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महाराष्ट्र में 2 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे, पूरे राज्य में 21 फीसदी मतदाता घटे

राज्य में बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की भी है, जो सत्यापन फॉर्म ही लेने नहीं आए. ऐसे लोगों को EF कैटिगरी यानी अनकलेक्टेबल एन्युमरेशन फॉर्म में रखा गया है.

महाराष्ट्र में 2 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे, पूरे राज्य में 21 फीसदी मतदाता घटे
महाराष्ट्र में कम हुए मतदाता
PTI

महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं. विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के अभियान में ऐसा हुआ है. इस तरह राज्य के कुल मतदाताओं में से 21 फीसदी के नाम अब कट गए हैं. इन लोगों को एक महीने का वक्त मिलेगा और ये लोग अपना नाम वोटर लिस्ट में तय नियमों के तहत जुड़वा सकेंगे. SIR के तहत राज्य में वोटर लिस्ट का यह पहला ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ है. सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी की जाएगी. चुनाव आयोग के शेड्यूल के तहत सोमवार यानी 31 अगस्त को SIR का पहला ड्राफ्ट महाराष्ट्र में पब्लिश किया गया. इसके तहत राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों की वोटर सूची जारी की गई है. 

यदि कोई नागरिक सूची देखना चाहते तो वह इलेक्शन कमिशन के मतदाता पोर्टल (https://voters.eci.gov.in/) पर विजिट कर सकता है. इसके अलावा जिला स्तर पर सभी राजनीतिक दलों को भी वोटर लिस्ट की प्रतियां दी जाएंगी. SIR पहले महाराष्ट्र में करीब 9 करोड़ 78 लाख से ज्यादा वोटर थे. अब जो पहला ड्राफ्ट जारी हुआ है, उसके मुताबिक राज्य में अब 7 करोड़ 71 लाख के करीब मतदाता ही बचे हैं. इस तरह पहले के मुकाबले महज 78.86 फीसदी वोटर ही लिस्ट में बचे हैं. इन मतदाताओं में करीब 4 करोड़ पुरुष हैं, जबकि 3 करोड़ 75 लाख महिलाएं हैं. राज्य में तीसरे जेंडर के वोटरों की संख्या 3087 हैं. 

राज्य में बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की भी है, जो सत्यापन फॉर्म ही लेने नहीं आए. ऐसे लोगों को EF कैटिगरी यानी अनकलेक्टेबल एन्युमरेशन फॉर्म में रखा गया है. इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा वोटर पुणे के कटे हैं. शहर से 28 लाख 66 हजार वोटर कट गए हैं. मुंबई उपनगरीय से 26 लाख 58 हजार वोटरों के नाम कट गए हैं. इसके अलावा ठाणे से 28 लाख 59 हजार वोटरों के नाम गायब हैं. नागपुर से 14 लाख, नासिक से 10 लाख, मुंबई सिटी से 9 लाख 50 हजार और सोलापुर से 6 लाख 22 हजार मतदाताओं के नाम कट गए हैं. वहीं सिंधुदुर्ग, गढ़चिरौली जैसे इलाकों में नाम कटने वालों की संख्या कम है. इससे यह संकेत मिलता है कि प्रवासी लोगों की अधिक आबादी वाले जिलों में ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं.

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