महाराष्ट्र के शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र को नई पहचान देने वाले पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटिल का निधन हो गया. उनके निधन से महाराष्ट्र समेत पूरे देश के शिक्षा जगत में शोक की लहर है. डॉ. पाटिल ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और समाजसेवा के माध्यम से उच्च शिक्षा, चिकित्सा और खेल अधोसंरचना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने केवल संस्थानों की स्थापना नहीं की, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास की सोच को आगे बढ़ाया. देशभर में स्थापित उनके विश्वविद्यालय, अस्पताल और अन्य संस्थान आज भी लाखों छात्रों, मरीजों और युवाओं के जीवन को नई दिशा दे रहे हैं. उनके निधन को शिक्षा जगत की अपूरणीय क्षति माना जा रहा है.
शिक्षा के क्षेत्र में छोड़ गए अमिट छाप
डॉ. डी. वाय. पाटिल का नाम देश के प्रमुख शिक्षाविदों में शुमार किया जाता है. उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र विकास का आधार माना.
डी. वाय. पाटील ग्रुपचे संस्थापक, त्रिपुरा, बिहार आणि पश्चिम बंगालचे माजी राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील यांच्या निधनाचे वृत्त अत्यंत दुःखद आहे.
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) August 4, 2026
सर्वसामान्य कार्यकर्त्यापासून सुरू झालेला त्यांचा प्रवास महापौर, लोकप्रतिनिधी आणि पुढे विविध राज्यांचे राज्यपाल अशा महत्त्वाच्या… pic.twitter.com/AnhMADLXmF
महाराष्ट्राच्या शैक्षणिक, सामाजिक आणि आरोग्य क्षेत्राचा चेहरामोहरा बदलणारे महान शिक्षणमहर्षी, माजी राज्यपाल पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील साहेब यांच्या निधनाने संपूर्ण महाराष्ट्र आणि शैक्षणिक विश्वावर शोकाकळा पसरली आहे.
— Eknath Shinde - एकनाथ शिंदे (@mieknathshinde) August 4, 2026
केवळ संस्था उभ्या न करता, 'Academic Excellence' आणि 'Holistic… pic.twitter.com/ZRR2YsfkfX
सात स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित करने का रिकॉर्ड
डॉ. पाटिल के नाम देशभर में सात स्वतंत्र विश्वविद्यालयों की स्थापना का विशिष्ट रिकॉर्ड दर्ज है. यह उपलब्धि भारतीय उच्च शिक्षा के इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती है. इन संस्थानों के माध्यम से देश और विदेश के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा तथा शोध के अवसर प्राप्त हुए हैं.
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दिया बड़ा योगदान
शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा. कोल्हापुर, पुणे और नवी मुंबई सहित विभिन्न शहरों में स्थापित अस्पतालों ने लाखों मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराईं. इन संस्थानों ने न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं दीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध को भी प्रोत्साहित किया.
खेल जगत को दी विश्वस्तरीय पहचान
डॉ. डी. वाय. पाटिल ने खेल क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. नवी मुंबई स्थित डी. वाय. पाटिल स्टेडियम को देश के सबसे आधुनिक खेल परिसरों में गिना जाता है. विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस इस स्टेडियम ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खेल आयोजनों की मेजबानी की है.
राज्यपाल के रूप में भी निभाई अहम भूमिका
डॉ. पाटिल ने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. संवैधानिक पदों पर रहते हुए उन्होंने गरिमा, सादगी और जनसरोकारों की परंपरा को आगे बढ़ाया. उनका प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक दृष्टिकोण उन्हें एक अलग पहचान प्रदान करता था.
समाजसेवा और संस्थान निर्माण का प्रेरक मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी संस्थान की स्थापना करना आसान हो सकता है, लेकिन उसे लंबे समय तक ईमानदारी, गुणवत्ता और अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक संचालित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. डॉ. डी. वाय. पाटिल ने अपने जीवन में इस चुनौती को अवसर में बदला और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक स्थायी मॉडल स्थापित किया.
शोक की लहर, दी जा रही श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर के बाद राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियों ने श्रद्धांजलि व्यक्त की है. शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा. डॉ. डी. वाय. पाटिल का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. उनके निधन से महाराष्ट्र ने एक दूरदर्शी शिक्षाविद, सफल संस्थापक और समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है.
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