तमिलनाडु में विजय सरकार परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रही है. शनिवार को मुख्यमंत्री ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जिसमें TVK के अलावा कांग्रेस, MDMK और अन्य दलों के नेता शामिल हुए. हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी DMK ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी.
इस पर मुख्यमंत्री ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस पार्टी ने तमिलनाडु की राजनीति में 60 वर्षों तक राज किया हो और जिसके शुरुआती सदस्यों ने राज्य के अधिकारों के लिए इतना बलिदान दिया हो, उसने इस बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया.
वहीं, सर्वदलीय बैठक में कई नेताओं ने खुलकर अपनी बात रखी. कांग्रेस के चार सांसदों को भी बैठक में बोलने का मौका मिला. बैठक में यह सुझाव दिया गया कि तमिलनाडु विधानसभा को परिसीमन के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए. कांग्रेस की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि लोगों को यह पता होना जरूरी है कि आखिर तमिलनाडु की सरकार परिसीमन का विरोध क्यों कर रही है.
बैठक के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि लोकसभा की 543 सीटों को फ्रीज किया जाना चाहिए और तमिलनाडु की मौजूदा 39 लोकसभा सीटों को भी फ्रीज कर देना चाहिए.
सूत्रों ने यहां तक बताया है कि तमिलनाडु की सरकार अगले 40 से 50 वर्षों तक लोकसभा की सीटों में कोई बदलाव नहीं चाहती है. कांग्रेस का भी तर्क है कि अगर इस प्रकार परिसीमन को आगे बढ़ाया गया, तो इससे लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
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जानकारी के लिए बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री विजय की ओर से परिसीमन के मुद्दे का विरोध किया गया हो. उनकी सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि दक्षिणी राज्यों के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने चाहिए. यह अलग बात है कि केंद्र सरकार ने कई मौकों पर आश्वासन दिया है, लेकिन इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ है. अब तमिलनाडु की सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर केंद्र सरकार को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है.
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