डिजिटल एसेट और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में निवेश कर रातों-रात अमीर बनने का सपना देखने वालों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. दरअसल, नागपुर में एक फर्जी क्रिप्टो स्कीम के जरिए हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी का भंडाफोड़ हुआ है. नागपुर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और साइबर सेल ने एक संयुक्त कार्रवाई में इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए दो मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. पुलिस का दावा है कि इस गिरोह ने देशभर के करीब 31 हजार लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है.
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सुनियोजित ठगी को अंजाम देने के लिए 'CLBP System Private Limited Collection' नाम की एक कंपनी बनाई गई थी. कंपनी के मालिक राकेश अग्रवाल और मुख्य एजेंट मिहुल दीक्षित ने बाजार में 'फ्री क्वॉइन' (Free Coin) और 'मर्चेंट कॉइन' (Merchant Coin) नामक फर्जी डिजिटल एसेट पेश किए. इन्होंने निवेशकों को बेहद कम समय में मोटा मुनाफा और गारंटीड रिटर्न का लालच दिया. शुरुआती दौर में शिकायतकर्ता रीमा घोष सहित करीब 25 स्थानीय निवेशकों ने इस जाल में फंसकर लाखों रुपये निवेश कर दिए. जब वादे के मुताबिक रिटर्न मिलना बंद हुआ, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हुईं.
...और भी बड़ा हो सकता है ठगी का यह आंकड़ा
आर्थिक अपराध शाखा के मुताबिक, यह धोखाधड़ी केवल नागपुर या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं थी. कंपनी के लुभावने विज्ञापनों और एजेंटों के जाल के कारण महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 31,300 लोगों ने इस फर्जी स्कीम में निवेश कर दिया. शुरुआती आकलन के अनुसार, निवेशकों से वसूली गई कुल राशि 15 करोड़ 58 लाख रुपये से भी अधिक है. पुलिस को अंदेशा है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है.
चंडीगढ़ से दबोचा गया मास्टरमाइंड, बैंक खाते सील
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागपुर के पुलिस आयुक्त ने तुरंत आर्थिक अपराध शाखा को कार्रवाई के निर्देश दिए. पुलिस की एक विशेष टीम ने नागपुर से स्थानीय एजेंट मिहुल दीक्षित को हिरासत में लिया. इसके बाद कड़ियों को जोड़ते हुए मुख्य संचालक राकेश अग्रवाल को भी चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को खंगाला. जांच टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन खातों में जमा करीब 1 करोड़ 72 लाख रुपये की रकम को फ्रीज (Freeze) कर दिया है, ताकि निवेशकों के पैसे को सुरक्षित किया जा सके.
समय रहते एक्शन से टला बड़ा नुकसान
नागपुर पुलिस का कहना है कि अगर इस रैकेट को वक्त रहते नहीं पकड़ा जाता, तो ठगी का यह आंकड़ा 100 करोड़ के पार जा सकता था. डिजिटल एसेट के नाम पर चल रहे इस फर्जी नेटवर्क के तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से सफेदपोश लोग शामिल हैं.
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए नागपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. रवींद्र सिंगल ने बताया कि आर्थिक अपराध शाखा और साइबर पुलिस ने मिलकर क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है. CLBP सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिए 'फ्री कॉइन' जैसी फर्जी डिजिटल करेंसी में निवेश कराकर करीब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई है. हमने नागपुर और चंडीगढ़ से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके खातों में मौजूद 1.72 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं. हमारी टीम आगे की कड़ियों को खंगाल रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा. नागरिकों से अपील है कि वे बिना जांच-पड़ताल के ऐसे किसी भी अनधिकृत डिजिटल निवेश में पैसा न लगाएं.
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