- मुंबई में कबूतरखाने को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है.
- विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कबूतरों को इंसाफ दिलाने का भरोसा दिया था.
- मुंबई के 51 कबूतरखाने अब भी बंद हैं.
मुंबई में कबूतरखानों को फिर से शुरू करने को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है. जैन राष्ट्रसंत मुनि निलेशचंद्र महाराज ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात कर चेतावनी दी है कि अगर मुंबई के बंद पड़े सभी कबूतरखानों को तुरंत चालू नहीं किया गया, तो जैन समाज आंदोलन और आमरण अनशन करेगा. 8 महीने पहले आजाद मैदान में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने जैन मुनि नीलेशचंद्र महाराज को 'कबूतरों को इंसाफ' दिलाने का भरोसा दिया था.

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अब भी हैं बंद कबूतरखाने
मुंबई में कबूतरों को दाना डालने की जगहें कबूतरखाने अभी तक बंद हैं, जिससे आरोप है किवादा पूरा नहीं किया गया है. मुंबई के कबूतरखाने तुरंत शुरू किए जाएं, अन्यथा इस मांग को लेकर आंदोलन और अनशन किया जाएगा.
कबूतरों के पंख और बीट से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से बीएमसी ने दादर सहित मुंबई के कबूतरखानों में दाना डालने पर रोक लगाई है.
जैन मुनि नीलेशचंद्र महाराज ने इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताया था और कबूतरों की भुखमरी से मौत का दावा करते हुए इसके खिलाफ आजाद मैदान और अन्य जगहों पर प्रदर्शन और अनशन भी किया था.
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जैन मुनि ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात के दौरान उन्हें 8 महीने पहले आज़ाद मैदान में हुए आंदोलन के वक्त दिए गए आश्वासन की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि आश्वासन के बावजूद मुंबई के सभी 51 कबूतरखाने अब भी बंद हैं, जिससे बेजुबान पक्षियों के दाने-पानी और निवाले पर संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि अगर इन्हें जल्द नहीं खोला गया, तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे.
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पब्लिक हेल्थ और सांस से जुड़ी बीमारियों जैसे हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस के खतरों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर बीएमसी ने दादर सहित मुंबई के 51 कबूतरखानों को बंद कर दिया था और वहां दाना डालने पर पाबंदी लगा दी थी.
जैन समाज और पक्षी प्रेमियों का कहना है कि मूक पक्षियों को दाना खिलाना उनकी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और जीव दया का हिस्सा है. कबूतरखानों को बंद करने और दाना डालने वालों पर बीएमसी द्वारा एफआईआर और जुर्माना लगाने की कार्रवाई का लगातार विरोध हो रहा है.
(Input- Ruttik Gankawar, Devendra Kolhatkar)
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