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This Article is From Oct 17, 2025

40 दिन तक बंधक, 58 करोड़ कराए ट्रांसफर... ये है अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट

महाराष्ट्र एडीजी यशस्वी यादव ने बताया कि यह गिरोह इतना प्रोफेशनल था कि पढ़े-लिखे लोग भी इनके जाल में फंस गए. यह केस दिखाता है कि कोई भी डिजिटल ठगी से सुरक्षित नहीं है, चाहे वो कितना भी समझदार क्यों न हो.

40 दिन तक बंधक, 58 करोड़ कराए ट्रांसफर... ये है अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट मामले में मुंबई पुलिस को बड़ी कामयाबी
  • मुंबई पुलिस ने गुजरात और राजस्थान से डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के अंतरराज्यीय गिरोह के 7 आरोपियों को अरेस्ट किया है.
  • गिरोह ने खुद को एटीएस और एनआईए अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर बुजुर्ग से करोड़ों की ठगी की.
  • 72 वर्षीय व्यवसायी और उनकी पत्नी को 40 दिनों तक मानसिक बंधक बना कर 58 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई.
मुंबई:

देशभर में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामलों के बीच मुंबई पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. मुंबई पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर गुजरात-राजस्थान से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह खुद को एटीएस और एनआईए अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर लोगों से ठगी करता था. इस गिरोह के खिलाफ 13 राज्यों में 31 से ज़्यादा मामले दर्ज हैं.

ये भी पढ़ें- न्यायपालिका के नाम और मुहर से लोगों को डिजिटल अरेस्ट से ठग रहे... सुप्रीम कोर्ट ने उठाया ये बड़ा कदम

मुंबई के एक दो बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों की ठगी की गई. पहला मामला 58 करोड़ की ठगी और दूसरा मामला 70 लाख की ठगी का है.डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बीच मुंबई से सामने ईए दोनों बड़े मामले डरा देने वाले हैं. 

क्या है डिजिटल अरेस्ट का मामला?

मुंबई में 72 साल के एक बिज़नेसमैन और उनकी पत्नी के साथ अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट स्कैम सामने आया है. ठगों ने खुद को ED और CBI अफसर बताकर इस कपल को 40 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बना लिया और 58 करोड़ रुपये से ज़्यादा हड़प लिए. पीड़ित शख्स एक नामी इन्वेस्टर हैं. उन्होंने कई फार्मा कंपनियां शुरू की थीं और कई में ऊंचे पदों पर काम भी किया था. उनकी पत्नी भी काफी पढ़ी-लिखी हैं. दोनों बेहद समझदार और अनुभवी लोग थे, लेकिन इस साइबर गैंग ने इतनी चालाकी से जाल बिछाया कि वो फंस गए.

ठगों ने वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस स्टेशन और कोर्टरूम तक “रिक्रिएट” कर दिया था. हर दो घंटे में आरोपी कपल से “इंटरोगेशन” करते थे और उन्हें डराते रहते थे कि अगर बात किसी को बताई तो उन पर ED या CBI केस लग जाएगा. 29 सितंबर को उनके अकाउंट से आख़िरी ट्रांजैक्शन हुआ. इसके बाद भी कपल को 11 दिन तक यकीन ही नहीं हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है. आखिरकार 10 अक्टूबर को उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

महाराष्ट्र साइबर ने अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और कई बैंक अकाउंट्स से रकम बरामद की है. पुलिस ने करीब 6000 बैंक अकाउंट फ्रीज़ किए हैं, ताकि बाकी रकम भी रिकवर की जा सके. अधिकारियों के मुताबिक, ये अब तक का भारत का सबसे बड़ा व्यक्तिगत डिजिटल स्कैम है. कपल इतने बड़े मानसिक आघात में थे कि वे “एक्सट्रीम स्टेप” लेने की हालत में पहुंच गए थे. लेकिन पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही दिनों में केस का बड़ा हिस्सा सुलझा लिया.

महाराष्ट्र एडीजी यशस्वी यादव ने बताया कि यह गिरोह इतना प्रोफेशनल था कि पढ़े-लिखे लोग भी इनके जाल में फंस गए. यह केस दिखाता है कि कोई भी डिजिटल ठगी से सुरक्षित नहीं है, चाहे वो कितना भी समझदार क्यों न हो.

68 साल के बुजुर्ग ने 70 लाख की ठगी

शिकायत के मुताबिक, दूसरे मामले में पनवेल (रायगढ़) के एक 68 वर्षीय बुजुर्ग को ठगा गया. पीड़ित को 25 सितंबर 2025 को दोपहर 3:57 बजे से लेकर 28 सितंबर 2025 तक फोन और व्हॉट्सऐप कॉल किए गए. कॉल करने वाले खुद को एटीएस, नई दिल्ली और एनआईए के अधिकारी बताकर धमकाने लगे कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग और पीएमएलए केस में आया है. उन्होंने कहा कि पीड़ित के बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिए जाएंगे. इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराया और खुद को पुलिस अफसर बताकर जांच का नाटक किया. डरे हुए पीड़ित से कुल 70 लाख रुपये ठग लिए गए.

पुलिस की जांच और कार्रवाई

आर.ए.के. रोड पुलिस थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से तकनीकी जांच शुरू की. जांच में करीब 15 बैंक खाते फ्रीज़ किए गए, जिनमें से 10.5 लाख रुपये की रकम जब्त की गई. पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया है कि गिरोह के कुछ सदस्य गुजरात और राजस्थान में छिपे हैं. इसके बाद एक विशेष टीम वहां भेजी गई. आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे, लेकिन पुलिस ने लोकेशन ट्रैक कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस के अनुसार, आरोपी युवराज उर्फ मार्को गिरोह का मुख्य सरगना है, जो पिछले 2-3 साल से साइबर ठगी में सक्रिय है. बाकी आरोपी बैंक अकाउंट और सिम कार्ड की व्यवस्था करने का काम करते थे, जिससे ठगी को अंजाम दिया जाता था.

देशभर में 31 शिकायतें दर्ज

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ अब तक देश के 13 राज्यों में 31 से ज्यादा साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं. इनमें महाराष्ट्र, मुंबई, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड, तेलंगाना, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, केरल और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

लेखक के बारे में
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पारस दामा
Principal Correspondent
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