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लावणी के नाम पर फूहड़ता बर्दाश्त नहीं! महाराष्ट्र सरकार ने लागू किए कड़े नियम

लंबे समय से महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पारंपरिक लावणी की आड़ में कानफोड़ू डीजे म्यूजिक और अश्लील नृत्य का चलन बढ़ गया था, जिससे इस कला की गरिमा को ठेस पहुंच रही थी.

लावणी के नाम पर फूहड़ता बर्दाश्त नहीं! महाराष्ट्र सरकार ने लागू किए कड़े नियम
लावणी के नाम पर महाराष्ट्र में फूहड़ता बर्दाश्त नहीं होगी.
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पुणे:

महाराष्ट्र में पारंपरिक लावणी के नाम पर होने वाले अश्लील 'डीजे लावणी' कार्यक्रमों पर लगाम कसते हुए राज्य के सांस्कृतिक कार्य विभाग और रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण मंडल ने कड़े निर्देश जारी किए हैं. राष्ट्रवादी चित्रपट व सांस्कृतिक विभाग की मांग पर लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत अब लावणी, तमाशा और लोकनाट्य जैसे कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट की जांच और उसके लिए 'सूटेबिलिटी सर्टिफिकेट' लेना अनिवार्य कर दिया गया है. इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक परंपरा की पवित्रता को बनाए रखना है.

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लोककला 'लावणी' के नाम पर फूहड़ता और अश्लीलता परोसे जाने के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में अब अश्लील 'डीजे लावणी' और आपत्तिजनक सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर नकेल कसने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं. 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के चित्रपट व सांस्कृतिक विभाग के कड़े विरोध और लगातार प्रयासों के बाद, महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग और रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण मंडल Censor Board for Theatre ने इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं.

'सूटेबिलिटी सर्टिफिकेट' हुआ अनिवार्य

नए निर्देशों के अनुसार, अब राज्य में आयोजित होने वाले किसी भी नाटक, एकांकी, लोकनाट्य, तमाशा, लावणी, लोक संगीत और मेलों के लिए पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा. आयोजकों को कार्यक्रम की स्क्रिप्ट, निवेदन या सारांश को जांच के लिए प्रस्तुत करना होगा. इस जांच के बाद ही मंडल द्वारा 'सूटेबिलिटी सर्टिफिकेट' जारी किया जाएगा. बिना इस प्रमाणपत्र के ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन अवैध माना जाएगा.

राष्ट्रवादी चित्रपट व सांस्कृतिक विभाग की मुहिम लाई रंग

लंबे समय से महाराष्ट्र के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पारंपरिक लावणी की आड़ में कानफोड़ू डीजे म्यूजिक और अश्लील नृत्य का चलन बढ़ गया था, जिससे इस कला की गरिमा को ठेस पहुंच रही थी. 

इसे रोकने के लिए राष्ट्रवादी चित्रपट व सांस्कृतिक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष बाबासाहेब पाटिल ने राज्य के सांस्कृतिक विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों के लिए एक स्वतंत्र नियम, निगरानी तंत्र और उचित प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया था, जिसे अब सरकार ने मान लिया है.

पुलिस को दिए गए सख्त निर्देश

केवल नियम बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.  पुलिस अब यह सुनिश्चित करेगी कि आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के पास वैध प्रमाणपत्र हो और वहां किसी भी प्रकार की अश्लीलता या फूहड़ता का प्रदर्शन न हो.

लोककला और कलाकारों का सम्मान

इस फैसले को महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लावणी के मूल स्वरूप और लोककला की पवित्रता को बनाए रखने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. साथ ही, यह उन सच्चे कलाकारों के सम्मान को भी सुरक्षित करेगा जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं.

पुणे से यशपाल सोनकांबले की रिपोर्ट

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