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सूखे की मार झेल रहा मराठवाड़ा, 1000 टैंकर बुझा रहे प्यास, सूखे बांध में मरी मछलियां

महाराष्ट्र में जल संकट गहरा गया है. मराठवाड़ा, अहिल्यानगर, पुणे और लातूर समेत कई जिलों में लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं. तालाब में पानी नहीं होने के कारण मछलियां तड़प-तड़प कर मर रही हैं.

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इन दिनों गंभीर जल संकट (Maharashtra Water Crisis) देखने को मिल रहा है. जिसके चलते पीने के पानी तक की किल्लत होने लगी है. कई इलाकों में लोग सरकारी टैंकरों के भरोसे जिंदगी गुजार रहे हैं. वर्तमान में राज्य में लगभग 1000 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है. खासकर महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले मराठवाड़ा में जल संकट और भी गहराता जा रहा है. वहीं छत्रपति संभाजीनगर के गांवों में भी पानी बड़ी समस्या बन चुका है. कई गांवों में लोग रोजाना टैंकर का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं.

मर रहीं मछलियां

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की सबसे खराब स्थिति देखने को मिल रही है. दरअसल, मराठवाड़ा की राजधानी माने जाने वाले छत्रपति संभाजीनगर जिले के केलगांव स्थित जलाशय (तालाब) पूरी तरह सूख चुका है. पानी खत्म होने के कारण तालाब में मौजूद मछलियां तड़प-तड़प कर मर रही हैं. वहीं, इस क्षेत्र के पांच गांवों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना भी मुश्किल होता जा रहा है. जल संकट की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है और प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई.

मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा संकट

बता दें कि मराठवाड़ा पहले से ही सूखा प्रभावित इलाका माना जाता है. इस साल कमजोर मानसून और लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए हैं. यहां कम बारिश और शुष्क मौसम की वजह से जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं. कुएं और बोरवेल भी जवाब दे दिए, जिससे ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही. 

बारिश के इंतजार के बीच महाराष्ट्र के कई हिस्सों में जल संकट और सूखे का साया देखने को मिल रहा है. वहीं बांधों में लगातार घटते जलस्तर और सूखते जलस्रोतों के कारण राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थिति गंभीर हो चुकी है. मौजूदा हालात ये हैं कि राज्य के करीब 3,494 गांवों और बस्तियों में 1,000 से भी ज्यादा टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है.

अगर समय पर बारिश नहीं हुई, तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती है.

राज्य के ये जिले पानी टैंकर पर निर्भर-

  • ठाणे: 40 टैंकर
  • रायगढ़: 73 टैंकर
  • रत्नागिरी: 18 टैंकर
  • पालघर: 38 टैंकर
  • नासिक: 137 टैंकर
  • धुले: 03 टैंकर
  • नंदुरबार: 02 टैंकर
  • अहिल्यानगर: 123 टैंकर
  •  पुणे: 95 टैंकर
  • सतारा: 91 टैंकर
  • सांगली: 02 टैंकर
  • सोलापुर: 15 टैंकर
  • छत्रपति संभाजीनगर: 218 टैंकर
  •  जालना: 72 टैंकर
  • बीड: 06 टैंकर
  • परभणी: 11 टैंकर
  • नांदेड़: 14 टैंकर
  • धाराशिव: 09 टैंकर
  • लातूर: 02 टैंकर
  • यवतमाल: 30 टैंकर

(महाराष्ट्र से मोहसिन शेख की रिपोर्ट)

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