पहाड़ों पर ऐसा क्या हुआ कि नेपाल में मच गई तबाही?
करीब 5200 मीटर ऊंचाई से ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर 1,200 मीटर नीचे घाटी में गिरा. इसके बाद, तेजी से बढ़ता हुआ मलबा हिमालय की घाटियों में नीचे की ओर आया. आपदा आने के बाद लोग अपनों की तलाश में दर-दर भटकने लगे. कई ऐसे परिवार हैं, जिनके घरों में त्रासदी के बाद से चूल्हा तक नहीं जला है.
By मोहम्मद साक़िब मज़ीद | रविवार, 30 अगस्त
बुधवार, 26 अगस्त की सुबह, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर वाले इलाक़े में भयानक रूप से अचानक आई बाढ़ और ज़मीन खिसकने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई. यह आपदा हिमालय की ऊंची चोटियों से शुरू हुई, जहां बर्फ़, चट्टान, कीचड़ और पानी का एक विनाशकारी सैलाब गांवों और बॉर्डर पर बने एक पोर्ट से टकराया.
नेपाल में हुए इस भयानक हादसे में अब तक 600 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. क़रीब 2,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिसमें दुनिया भर से आए सैकड़ों पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं.
रसुवा के त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाक़ों में नदी का पानी 60 से 70 फीट ऊपर तक उठ गया था. पानी के इस भयंकर उफान ने नदी किनारे बसे पूरे के पूरे बाज़ार, स्कूल, कॉलेज और रिहायशी बस्तियों को एक ही झटके में निगल लिया. जो इमारतें सैलाब को सह गईं, वे जर्जर खड़ी हैं और जो नहीं सह पाईं, वे मलबे में तब्दील हो चुकी हैं. दो-दो मंजिल ऊंचे मकानों के ऊपर तक गाद भर चुकी है.
अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से देखते ही देखते पूरे के पूरे गांव तबाह हो गए. हिमालय की घाटियों से पानी, बर्फ़, कीचड़ और चट्टानों का तेज बहाव गुज़रा. इससे सड़कें, पुल और पावर हाउस सब पूरी तरह से ख़त्म होते चले गए.
इस तबाही ने इमारतों को ज़मींदोज कर दिया. तेज़ी से बहते हुए मलबे के रास्ते में जो कुछ भी आया, सब बहता चला गया. बसें, कारें और तमाम तरह के व्हीकल्स मलबे का हिस्सा बन गए. सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियोज में कैद उन लम्हों को देखा जा सकता है, जब कुछ ही सेकंड में बाढ़ के दायरे में आए इलाक़े का नज़ारा बदल गया.
ग्यिरोंग पोर्ट पर लगे सर्विलांस कैमरों ने आपदा के उस पल को क़ैद किया, जिसमें बॉर्डर के नेपाली हिस्से से घाटी में नीचे की ओर भूरे रंग के कीचड़ का एक विशाल बहाव आता नज़र आया. इसने सीधे ग्यिरोंग पोर्ट की इमारत और वहां से भागने की कोशिश कर रहे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया.
ग्यिरोंग पोर्ट के CCTV फुटेज में दिखा तबाही का मंज़र
आपदा, भगदड़ और ख़त्म होती ज़िंदगियां...
इस इलाक़े की सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि बाढ़ की वजह से नदियों का दायरा काफ़ी ज़्यादा बढ़ गया था.
आपदा से पहले का नज़ारा
बाढ़ आने के बाद का मंज़र
इस तबाही के पीछे वजह क्या थी?
अब तक सामने आई जानकारी मुताबिक़, यह आपदा नेपाल में तिब्बत के बॉर्डर के पास स्थित पहाड़, लांगटांग लिरुंग के उत्तरी हिस्से में ऊंचाई पर शुरू हुई थी.
सैटेलाइट से मिली जानकारी से पता चलता है कि ग्लेशियर के नीचे की चट्टान ढह गई थी, जिससे बर्फ़ और चट्टानों के बड़े-बड़े टुकड़े नीचे घाटी में आ गिरे.
पत्थर और बर्फ के इस हिमस्खलन ने ल्हेंडे खोला नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे एक नेचुरल डैम यानी प्राकृतिक बांध बन गया.
पानी जमा होने लगा और अस्थिर बांध पर दबाव बढ़ता गया. आख़िरकार, वह टूट गया.
इसने सड़कों और पुलों को नष्ट कर दिया, बस्तियों को तहस-नहस कर दिया और नदी के रास्ते में आने वाली हर चीज़ को ख़त्म करता चला गया.
पानी, कीचड़ और पत्थरों का एक ज़बरदस्त बहाव तेजी से नीचे की ओर बढ़ा और तबाही शुरू हो गई.
हालांकि, पहले माना जा रहा था कि यह आपदा 4.4 तीव्रता वाले भूकंप की वजह से आई थी, लेकिन बाद में यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के एनालिसिस से पता चला कि सेस्मिक एनर्जी यानी भूकंपीय ऊर्जा असल में मलबे के ढहने और उसके बाद मलबे के बहाव से पैदा हुई थी.
हिमालय की ऊबड़-खाबड़ बनावट ने हालात और ज़्यादा ख़राब कर दिए. खड़ी ढलानों ने मलबे की नीचे की तरफ स्पीड बढ़ा दी, जबकि संकरी घाटियों ने इसके बहाव को नीचे बसी बस्तियों की तरफ़ मोड़ दिया.
त्रासदी के मुख्य केंद्र तक सबसे पहले पहुंचा NDTV
त्रासदी के मुख्य केंद्र तक सबसे पहले पहुंचा NDTV
नेपाल में आए विनाशकारी जल-प्रलय के बाद सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में नेपाल का रसुवा ज़िला इस पूरी त्रासदी का मुख्य केंद्र रहा है. कभी सैलानियों से गुलज़ार रहने वाला यह ख़ूबसूरत क्षेत्र आज तबाही के गहरे जख़्म झेल रहा है. चारों तरफ़ सिर्फ़ मलबों का ढेर, ध्वस्त मकान, बह चुकी सड़कें और टूटे हुए पुल दिखाई दे रहे हैं.
तबाही के इस मंजर और ज़मीनी हक़ीक़त को दुनिया के सामने लाने के लिए NDTV की टीम काठमांडू से 8 घंटे का बेहद ख़तरनाक और मुश्किल सफ़र तय करके रसुवा पहुंची है. यहां पर पहुंचने वाला NDTV पहला टीवी नेटवर्क है. काठमांडू से रसुवा को जोड़ने वाली मुख्य पक्की सड़क महाप्रलय की तेज धार में पूरी तरह बह गई है. ऐसे में राहत दलों और हमारी टीम को बेहद मुश्किल भरे, संकरे और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ा.
क्रेडिट्स
डेवलपर: मोहम्मद साक़िब मज़ीद
तस्वीरें: पीटीआई
इलस्ट्रेशन: NDTV ग्राफिक्स टीम
डेटा: NDTV डेटाफाई
सैटेलाइट इमेज: Vantor