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महाराष्ट्र के आश्रम शालाओं में दो साल में 584 बच्चों की मौत: CJP ने शुरू किया 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान

कॉकरोच जनता पार्टी ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' कैंपेन की शुरुआत की है. ये कैंपेन तब शुरू किया गया जब महाराष्ट्र सरकार ने माना कि आदिवासी आवासीय स्कूलों में 584 की मौत हुई है.

महाराष्ट्र के आश्रम शालाओं में दो साल में 584 बच्चों की मौत: CJP ने शुरू किया 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान
महाराष्ट्र सरकार ने माना कि आदिवासी आवासीय स्कूलों में 584 की मौत हुई है.
CJP/X

महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों को लेकर सरकार की अपनी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पिछले दो सालों के भीतर आश्रम शालाओं में 584 मासूम बच्चों की जान चली गई. औसतन देखें तो इन सरकारी आवासीय विद्यालयों में लगभग हर रोज एक आदिवासी बच्चे की मौत हो रही है. इस प्रशासनिक लापरवाही और बदहाली के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है.

सांप के काटने से तीन बच्चियों की मौत ने खोली पोल

यह पूरा मामला तब और तूल पकड़ गया जब अगस्त के महीने में गढ़चिरौली जिले के एक आदिवासी हॉस्टल में दर्दनाक हादसा हुआ. हॉस्टल में पर्याप्त खाट (कॉट) न होने के कारण बच्चियों को जमीन पर ही सोने के लिए मजबूर किया गया था. हद तो तब हो गई जब एक ही कमरे में 79 लड़कियों को ठूंस-ठूंस कर रखा गया था. जमीन पर सो रही तीन आदिवासी छात्राओं को जहरीले सांप ने डस लिया, जिससे उनकी मौत हो गई.

इस भयावह घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया है और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे आदिवासी बच्चे

'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत करते हुए CJP ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पार्टी का कहना है कि कहने को तो ये आवासीय स्कूल आदिवासी बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये स्कूल मासूमों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं.

हॉस्टलों में न तो सोने के लिए सही इंतजाम हैं, न साफ-सफाई और न ही कोई आपातकालीन चिकित्सा सुविधा. क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चों को छोटे-छोटे कमरों में रखा जा रहा है, जिससे संक्रमण और हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है.

मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद गरमाई राजनीति

आश्रम शालाओं में लगातार हो रही मौतों और गढ़चिरौली की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद अब प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. CJP का कहना है कि सिर्फ जांच का ढांचा खड़ा करने और नोटिस जारी होने से हालात नहीं बदलेंगे. जब तक आश्रम शालाओं के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह सुधारा नहीं जाता, बच्चों को बेड, सुरक्षित कमरे और मेडिकल सुविधाएं नहीं दी जातीं, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी.

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