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Two Wheeler Ambulance: दूर-दराज के गांव हों या पहाड़ी इलाके, मिनटों में पहुंचेगी बाइक-एंबुलेंस! ये है सरकार का प्रस्‍ताव 

Two Wheeler Ambulance: देश के दुरुह इलाकों में, जहां नॉर्मल एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती, वहां टू-व्‍हीलर एंबुलेंस पहुंचेगी. केंद्र सरकार ने इसके रेगुलेशन के लिए फ्रेमवर्क तैयार किया है.

Two Wheeler Ambulance: दूर-दराज के गांव हों या पहाड़ी इलाके, मिनटों में पहुंचेगी बाइक-एंबुलेंस! ये है सरकार का प्रस्‍ताव 
Bike Ambulance के रेगुलेशन को लेकर सरकार ने फ्रेमवर्क तैयार किया है
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

सरकार ने इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए दो-पहिया एम्बुलेंस (Two Wheeler Ambulance) के नियम प्रस्तावित किए हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने वैसे इलाकों के लिए, जहां 4 व्‍हीलर्स या बड़े एंबुलेंस वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां के लिए दो-पहिया एंबुलेंस के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है. 

सोमवार को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन का मकसद एंबुलेंस के तौर पर इस्‍तेमाल होने वाले दो-पहिया वाहनों यानी बाइक, स्‍कूटी वगैरह को आधिकारिक तौर पर मान्यता देना और उन्हें रेगुलेट करना है. ये वाहन ग्रामीण, दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में तेजी से मेडिकल मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जहां आम एंबुलेंस को आने-जाने में मुश्किल होती है.

तंग रास्‍तों, दुरुह इलाकों के लिए होगी बड़ी राहत 

प्रस्तावित नियमों का मकसद ऐसे वाहनों के लिए किसी खास रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की कमी को दूर करना है. मुश्किल रास्तों, तंग सड़कों और आम एम्बुलेंस के लिए सीमित पहुंच वाले इलाकों में इमरजेंसी मेडिकल सर्विस पहुंचाने के लिए इन्हें एक असरदार समाधान के तौर पर देखा जा रहा है. मंत्रालय के अनुसार, दो-पहिया एम्बुलेंस इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम को काफी बेहतर बना सकती हैं और खासकर ग्रामीण, दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में हेल्थकेयर तक पहुंच को आसान बना सकती हैं.

अब तक अलग कैटगरी में मान्‍यता नहीं 

अभी, इन वाहनों को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के तहत अलग कैटेगरी के तौर पर मान्यता नहीं मिली है. इस वजह से इनके डिज़ाइन, सुरक्षा फीचर्स, रजिस्ट्रेशन, टाइप अप्रूवल और फिटनेस जांच से जुड़े राष्ट्रीय स्तर पर तय मानक मौजूद नहीं हैं. इस कमी को दूर करने के लिए, मंत्रालय ने AIS-209 (Part 1):2026 को अपनाने का प्रस्ताव दिया है. ये एक नया मानक है जो लाइफ-सपोर्ट दो-पहिया सड़क एम्बुलेंस के निर्माण और कामकाज से जुड़ी जरूरतों को तय करता है.

तय नियमों का करना होगा पालन 

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के तहत, 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद बनने वाली सभी L2-कैटेगरी की दो-पहिया सड़क एम्बुलेंस को AIS-209 (Part 1):2026 के नियमों का पालन करना होगा. ऐसे वाहनों पर लगी इमरजेंसी वॉर्निंग टॉप लाइट्स को भी उसी तारीख से तय मानकों को पूरा करना होगा.

प्रस्तावित नियम राज्य सरकारों को इन एम्बुलेंस के काम करने के इलाके तय करने में छूट देते हैं. राज्यों को यह तय करने का अधिकार होगा कि स्थानीय ज़रूरतों और भौगोलिक स्थितियों के आधार पर ऐसे वाहनों को कहां तैनात किया जा सकता है.

मंत्रालय ने दो-पहिया एम्बुलेंस को ट्रांसपोर्ट वाहन मानने का भी प्रस्ताव दिया है. ऐसे मं इनके लिए फिटनेस सर्टिफिकेशन की ज़रूरतें अनिवार्य होंगी और फिटनेस सर्टिफिकेट को हर दो साल में रिन्यू कराना होगा. 

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