महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई. इस बैठक में 36,585 करोड़ रुपये की पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी है, जिससे 56 लाख किसानों का दो लाख रुपये तक का कृषि ऋण माफ होगा. इसके साथ ही समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को प्रोत्साहन लाभ देने का भी फैसला किया गया है.
56 लाख किसानों को कर्ज के बोझ से मिलेगी मुक्ति
सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग 56 लाख किसानों को सीधे तौर पर कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलेगी. मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, इस कर्ज माफी योजना का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनका कृषि ऋण 30 सितंबर, 2025 तक बकाया है.
सीएमओ के मुताबिक, इस योजना के तहत 65 लाख से अधिक खातों को शामिल किया जाएगा और लगभग 56 लाख किसानों के 36,585 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाने की उम्मीद है. इस महीने की 18 तारीख को होने वाले विधान परिषद चुनावों के लिए लागू आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर ऋण राहत पैकेज के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई.
ऋण चुकाने वाले किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन लाभ
मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया कि जिन किसानों ने नियमित रूप से अपने फसल ऋण का भुगतान किया है, उन्हें 50,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा. इस योजना के तीन घटक हैं-ऋण माफी, एकमुश्त निपटान (ओटीएस) और प्रोत्साहन लाभ और पात्रता के लिए भूमि स्वामित्व का कोई मानदंड नहीं होगा.
कर्जमाफी घटक के तहत जिन किसानों का मूलधन और ब्याज सहित कुल बकाया अल्पकालिक फसल ऋण दो लाख रुपये तक है, उन्हें पूरी कर्जमाफी का लाभ मिलेगा. इसके लिए ऋण एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच वितरित किया गया होना चाहिए, 30 सितंबर 2025 तक बकाया रहा हो और 31 मार्च 2026 तक उसका भुगतान नहीं किया गया हो.
जिन किसानों का बकाया ऋण दो लाख रुपये से अधिक है, उन्हें योजना के एकमुश्त निपटान घटक के तहत शामिल किया जाएगा. ऐसे किसानों को पहले दो लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करना होगा, जिसके बाद वे दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी के पात्र बन जाएंगे. किसानों को बकाया राशि में से अपना हिस्सा जमा कराने के लिए 31 मार्च, 2027 तक का समय दिया गया है. मंत्रिमंडल ने इस माफी योजना को किसानों के लिए एक बड़ी राहत बताया. मंत्रियों ने बैठक के दौरान इस कदम की सराहना की और इसे लाखों किसानों को लाभ पहुंचाने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय बताया.
राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता और सहकारी संस्थाओं के वे अधिकारी और कर्मचारी जिनका वेतन 25,000 रुपये प्रति माह से अधिक है, उन्हें इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है. प्रोत्साहन लाभ घटक के तहत, 2022-23 से 2024-25 के बीच के तीन वित्तीय वर्षों में से कम से कम दो वर्षों में निर्धारित अवधि के भीतर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों को 50,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. इसके अलावा, पात्र लाभार्थियों ने यदि चालू वित्तीय वर्ष में फसल ऋण लिया है, तो उन्हें उसका भुगतान भी समय पर करना होगा.
इन किसानों को मिलेगा 50,000 रुपये का अनुदान
एक अन्य प्रावधान के तहत, जिन किसानों पर 50,000 रुपये से अधिक का बकाया है, वे उस सीमा से अधिक की शेष राशि का भुगतान करने के बाद 50,000 रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे वे ऋणमुक्त हो जाएंगे. योजना के क्रियान्वयन की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति करेगी.
विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा कि कर्जमाफी योजना केवल घोषणा बनकर नहीं रह जानी चाहिए, क्योंकि अतीत में इस तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठते रहे हैं. पार्टी ने कहा कि ‘लाडकी बहिन योजना' शुरू होने के कुछ समय बाद लगभग 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया. कांग्रेस ने कहा कि इसलिए सरकार के इस दावे पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि ऋणमाफी योजना से 56 लाख किसानों को फायदा होगा.
ये भी पढ़ें: इंसानियत शर्मसार! 28 साल के लड़के ने 80 साल की बुजुर्ग महिला से किया दुष्कर्म
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं