Mundhwa Land Deal: पुणे में मुंधवा स्थित 40 एकड़ सरकारी जमीन के हस्तांतरण मामले में पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) रवींद्र बिनवडे ने अमेडिया कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है. कंपनी को अब 21 करोड़ रुपये स्टाम्प ड्यूटी और 1.47 करोड़ रुपये जुर्माना (कुल 22.47 करोड़ रुपये) भरने का आदेश दिया गया है.
60 दिनों में चुनौती देने का विकल्प
मुंधवा में 'बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया' की 300 करोड़ रुपये की जमीन पर डेटा सेंटर बनाने का प्रस्ताव था. आरोप है कि कंपनी ने इस भारी-भरकम सौदे को केवल 500 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी पर पूरा कर लिया था. कंपनी ने उद्योग विभाग के 'इरादा पत्र' Letter of Intent के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट मांगी थी, जिसे प्रशासन ने अमान्य घोषित कर दिया है. कंपनी के पास अब इस फैसले के खिलाफ अगले 60 दिनों के भीतर राजस्व मंत्री के समक्ष अपील करने का अवसर है.
कंपनी और जमीन का कनेक्शन
यह मामला मुंधवा में ‘महार वतन' की 40 एकड़ सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है. इस लेनदेन में शामिल पार्थ पवार ‘अमेडिया' कंपनी के निदेशक और 99% शेयर होल्डर बताए जाते हैं.
300 करोड़ का सौदा और 500 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी
मुंधवा में 40 एकड़ सरकारी भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी धारक शीतल तेजवानी ने कथित तौर पर इसे दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार की सह-भागीदारी वाली फर्म अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को 300 करोड़ रुपये में बेच दिया था. चौंकाने वाली बात यह थी कि इस भारी-भरकम सौदे के लिए कंपनी ने केवल 500 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी चुकाई थी. कंपनी ने महाराष्ट्र आईटी-आईटीईएस नीति 2023 का हवाला देते हुए पूरी छूट का दावा किया था. यानी इस खरीद-बिक्री में 21 करोड़ रुपये की स्टांप शुल्क को माफ कर दिया गया था.
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