पेंशन आजीवन मिले. "हमारी सरकार ने कल्याणी बहनों को 1000 रुपये पेंशन शुरू की थी. कांग्रेस सरकार ने उस पर रोक लगाई, केन्द्र सरकार को बताया नहीं. मुख्यमंत्री ने घोषणा की ये और लंबी चली इसलिए मैंने मंत्रीजी से निवेदन किया है कि ताउम्र शुरू की जाए."
     
हालांकि विपक्ष को वायदे पर ऐतबार नहीं है, पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा कहते हैं "ना सिर्फ गैस पीड़ितों की पेंशन सरकार ने बंद कर रखी है, बाकी बुजुर्गों को भी पेंशन नहीं मिल रही है. कमलनाथ सरकार ने बुजुर्गों की पेंशन को 300 से 600 रुपये महीना किया था, शिवराज सरकार में वो भी नहीं मिल रही है ना गैस पीड़ितों को ना बाकियों को. ये सरकार सिर्फ घोषणाओं की सरकार है."
    
दरअसल 2008 में मध्यप्रदेश सरकार ने गैस पीड़ितों के लिए केन्द्र को एक एक्शन प्लान भेजा था. 272 करोड़ मांगे गए यूनाइन कार्बाइड के कचरे, गैस के जहर, पेंशन जैसे मद में. 2010 में पैसा मिला लेकिन अगले ही साल से सरकार का रोना शुरू हो गया. अभी भी उस पैसे से लगभग 147 करोड़ खर्च नहीं हुए हैं, जिसमें 40 करोड़ सामाजिक पुनर्वास और 80 करोड़ आर्थिक पुनर्वास का है.
    
दिसंबर में मुख्यमंत्री ने गैस त्रासदी के लिए स्मारक विधवा पेंशन शुरू करने का वायदा किया था, मिला कुछ नहीं. पहले पीड़ितों को 1000 रुपये पेंशन के मिलते थे, साल भर से नहीं मिला, राज्य में बुजुर्गों को वैसे भी 600 रु. की पेंशन मिलती है सो चतुर अधिकारियों का सुझाव है 400 और देकर 1000 रुपये कर देंगे.