रेलवे स्टेशन पर मिलने वाला मुफ्त वाई-फाई यात्रियों के लिए सुविधा माना जाता है, लेकिन मुंबई में एक महिला के लिए यही सुविधा बड़ी मुसीबत बन गई. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर फ्री सार्वजनिक (Public Wifi) वाई-फाई का इस्तेमाल करने के बाद वह साइबर ठगी का शिकार हो गई. पुलिस के अनुसार जालसाजों ने महिला को ‘RTO CHALLAN.APK' नाम की फाइल भेजी. इसे डाउनलोड करते ही मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो गया और अपराधियों ने संवेदनशील जानकारी हासिल कर ली. इसके बाद केवल 28 मिनट के भीतर क्रेडिट कार्ड से 4.27 लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई. NDTV के लिए रुत्तिक गणकवर की रिपोर्ट.
फ्री वाई-फाई के जरिए लगाया साइबर जाल
मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि साइबर अपराधियों ने सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल कर पीड़िता के मोबाइल तक पहुंच बनाई. इसके बाद महिला के फोन पर ‘RTO CHALLAN.APK' नाम की फाइल भेजी गई. महिला ने इसे ट्रैफिक चालान से जुड़ा आधिकारिक संदेश समझकर डाउनलोड कर लिया. जांचकर्ताओं के अनुसार फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल डिवाइस में मालवेयर सक्रिय हो गया और उसने फोन में मौजूद महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंच बना ली.

Cyber Fraud: फ्री वाईफाई से रहे सावधान
28 मिनट में हुए पांच ट्रांजैक्शन
साइबर ठगों ने पीड़िता के मोबाइल और वित्तीय जानकारी तक पहुंच मिलने के बाद बेहद तेजी से कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक केवल 28 मिनट के भीतर क्रेडिट कार्ड से पांच अनधिकृत लेनदेन किए गए. इन ट्रांजैक्शनों के जरिए कुल 4,27,264 रुपये निकाल लिए गए. पीड़िता को जब तक धोखाधड़ी का पता चला, तब तक खाते से बड़ी रकम निकल चुकी थी.
फरीदाबाद में भी सामने आया था ऐसा मामला
इस तरह का साइबर फ्रॉड पहले हरियाणा के फरीदाबाद में भी सामने आ चुका है. वहां एक व्यक्ति को ‘RTO CHALLAN' के नाम पर संदेश भेजा गया था. APK फाइल डाउनलोड करने के बाद उसका मोबाइल हैक हो गया. उस मामले में पीड़ित के खाते से 44 हजार रुपये और उसकी मां के खाते से 1.97 लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई थी. बाद में साइबर थाना एनआईटी ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
APK फाइल क्यों होती हैं खतरनाक?
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक APK फाइलें एंड्रॉयड ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करने का माध्यम होती हैं. यदि ये फाइलें आधिकारिक Google Play Store या भरोसेमंद स्रोत से न हों, तो इनमें मालवेयर छिपा हो सकता है. ऐसी फाइलें इंस्टॉल होते ही फोन के मैसेज, OTP, बैंकिंग जानकारी, संपर्क सूची और अन्य निजी डेटा तक पहुंच बना सकती हैं. इसके बाद साइबर अपराधी बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स को निशाना बनाते हैं.
पुलिस की लोगों को सलाह
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या व्हाट्सएप पर आए संदिग्ध संदेश को डाउनलोड न करें. पुलिस का कहना है कि ट्रैफिक चालान का भुगतान केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल और आधिकारिक प्लेटफॉर्म के जरिए ही करें. ऑनलाइन मिलने वाले “डिस्काउंटेड चालान सेटलमेंट” या संदिग्ध ऑफर से सावधान रहें. किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.
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